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हरियाणा में एनईएसएल प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ी स्टाम्प राजस्व प्रणाली व्यापार में बनी बाधा: अशोक बुवानीवाला

Stamp revenue system not linked to NeSL platform in Haryana is hindering trade: Ashok Bhuwaniawala - Gurugram News in Hindi

खास खबर। गुरुग्राम हरियाणा कांग्रेस उद्योग सैल के अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने राज्य सरकार ने कहा कि देश में ऋण समझौतों और अन्य अनुबंधों को पूरी तरह कागजरहित बनाने वाली राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड (एनईएसएल) की डिजिटल दस्तावेज निष्पादन (डीडीई) सेवा हरियाणा में अभी शुरू नहीं हो पाई है। अभी तक अपनी डिजिटल राजस्व और स्टाम्प शुल्क प्रणालियों जैसे जीआरएएस को एनईएसएल के सेंट्रलाइज्ड डीडीई प्लेटफॉर्म के साथ पूरी तरह एकीकृत नहीं किया है।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि इस वजह से हरियाणा से जारी होने वाले पूरी तरह से डिजिटल, ई-स्टाम्प और ई-हस्ताक्षर वाले ऋण समझौतों को बैंक और एनबीएफसी कानूनी रूप से एनईएसएल पोर्टल पर निष्पादित नहीं कर पा रहे हैं। एनईएसएल भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सूचना उपयोगिता है। इसका डीडीई प्लेटफॉर्म बैंकों को कर्ज समझौते, गारंटी, गिरवी पत्र आदि दस्तावेजों को बिना कागज के तैयार, स्टाम्प और निष्पादित करने की सुविधा देता है। इस प्रक्रिया में संबंधित राज्य के कोषागार या ई-स्टैम्पिंग पार्टनर जैसे एसएचसीआईएल के माध्यम से स्टाम्प शुल्क का डिजिटल भुगतान किया जाता है। इसके बाद दस्तावेज पर ई-स्टाम्प लगता है और पक्षकार ई-हस्ताक्षर कर देते हैं। पूरा रिकॉर्ड एनईएसएल के सुरक्षित रिपॉजिटरी में दर्ज हो जाता है, जिसे अदालत में साक्ष्य के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
बुवानीवाला ने कहा कि वर्तमान में 25 से अधिक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी राजस्व और स्टाम्प प्रणालियों को एनईएसएल से एकीकृत कर चुके हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित कई बड़े राज्यों में बैंक पहले से ही कागजरहित ऋण समझौते कर रहे हैं। इससे समय, लागत और धोखाधड़ी का खतरा काफी कम हुआ है। हरियाणा में यह एकीकरण अभी लंबित है। राज्य की जीआरएएस और ई-स्टैम्पिंग प्रणाली को एनईएसएल के प्लेटफॉर्म से तकनीकी रूप से नहीं जोड़ा गया है। नतीजतन हरियाणा में कंपनियों और व्यक्तियों को आज भी फिजिकल स्टाम्प पेपर, फिजिकल सिग्नेचर और कागजी फाइलिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
अशोक बुवानीवाला ने बताया कि बैंकिंग विशेषज्ञों का इस मामले में तर्क है कि यह एकीकरण न होने से प्रोसेसिंग में देरी, लागत बढऩा और त्रुटियों की संभावना बनी हुई है। खासकर एमएसएमई और कॉर्पोरेट लोन में जहां कई दस्तावेज होते हैं, वहां डीडीई से 70 प्रतिशत तक समय बचता है। राज्य सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह जीआरएएस और ई-स्टैम्पिंग को जल्द एनईएसएल से जोड़े, ताकि हरियाणा भी देश के अन्य अग्रणी राज्यों की तरह डिजिटल लेन-देन व्यवस्था का हिस्सा बन सके।

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