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एमएमआर-आईएमआर में कमी लाने के लिए दो जिलों में प्रसूति उच्च डिपेंडेसी इकाई की स्थापना

Establishment of Obstetrician High Dependency Unit in two districts to reduce MMR-IMR - Chandigarh News in Hindi

चंडीगढ़ । हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग राज्य में मातृ मृत्यु दर यानी एमएमआर को कम करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यद्यपि राष्ट्रीय मातृ मृत्यु दर (एन.एम.एम.आर.) औसत 167 के मुकाबले हरियाणा का एम.एम.आर. 127 (नवीनतम एस.आर.एस. डेटा 2013 के अनुसार) है, मातृ मृत्यु दर (एम.एम.आर.) में गिरावट की गति में तेजी लाने और एम.एम.आर. को 2030 तक 70 से कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य प्रतिबद्ध है। इसके लिए, स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिविल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं, उपकरणों, मानव संसाधन आदि मुहैया करवाने का प्रयास निरंतर जारी है ताकि सिविल अस्पतालों के स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार कर इसे मजबूती प्रदान की जा सके और मातृ रोग और मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमित झा के नेतृत्व में एम.एम.आर. और आई.एम.आर. में कमी लाने के व्यापक उद्देश्य के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया जिसके तहत राज्य के दो जिलों में प्रसूति उच्च डिपेंडेसी इकाई (एचडीयू) की स्थापना की गयी।
एन.एच.एम. हरियाणा की मिशन निदेशक अमनीत पी. कुमार ने बताया कि ओबस्टेट्रिक एचडीयू के सिविल अस्पताल स्तर पर स्थापित होने से राज्य की गर्भवती महिलाओं को विशेषकर उच्च जोखिमपूर्ण गभर्वती महिलाओं के उचित समय पर स्वास्थ्य प्रबन्धन करने में अहम भूमिका निभायेगा।
वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान जिला फरीदाबाद और नारनौल के सिविल अस्पतालों का चुनाव ओब्स्टेट्रिक एचडीयू स्थापित करने हेतु किया गया है।
उच्च डिपेंडेंसी इकाई (एचडीयू) अस्पताल का एक मध्यवर्ती देखभाल इकाई क्षेत्र होता है जहां मरीजों की सामान्य वार्ड की तुलना में व्यापक रूप से देखभाल की जा सकती है, लेकिन गहनतापूर्वक देखभाल नहीं की जा सकती। गर्भावस्था के दौरान होने वाली कुल जटिलताओं में से, उच्च जोखिम गर्भावस्था लगभग 7 से 8 प्रतिशत है और ऐसी गंभीर बीमारी के मामलों में देखभाल के लिए सिविल अस्पताल में ओब्स्टेट्रिक एचडीयू की स्थापना एक आवश्यकता है।
यद्यपि, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को उनके अधिमान्य, पर्याप्त और समय पर प्रबंधन और उच्च स्वास्थ्य सुविधा के रेफरल सुनिश्चित करने हेतु उच्च जोखिम गर्भावस्था नीति (एच.आर.पी.) की पहल राज्य में पहले से ही की जा चुकी है, फि र भी सिविल अस्पताल में विशेष देखभाल की कमी इन उच्च जोखिम वाले मामलों में तृतीयक स्वास्थ्य सुविधा के आगामी प्रबंधन के लिए एक समझौते की स्थिति पैदा करती है।
वर्तमान में, भारत सरकार के विभिन्न राज्यों में सिविल अस्पतालों में माध्यमिक देखभाल सेवा स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं में उच्च जोखिम वाले गर्भधारण और प्रसवोत्तर मातृ प्रबंधन के लिए ओब्स्टेट्रिक एचडीयू नहीं है।
उल्लेखनीय है कि फरीदाबाद जिले में लगभग 14 लाख शहरी आबादी है। सिविल अस्पताल फरीदाबाद में ओब्स्टेट्रिक एचडीयू की स्थापना से सिविल अस्पताल फरीदाबाद और निकटतम जिलों जैसे पलवल, मेवात और गुरुग्राम आदि के उच्च जोखिम के मामलों का समय पर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। इससे उन जटिल मामलों के रेफरल से भी बचाव होगा जो वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्थित तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को भेजे जाते हैं।
इसके अलावा, जिला नारनौल आर्थिक और भौगोलिक दृष्टि से राज्य का एक कठिन जिला हैं, जहां स्वास्थ्य देखभाल सुविधा दूरी पर स्थित मेडिकल कालेजों (पीजीआईएमएस रोहतक लगभग 170 किलोमीटर, अग्रोहा मेडिकल कालेज, हिसार-लगभग 250 किमी और एनआईएमएस, जयपुर लगभग 150 किलोमीटर) में उपलब्ध हैं। ओब्स्टेट्रिक एचडीयू की स्थापना से न केवल सिविल अस्पताल में ओब्स्टेट्रिक एचडीयू के जटिल मामलों के समय पर प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि गंभीर परिस्थितियों में दूरस्थ तृतीयक स्वास्थ्य सुविधा के रोगियों का बाहर रेफरल करने से भी बचाव होगा।
ये दोनों प्रसूति एचडीयू सभी आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन से सुसज्जित होंगे और राज्य के शेष जिलों में प्रसूति एचडीयू स्थापित करने के लिए यह एक प्रतिकृति स्वरूप होगा।

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Web Title-Establishment of Obstetrician High Dependency Unit in two districts to reduce MMR-IMR
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