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इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की आत्मा को कुचला और घायल किया: गजेंद्र सिंह शेखावत

Indira Gandhi crushed and wounded the soul of democracy by imposing the Emergency: Gajendra Singh Shekhawat - Rohtak News in Hindi

रोहतक। आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर गुरुवार को रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में भाजपा ने ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में कार्यक्रम आयोजित कर आपातकाल को लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता और राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़ समेत कई नेताओं ने 100 से अधिक लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया। सभी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आपातकाल को लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बताया तथा नई पीढ़ी को उस दौर से सबक लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम स्थल पर आपातकाल से जुड़ी प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जनता मालिक है, सत्ता उसकी सेवा का माध्यम है, यह भाव ही मोदी सरकार की कार्यसंस्कृति का मूल है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए लोकतंत्र राष्ट्र जीवन की आत्मा है। संविधान हत्या दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना होगा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि 25 जून केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र पर हुए सबसे बड़े प्रहार की स्मृति का दिन है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, संघर्ष और त्याग से प्राप्त लोकतंत्र को 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर कुचलने का प्रयास किया था।
शेखावत ने कहा कि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, यातनाएं सही और काल कोठरियों में जीवन बिताया। ऐसे बलिदानों से प्राप्त लोकतंत्र की आत्मा को इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान घायल किया और कुचला गया। उस समय मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई और विपक्षी नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने कहा कि संविधान हत्या दिवस मनाने का उद्देश्य किसी के प्रति कटुता रखना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न होने देने का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र भारत की आत्मा और उसके डीएनए में है। भारत में लोकतांत्रिक परंपराएं प्राचीन काल से रही हैं और वैशाली जैसे गणराज्य इसका प्रमाण हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 12 जून 1975 को न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद देश में आपातकाल लागू किया गया। मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई और मीसा कानून के तहत अनेक नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए देशभर में जनजागरण का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल राजनीतिक संकट नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों की पीड़ा की कहानी भी था। जबरन नसबंदी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और आम नागरिकों पर अत्याचार उस दौर की कड़वी सच्चाइयां थी। उन्होंने कहा कि रोहतक और हरियाणा भी उस कालखंड के महत्वपूर्ण साक्षी रहे हैं।
शेखावत ने कहा कि इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र को दबाने के हर प्रयास का अंत हुआ है। वर्ष 1977 के चुनाव में देश की जनता ने अपने मताधिकार के माध्यम से अहंकारी शासन को सत्ता से बाहर कर लोकतंत्र की ताकत का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि संविधान हत्या दिवस हमें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संविधान की मर्यादा बनाए रखने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान लोगों का लोकतंत्र पर विश्वास डगमगाने लगा था। उस समय भ्रष्टाचार चरम पर था और देश कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जनता ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए को अवसर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आज एनडीए सरकार उस विश्वास पर खरा उतरते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
शेखावत ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में जनता का लोकतंत्र और सरकार पर विश्वास मजबूत हुआ है। देश आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामरिक रूप से भी सशक्त बन रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, अपनी जड़ों से जुड़ा और जागरूक लोकतांत्रिक समाज भी इसकी आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि ऐसी पीढ़ी तैयार करने की आवश्यकता है, जिसमें सभ्यतागत चेतना हो, जो भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर गर्व करे तथा राष्ट्रविरोधी और आसुरी शक्तियों का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहे। नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध होना चाहिए। संविधान पर गर्व करते हुए कर्तव्यनिष्ठ समाज का निर्माण ही विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को सामरिक रूप से आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से संपन्न और तकनीकी क्षेत्र में विश्व का पुरोधा राष्ट्र बनाना है। साथ ही देश को दुनिया का सबसे जागरूक लोकतंत्र बनाने का संकल्प भी लेना होगा।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम विकसित भारत के इस संकल्प का बीजारोपण है। आपातकाल को याद करते हुए शेखावत ने कहा कि वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का अंधकारमय अध्याय था, जिससे सीख लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

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Web Title-Indira Gandhi crushed and wounded the soul of democracy by imposing the Emergency: Gajendra Singh Shekhawat
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