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प्राकृतिक खेती से सशक्त हो रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था, 63 हजार किसानों से खरीदेंगे उपज

Natural farming is strengthening the rural economy, produce will be purchased from 63 thousand farmers - Shimla News in Hindi

खास खबर। शिमला प्रदेश में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रही है। यह योजना प्रदेश के हजारों किसानों एवं बागवानों के जीवन में आर्थिक, सामाजिक तथा पर्यावरणीय परिवर्तन ला रही है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, कृषि लागत में वृद्धि, मिट्टी की घटती उर्वरता तथा जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान जैसी चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभकारी और टिकाऊ विकल्प बनकर सामने आई है।
प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने के ऐतिहासिक निर्णय ने किसानों का विश्वास और अधिक मजबूत किया है। हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से सुरक्षा मिलने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन भी मिल रहा है।
कृषि विभाग ने इस वर्ष एक लाख नए किसानों को हिम परिवार रजिस्टर से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक 70 हजार से अधिक किसान हिम परिवार रजिस्टर से जुड़ चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत है। यह पंजीकरण प्रक्रिया किसानों तक सरकारी योजनाओं का पारदर्शी एवं प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आने वाले वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य लाभार्थियों की संख्या में और वृद्धि सुनिश्चित की जाए, ताकि आर्थिक समृद्धि गांवों तक पहुंचे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो सके। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांव की पूंजी को गांव की आर्थिकी में ही बनाए रखना है। वर्तमान में प्रदेश में 2,23,029 कृषक एवं बागवान परिवार पूर्ण या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। यह अभियान अब प्रदेश की 99.3 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक की खरीद 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल गेहूं, मक्की, हल्दी एवं जौ की खरीद की जा चुकी है। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में 6.40 करोड़ रुपये की राशि प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की गई है।
कृषि विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के लगभग 63 हजार किसानों से प्राकृतिक खेती की उपज खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में प्राकृतिक गेहूं की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष जहां 838 किसानों से गेहूं खरीदा गया था, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग 2,022 तक पहुंच गई है। सरकार का दृष्टिकोण है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य केवल फसलों का मूल्य नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास का सम्मान भी है, क्योंकि इससे छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार प्राकृतिक उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं विपणन पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सकें और प्राकृतिक खेती को स्थायी आजीविका के रूप में स्थापित किया जा सके। पिछले वर्ष की खरीद से प्राप्त प्राकृतिक उत्पादों में से 420 क्विंटल गेहूं आटा, 1,370 क्विंटल दलिया उत्पाद, 1,628 क्विंटल मक्की आटा तथा 59 क्विंटल जौ का आटा प्रसंस्कृत कर खाद्य आपूर्ति निगम और कृषि विभाग के माध्यम से विपणन किया गया।

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Web Title-Natural farming is strengthening the rural economy, produce will be purchased from 63 thousand farmers
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