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बैंकिंग क्षेत्र के बदलते परिदृश्य पर नई राज्य नीति की घोषणा

Haryana: Announcement of new state policy on changing scenario of banking sector - Chandigarh News in Hindi

चंडीगढ़। हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बैंकिंग क्षेत्र के बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बैंकों के साथ अन्तराफलक पर नई राज्य नीति की घोषणा की है।

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि संशोधित नीति विभिन्न सरकारी संगठनों द्वारा बैंकों से लेन-देने के लिए तैयार की गई है, ताकि योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके, लागत को कम किया जा सके और वित्तीय संस्था के साथ लेन-देन करने में एकरूपता और पारदर्शिता लाई जा सके।

उन्होंने कहा कि तीन महीने तक की अल्पावधि के लिए 10 करोड़ रुपये तक की जमा राशि रखने और उधार लेने के लिए तैयार दिशा-निर्देशों के मुताबिक, संगठन अपने संबंधित पैनल वाले बैंकों से मेल के माध्यम से कोटेशन आमंत्रित कर सकते हैं। कोटेशन मेल जारी करने के 24 घंटों के भीतर दिए जाने चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोटेशन किसी भी छुट्टी के पहले दिन आमंत्रित न किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्राप्त कोटेशन की छंटनी की जानी चाहिए और जमा राशि रखने के लिए अधिकतम ब्याज दर देने वाले तथा उधार/ऋण के लिए न्यूनतम ब्याज दर वाले बैंक का चयन किया जाना चाहिए। बैंक से कोटेशन प्राप्त होने के दो दिन के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिया जाएगा। जमा राशि और उधार का ब्यौरा एक हार्ड कॉपी के साथ तत्काल मेल के माध्यम से ifcc@hry.nic.in पर भेजा जाएगा।

एक माह की अवधि के दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा रखी गई कुल जमा राशि और उधार को, वित्त विभाग द्वारा सरकार की जानकारी के लिए बैंक के नाम तथा जमा/उधार ली गई राशि का उल्लेख करते हुए, अगले महीने के तीसरे दिन तक संस्थागत वित्त और ऋण नियंत्रण विभाग (आईएफसीसी) में समेकित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन 3 माह से अधिक की अवधि के लिए कोई राशि या तीन माह या इससे कम की अवधि के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा करना चाहता है तो उसे कम से कम 10 कार्य दिवस पहले संस्थागत वित्त और ऋण नियंत्रण विभाग को प्रस्ताव भेजना होगा ताकि तीन माह या इससे अधिक की अल्पावधि के लिए 10 करोड़ रुपये तक की जमा राशि या उधार के मामले में चयनित बैंकों में जमा राशि रखने के लिए सभी संगठनों के लिए एक समेकित प्रस्ताव तैयार किया जा सके, जिससे कि उसी दिन अधिकतम रिटर्न प्राप्त किया जा सके। ऐसा प्रस्ताव प्रत्येक माह की पहली या 15 तारीख को भेजा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चूंकि आमतौर पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों से राज्य सरकार की गारंटी पर उधार लिया जाता है, उधार लेने के लिए भी उसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा जैसाकि जमा राशि के मामले में किया जाता है और उधार की आवश्यकता वाले संगठनों को कम से कम 15 दिन पहले आईएफसीसी को अपना प्रस्ताव भेजना होगा ताकि विभिन्न स्रोतों से सस्ता ऋण लिया जा सके और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाया जा सके। उधार/ऋण के लिए न्यूनतम दर की पेशकश करने वाले बैंक की अनुशंसा की जाएगी। आईएफसीसी के अनुमोदन के बिना कोई भी संगठन किसी भी योजना के लिए कोई बैंक खाता नहीं खोल सकेगा।

उन्होंने कहा कि सभी मौजूदा बैंक खातों को एक या दो प्रमुख खातों में समेकित करने की आवश्यकता होगी, जिसके लिए आईएफसीसी की मंजूरी ली जाएगी। कोई भी सरकारी विभाग उस उद्देश्य, जिसके लिए उसने पैसा निकाला है, के लिए वास्तविक खर्च किए बिना, बैंक खाते में रखने के लिए पैसे नहीं निकाल सकता।

उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन पैसे निकालता है और वह धन राशि विशेष रूप से अनुमति के बिना बेकार पड़ी रहती है, तो कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी कारण से, निकाली गई राशि अप्रयुक्त रहती है उस संगठन को यह राशि बैंक के लिए प्रचलित एमसीएलआर दर पर उस अवधि के ब्याज के साथ जमा करवानी होगी, जिसके लिए यह जमा की गई और व्यर्थ पड़ी रही। यदि संगठनों को राज्य बजट से सरकारी विभागों के अलावा धनराशि हस्तांतरित की जाती है तो उस धनराशि का तत्काल उपयोग किया जाना चाहिए। जब तक विशेष रूप से अनुमति न हो, अप्रयुक्त धनराशि को वसूली योग्य ब्याज के साथ वापिस जमा करवाना होगा।

यदि कोई भी सरकारी विभाग/संगठन निर्धारित अवधि के भीतर राशि जमा करने में विफल रहता है और बाद में इसे किसी भी बैंक खाते में बेकार रखी जाती है, तो उस पर दो प्रतिशत की दर से जुर्माना लिया जाएगा, जिसके लिए उन विभागों और संगठनों को भविष्य में जारी की जानी वाली राशि में से निष्क्रिय राशि की कटौती की जाएगी। कोई भी संगठन बिना किसी विशेष स्वीकृति के धनराशि निकालकर किसी बैंक खाते में निष्क्रिया नहीं रखेगा।

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Web Title-Haryana: Announcement of new state policy on changing scenario of banking sector
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