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जीएसटी होवा नहीं, प्रशिक्षण और सलाह से कुछ दिनों में टैक्स भरना हो जाएगा आसान : डा. मोनिका गोयल

GST No No, training and advice will be easy to fill in a few days: Dr. Monika Goyal - Gurugram News in Hindi

मुकेश बघेल,गुडग़ांवजीएसटी भारत के कराधान ढांचे को एक नया आयाम देगा जो आने वाली दुनिया में भारत को एक महत्वपूर्ण स्थान दिला सकता है। जीएसटी कोई होवा नहीं है, थोड प्रशिक्षण और कानूनी सलाह से हर कोई इसे समझ सकता है और वह कुछ दिन बाद ही पूर्व की तरह टैक्स अदा करने का काम करेगा। यह जानकारी आज सीएस डा. मोनिका गोयल ने कारपोरेट कंसलटेंट राजेश सूटा द्वारा जीएसटी को समझने और इसे लागू करने के लिए आयोजित एक सेमीनार में दी है। वकालत के 50 साल पूरे करने के अवसर पर आयोजित इस सेमीनार के आयोजक जाने माने कारपोरेट टैक्स कंसलटेंट राजेश कुमार सूटा के आह्वान पर शायद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जीएसटी पर यह सबसे बड़ा अधिक संख्या वाला सेमीनार था।

जीएसटी पर भारत सरकार से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कई बडी हस्तियों में एक डा. मोनिका गोयल ने कहा कि इसे समझना मुश्किल नहीं है। हमने इसे समझा है और पाया है कि देश के फेडरेल स्ट्रेक्चर पर यह एक मजबूत आधार तैयार करेगा। हमारे देश में विभिन्न राज्य है और उनमें अलग-अलग टैक्स लागू थे जो राजस्व इकठ्ठा करते थे। पहले के टैक्स और ओरिजनल बेस पर थे। लेकिन अब यह डेस्टीनेशन पर आधारित है। माल जहां उत्पादन होता है इसकी बजाए जहां माल जाएगा या कंज्यूम होगा वहां जीएसटी में टैक्स की अदायगी या उसकी वसूली होगी। उन्होंने सरल तरीके से समझाया कि देखने का तरीका बदल गया है। लेकिन टैक्स वसूलने या अदायगी की बात वहीं की वहीं है।

कुछ सवाल है और कुछ पेचिदगियां दिखाई देती है। उनका समय-समय पर समाधान होगा। उनके उत्तर आज भी मौजूद है। लेकिन जैसे-जैसे हम जीएसटी पर काम करेंगे समझ जाएंगे। पहले वैट था और भी टैक्स थे। लेकिन आज केवल एक भारत और एक टैक्स है जिसका नाम जीएसटी है। उन्होंने सूटा को इस बात के लिए बधाई दी कि उन्होंने इतना बड़ा आयोजन कर व्यापार जगत के सभी क्षेत्रों को यहां बुलाकर जीएसटी को लागू करने में मददगार बनने वाले जीएसटी सेमीनार का आयोजन किया है। 50 साल की उम्र में जहां आज यह माना जाता है कि अब व्यक्ति का समय कम हो रहा है सूटा ने वकालत के पचास साल पूरे होने के बाद इस जीएसटी की पूरी तैयारी की है।

एक आधुनिक सीए और उसको समझने और लागू करने वालों की टीम गठित की है। वे बधाई के पात्र है। जीएसटी को कैसे लागू करें। इसका ट्रांसमिशन कैसे होगा। माईग्रेशन कैसे होगा। स्टाफ ट्रेनिंग कैसे होगी। इसे कैसे चलाना है। इस बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी नियमिनहींत इंटरनेट और कम्प्यूटर के प्रयोग से न रूकने वाला कार्य है। जो आधुनिक व्यवसायिक गतिविधियों का संचालन करेगा। पूरे देश के व्यापार को जोडेगा। एक ही कम्पनी के यदि देश में अलग-अलग कार्यालय है और वहां से माल को रवाना किया जाएगा अलग-अलग जीएसटी नम्बर लेने होंगे।

जीएसटी से व्यापारी की रेटिंग भी होगी। जो उसका आने वाला व्यवसाय के भविष्य का निर्धारण करेगी। देश की बडी-बडी कम्पनियां काफी दिनों से जीएसटी की तैयारियां कर रही थी। व्यापार नहीं बदलेगा। कुछ व्यवसाय की व्यवस्थाएं बदल जाएगी जो समझने के बाद समझ में आ जाएगी। उन्होंने बताया कि जीएसटी को मेन्यूवल तरीके से नहीं टैक्नीकल तरीके से ही लागू किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक और पंजीकृत और ओरिजनल सॉफ्टवेयर ही लेने होंगे। पिछले दिनों पूरी दुनिया में वायरस आ जाने से काफी सॉफ्टवेयर उड जाने की बात सामने आई थी। ये सॉफ्टवेयर ओरिजनल और पंजीकृत होते तो नहीं उडते।

उन्होंने व्यापारियों को समझाया कि शुरू के छह माह चौकसी से काम करने की जरूरत है। उसके बाद तो आप खुद ही मोबाईल से रिटर्न भर सकेंगे। जीएसटी में एक करोड से ज्यादा के व्यवसाय को ओडिट किया जाएगा। भारत सरकार और अन्य एजेंसियां पूरे देश में जीएसटी पर व्यापारियों को जागरूक करने का काम कर रही है। उन्होंने कई व्यापारियों के सवालों के भी उत्तर दिये। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड आयुक्त योगेंद्र गर्ग ने भी जीएसटी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसे लागू करने से पहले माननीय सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न एक्सपर्ट द्वारा इस पर विस्तार से गहन विचार विमर्श किया गया है। इसे लागू करते हुए भी भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियां मंथन कर रही है। आधुनिक भारत के लिए सरकार का यह सराहनीय प्रयास है।

सेमीनार का आयोजक राजेश कुमार सूटा ने आये हुए सभी महानुभावों का स्वागत करते हुए कहा कि 50 साल पहले उन्होंने जब पै्रक्टिस शुरू की थी। आज की तरह तब भी व्यापारियों को करो के दायरे में लाने के लिए व्यक्तिगत सम्पर्क ही महत्वपूर्ण था। आज जीएसटी को लागू करने के लिए भी यही अभियान शुरू किया है। उन्होंने छोटा व्यापारी हो या बड़ा वकालत करने में कोई कसर नहीं छोडी। उनके लिए सभी क्लाईंट का महत्व बराबर था। जीएसटी अवश्य ही व्यापारियों की समझ में आ जाएगा और हम लोग भी उन्हें समझाने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए एक एक्सपर्ट टीम डा. मोनिका गोयल के नेतृत्व में गठित की गई है जो 24 घंटे सम्पर्क में रहेगी।

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