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मोदी सरकार ने हिमाचल के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी : जे.पी. नड्डा

Modi government has left no stone unturned in the development of Himachal: J.P. Nadda - Shimla News in Hindi

खास खबर। शिमला केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास, पुनर्निर्माण और जनकल्याण के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन प्रदेश की कांग्रेस सरकार इन अवसरों को धरातल पर परिणामों में बदलने में असफल रही है।
शिमला के होलीडे होम में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों, हिमाचल प्रदेश को मिले केंद्रीय सहयोग और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में भाजपा को सभी चार सीटें देकर विकास, सुशासन और राष्ट्रहित की राजनीति पर अपना भरोसा जताया है। हाल ही में हुए पंचायत और नगर निकाय चुनावों में भाजपा को मिला जनसमर्थन भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष का संकेत है।
नड्डा ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता योजना के तहत 2,381 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के माध्यम से 2,006 करोड़ रुपये तथा बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 2,150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में भी केंद्र सरकार हर कदम पर हिमाचल के साथ खड़ी रही।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं चल रही हैं। रेलवे क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 2,911 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जबकि 13,168 करोड़ रुपये की लागत वाली चार प्रमुख रेल परियोजनाओं पर कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना, वंदे भारत ट्रेन, आईआईएम सिरमौर, आईआईआईटी ऊना, स्मार्ट सिटी मिशन, रेणुका जी बांध और लुहरी परियोजना जैसे विकास कार्य केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
नड्डा ने कहा कि एम्स बिलासपुर, मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर और आईजीएमसी शिमला के लिए केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। साथ ही जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) समर्थित 1,422 करोड़ रुपये की परियोजना के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत स्वीकृत 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक ही पूरा हो पाया है। 12 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स में भी केवल एक तैयार हुई है, जबकि 73 स्वीकृत ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में से एक भी संचालित नहीं हो सकी है।
कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2022 में बल्क ड्रग पार्क परियोजना को मंजूरी दे दी थी, लेकिन पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने में लगभग तीन वर्ष लग गए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार समय पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करती, तो हिमाचल प्रदेश फार्मा उद्योग का बड़ा केंद्र बन सकता था और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते थे। उनके अनुसार केंद्र सरकार ने परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की थी और 225 करोड़ रुपये जारी भी किए, लेकिन प्रदेश सरकार केवल 102.13 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी।
नड्डा ने कहा कि 100 करोड़ रुपये लागत वाले मेडिकल डिवाइस पार्क को फरवरी 2022 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन प्रदेश सरकार अक्टूबर 2024 में इस परियोजना से पीछे हट गई, जिसके कारण केंद्र द्वारा जारी 30 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी वापस करनी पड़ी। उन्होंने इसे प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए बड़ा नुकसान बताते हुए कहा कि यह परियोजना हिमाचल को चिकित्सा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिला सकती थी।
प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का वादा किया था, लेकिन आज प्रदेश में प्रशासनिक अव्यवस्था और निर्णयहीनता का माहौल है। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त प्रभार के आधार पर संचालित होना सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश की वास्तविक बागडोर शिमला के बजाय दिल्ली से संचालित होती दिखाई देती है।
नड्डा ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन में समन्वय की कमी के कारण विकास परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता अब घोषणाएं नहीं, बल्कि परिणाम चाहती है। जनता बहानों के बजाय जवाबदेही और राजनीति के बजाय विकास को प्राथमिकता देती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के विकास और समृद्धि के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

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