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शिमला में टनल निर्माण से बढ़ा भू-जोखिम : आधी रात में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग

Landslide Risk Increases in Shimla Due to Tunnel Construction: People Forced to Leave Homes in the Middle of the Night - Shimla News in Hindi

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बुनियादी ढांचा विकास एक बार फिर सुरक्षा और स्थिरता के सवालों के घेरे में आ गया है। भट्टाकुफर से संजौली के बीच फोरलेन टनल निर्माण के दौरान चलौंठी क्षेत्र में शुक्रवार देर रात हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब एक छह मंजिला रिहायशी इमारत में अचानक बड़ी दरारें उभर आईं। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने रात करीब 10 बजे इमारत को तत्काल खाली कराने का फैसला लिया। इस इमारत में रह रहे करीब 10 परिवारों को कड़ाके की ठंड में बच्चों और बुजुर्गों के साथ सड़क पर आना पड़ा। कुछ ही देर बाद पास के एक होटल और अन्य मकानों में भी दरारें दिखाई देने लगीं, जिसके बाद होटल को भी खाली कराया गया। इससे वहां ठहरे पर्यटक भी आधी रात को सड़कों पर आ गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संजौली-ढली बाईपास पर ट्रैफिक रोक दिया और इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते तीन दिनों से मकानों में हल्की दरारें दिखने लगी थीं, जिसकी सूचना निर्माण कंपनी और प्रशासन को दी गई थी। हालांकि उस समय इमारतों को सुरक्षित बताया गया। शुक्रवार शाम को दरारें तेजी से बढ़ीं, जिससे खतरा साफ नजर आने लगा और देर रात आपात कार्रवाई करनी पड़ी। यह पूरा घटनाक्रम टनल निर्माण के दौरान हो रही ब्लास्टिंग और भारी मशीनों से पैदा हो रहे वाइब्रेशन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन के अनुसार प्रभावित परिवारों को रात में ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि शुरुआती घंटों में ठहरने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग देर रात तक ठंड में सड़क पर बैठे रहे और कुछ लोगों को आग जलाकर रात गुजारनी पड़ी। इससे प्रशासनिक तैयारियों और आपदा प्रबंधन पर भी सवाल उठे हैं।
चलौंठी की घटना ने भट्टाकुफर हादसे की यादें फिर ताजा कर दी हैं, जहां टनल और फोरलेन निर्माण के दौरान गलत कटिंग से सड़क धंस गई थी और एक बहुमंजिला इमारत मानसून में गिर गई थी। उस मामले में भी प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विवाद बना हुआ है। ऐसे में बिना बारिश के मकानों में दरारें आना इलाके की भू-स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान तकनीकी निगरानी और भूगर्भीय अध्ययन की अनदेखी भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे सकती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि टनल निर्माण की तत्काल तकनीकी जांच हो, ब्लास्टिंग पर रोक लगे और घरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास के नाम पर जान-माल का जोखिम न बढ़े।

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Web Title-Landslide Risk Increases in Shimla Due to Tunnel Construction: People Forced to Leave Homes in the Middle of the Night
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