कांगड़ा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के प्रागपुर में आयोजित 56वें पूर्ण राज्यत्व दिवस समारोह के दौरान हिमाचल प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दीं। यह प्रागपुर में आयोजित पहला समारोह था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड टुकड़ियों से सलामी ली। परेड का नेतृत्व परेड कमांडर आईपीएस अधिकारी तरुणा ने किया। परेड में आईआरबीएन जंगलबैरी, आईआरबीएन सकोह, आईआरबीएन पंडोह, पुलिस जिला नूरपुर, होमगार्ड महिला बटालियन धर्मशाला, होमगार्ड पुरुष और महिला बटालियन धर्मशाला, एसडीआरएफ पंडोह, धर्मशाला ट्रैफिक पुलिस, वन मित्र, एनसीसी राजकीय महाविद्यालय ढलियारा, स्काउट्स एंड गाइड्स और अन्य इकाइयों ने भाग लिया।
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मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लोगों को बधाई देते हुए राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के अमूल्य योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने किसानों और बागवानों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में एक कृषि और बागवानी आयोग के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस आयोग के गठन के लिए आगामी विधानसभा बजट सत्र में एक विधेयक पेश करेगी।
उन्होंने जसवां विधानसभा क्षेत्र के प्रागपुर में एसडीएम कार्यालय और नल्सूहा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली तो पूर्व सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन बकाया के रूप में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां छोड़ी थीं। वर्तमान में यह राशि 8,555 करोड़ रुपये है।
कठिन वित्तीय हालात के बावजूद उन्होंने जनवरी माह में 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों की लंबित पेंशन और पारिवारिक पेंशन बकाया का पूरा भुगतान करने की घोषणा की। इसके लिए 90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जो 1 जनवरी, 2016 और 31 दिसंबर, 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं, उनका पेंशन और अन्य लाभ में संशोधन के कारण ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट का एरियर बना है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ग्रेच्युटी के बकाए के अतिरिक्त 50 प्रतिशत और लीव एनकैशमेंट के बकाए के 70 प्रतिशत का भुगतान उन्हें जनवरी माह में किया जाएगा। राज्य सरकार के इस देनदारी पर 96 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस अवसर के जरिए 55 वर्षों की उपलब्धियों का आकलन करने और आने वाले वर्षों में राज्य को किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, इस पर विचार करने का मौका मिला है। इस जिम्मेदारी और विजन के साथ, राज्य सरकार ‘समृद्ध हिमाचल विजन’ नाम का एक दस्तावेज तैयार कर रही है जो अब अपने अंतिम चरण में है।
उन्होंने कहा कि यह विजन दस्तावेज राज्य के लोगों, विशेषज्ञों, प्रशासन और संस्थानों के साथ बड़े पैमाने पर संवाद करके तैयार किया जा रहा है। दस्तावेज का मसौदा बनाते समय हिमाचल प्रदेश के पर्यावरण, मेहनती लोगों की आकांक्षाओं और समृद्ध सामाजिक परंपराओं का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसी विकासात्मक योजना बनाना है जो पर्यावरण के अनुकूल, आपदा प्रतिरोधी और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चले।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह विजन एक साझा रोडमैप के तौर पर कार्य करेगा, जो विकास और जिम्मेदारी, प्रगति और पर्यावरण संरक्षण, आकांक्षाओं और वास्तविकता के बीच संतुलन बनाए रखेगा ताकि हिमाचल प्रदेश अपनी अलग पहचान को बनाए रखते हुए लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सके।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 46,862 करोड़ रुपये मिले थे जबकि मौजूदा सरकार को अब तक सिर्फ 18,903 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि अगर कुल केंद्रीय हस्तांतरण को ध्यान में रखा जाए, तो भाजपा सरकार के दौरान यह राशि 1,16,000 करोड़ रुपये थी जबकि मौजूदा सरकार को आज तक सिर्फ 70,191 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी मुआवजे के तहत भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान 12,861 करोड़ रुपये दिए गए जबकि हमारी सरकार के कार्यकाल में यह मुआवजा राशि बंद कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान पूर्व भाजपा सरकार को वर्ष 2020-21 और 2021-22 में कोविड अवधि के दौरान अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के कारण वर्तमान सरकार को 1,700 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण लेने की सुविधा पर रोक लगा दी गई है।
प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों को बढ़ाकर और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करके वित्तीय स्थिति को और बेहतर करने का काम किया है। राज्य का अपना राजस्व, जो पूर्व सरकार के पांच साल के कार्यकाल में 55,000 करोड़ रुपये था, वह मौजूदा सरकार के सिर्फ तीन वर्षों में 49,500 करोड़ रुपये पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि आज हमें अपने पैरों पर खड़ा होना है और इसके लिए कड़े फैसले लिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। प्रदेश सरकार संसाधनों की लूट की इजाजत नहीं देगी जबकि पूर्व सरकार ने राज्य के हितों से समझौता किया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल और कड़छम-वांगतू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े कानूनी मामलों में जीत हासिल की है। प्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों से बीबीएमबी का बकाया वसूलने और चंबा जिले में बैरा सियूल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और मंडी जिले में शानन परियोजना को पंजाब सरकार से वापस लेने के लिए मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पूरे उत्तर भारत को शुद्ध वायु, पानी, बिजली और पारिस्थितिकीय संतुलन देता है। राज्य के पास लाखों करोड़ो रुपये की वन संपदा हैन्होंने कहा कि अगर हम चाहते तो अपना सारा कर्ज चुकाने के लिए एक वर्ष में अपने जंगल बेच सकते थे, लेकिन हम ऐसा गैर-जिम्मेदाराना कदम कभी नहीं उठाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के संसाधनों की रक्षा करने और उसे समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के फेफड़ों की तरह काम करता है। अगर पंजाब और हरियाणा को देश का अन्न भंडार कहा जाता है तो यह हिमाचल की नदियों की वजह से है क्योंकि ये इन राज्यों की जमीन की सिंचाई में अहम भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए अपने दस वादों में से सात पूरे कर दिए हैं। पात्र महिलाओं को हर माह 1,500 रुपये चरणबद्ध तरीके से दिए जा रहे हैं और यह गारंटी अगले दो वर्षों के भीतर पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होगी जब युवाओं को उनके गांवों के पास सम्मानजनक स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक किसान का बेटा हूं और मैंने किसानों, बागवानों और पशुपालकों के संघर्षों को बेहद करीब से देखा और अनुभव किया है। इसलिए हमारी सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि पैसा सीधे किसानों के हाथों में पहुंचे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने न्यूजीलैंड से सेब पर आयात शुल्क का मुद्दा भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। प्रदेश सरकार हर मंच पर सेब बागवानों के मामलों को मजबूती से उठाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों को लेकर किसानों और बागवानों में व्यापक रोष है। देश में उपलब्ध कीटनाशकों, उर्वरकों और स्प्रे की गुणवत्ता घटिया है। यह सब बेहद ऊंची कीमतों पर बेचा जा रहा है। परिणामस्वरूप बगीचों में असमय पत्ते झड़ रहे हैं, और पौधे कई गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में मनरेगा योजना को खत्म करके एक और बड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार ने मनरेगा की मूल भावना को ही खत्म कर दिया है। यह मांग पर आधारित कानून था जिसके तहत कोई भी बेरोजगार, मजदूर रोजगार के लिए पंचायत में आवेदन कर सकता था। नए कानून के तहत इस प्रावधान को अब हटा दिया गया है। इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश सरकार ने मनरेगा मजदूरी को 247 रुपये से बढ़ाकर 320 रुपये कर ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। इसके अतिरिक्त कृषि के पीक सीजन और आपदा के समय मनरेगा के कार्य रोक दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मांग आधारित कार्यों का खर्च अब राज्य सरकार पर डाला जा रहा है। इससे धरातल पर रोजगार के अवसर कम होंगे और गरीबों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने पक्का घर होने की शर्त को हटाकर बीपीएल चयन के मानदंडों में ढील दी है। इसके अतिरिक्त, पहली बार सरकार उन 27,717 परिवारों को पक्के घर देने जा रही है जो पिछले 20 सालों से आईआरडीपी का हिस्सा रहे हैं। यह परिवार कई वर्षों से कच्चे घरों में रहने को मजबूर थे।
उन्होंने कहा कि गंभीर वित्तीय संकट से जूझते हुए राज्य ने 2023 और 2025 में दो विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया। राज्य सरकार ने नुकसान के मुआवजे का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष बार-बार उठाया लेकिन पर्याप्त सहायता प्रदान नहीं की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा। जनता की आवाज बनने के बजाय विपक्ष ने धनबल के माध्यम से लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश रची।
उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद, सरकार आपदा प्रभावित लोगों के साथ सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ दिन रात खड़ी रही और उनके दुःख-दर्द को साझा किया। प्रदेश सरकार ने आपदा प्रभावितों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करते हुए मुआवजे की राशि में कई गुणा बढ़ोतरी की है जो देश में सबसे अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के घर आपदा में पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, उन्हें नए घर के निर्माण के लिए 8 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, साथ ही अन्य नुकसानों के लिए बढ़ी हुई वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन शिकायतों का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। काफी समय से लंबित राजस्व मामलों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से विशेष राजस्व अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। अब तक रिकॉर्ड लगभग 5,10,257 राजस्व मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में सुधारों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। राज्य सरकार ने 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनरी और उपकरणों को बदलने के लिए 3,000 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। राज्य में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई है जिसका उद्देश्य लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और समसामयिक जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और शिक्षण प्रणालियों में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश ने हाल ही में देश में छात्रों को गुणवत्ता शिक्षा देने में 5वां स्थान हासिल किया है जबकि 2021 में यह 21वें पायदान पर था। इसके अतिरिक्त, प्रदेश ने छात्रों के पढ़ने और सीखने के स्तर के मामले में पहला स्थान हासिल किया है।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा बनाई गई वेब सीरीज ‘द व्हाइट ट्रुथ’ भी रिलीज की। इस वेब सीरीज का उद्देश्य युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना है। विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने परेड में शामिल प्रतिभागियों और सांस्कृतिक दलों को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक संजय रतन, आशीष बुटेल, कमलेश ठाकुर, राकेश कालिया, रंजीत सिंह, मलेंद्र राजन, महाधिवक्ता अनूप रतन, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, हिमाचल पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर, हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, एपीएमएसी कांगड़ा के अध्यक्ष निशु मोंगरा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप पठानिया, सुरेंद्र काकू, सुरेंद्र मनकोटिया, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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