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हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग विधेयक 2018 सहित कई बिल पारित

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में मानसून सत्र के अंतिम दिन हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग विधेयक 2018 पारित किया गया। हरियाणा राज्य में अनुसूचित जाति आयोग के गठन के लिए तथा उनसे संबंधित या उनसे आनुशंगिक मामलों के लिए उपबंध करने के लिए यह विधेयक पारित किया गया।

हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग विधेयक 2018 में आयोग सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट किए जाने वाले सदस्यों से गठित होगा अर्थात अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष जो सामाजिक जीवन में अनुभव रखने वाला किन्हीं अनुसूचित जातियों से संबंधित प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा और जिसने सरकारी गतिविधियों में काम किया हो, सहयोग दिया हो या अनुसूचित जातियों से संबंधित सरकार का कोई सेवानिवृत्त अधिकारी हो। उपाध्यक्ष सदस्यों में से पदाभिहित किया जाएगा। सदस्य सचिव, जो सरकार का अधिकारी है या रहा है, जो विशेष सचिव पद से नीचे का न हो। योग्यता, न्याय निष्ठा और प्रतिष्ठित व्यक्तियों, जिन्होंने अनुसूचित जातियों के कल्याण और उत्थान के लिए कार्य किया है तथा सेवा की है, में से अनुसूचित जातियों से संबंधित चार से अनधिक सदस्य और उनमें से कम से कम एक महिला होगी।
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्य अपना पद ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे, परंतु जहां अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या सदस्य तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति से पूर्व 65 वर्ष की आयु का हो जाता है तो वह उस दिन अपना पद रिक्त कर देगा। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्य किसी भी समय लिखित में सरकार को सम्बोधित करते हुए अपने पद से त्याग पत्र दे सकता है और सरकार किसी भी सदस्य को हटा सकती है, यदि वह अनुन्मोचित दीवालिया हो जाता है या ऐसे अपराध, जो सरकार की राय में नैतिक अधमता वाला हो, के लिए सिद्धदोष तथा काराबास से दण्डित हो जाता है या विकृत चित हो जाता है तथा सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया जाता है या कार्य करने से इन्कार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है या आयोग से अनुपस्थित रहने की छुट्टी प्राप्त किए बिना आयोग की तीन लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहता है या सरकार की राय में उसने सदस्य के पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि ऐसे व्यक्ति का पद बना रहना अनुसूचित जातियों के हितों या लोक हित के लिए हानिकारक है।
आयोग के पास विचार करने के लिए सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी अर्थात भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना तथा हाजिर करवाना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना और इसी दस्तावेज को प्रकट तथा प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना और शपथ पत्रों का साक्ष्य ग्रहण करना और किसी न्यायालय अथवा कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की मांग करना और साक्षियों तथा दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना और कोई अन्य मामला जो विहित किया गया है या किया जा सकता है।

पंजाब भूमि सुधार स्कीम (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2018
पंजाब भू-सुधार स्कीम अधिनियम 1963 हरियाणा राज्यार्थ को आगे संशोधित करने के लिए पंजाब भूमि सुधार स्कीम (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2018 पारित किया गया है।
पंजाब भू-सुधार स्कीम अधिनियम 1963 बाढ़ या अनावृष्टि द्वारा, जल निकास से या ऐसे प्रयोजनों से आनुशंगिक या उससे संबंधित अन्य कार्यों के विरुद्ध भूमि संरक्षण अभिक्रम, भूमि कटाव को कम करने, भूमि के संरक्षण से संबंधित भूमि सुधार स्कीमों के निबोध निष्पादन के लिए अधिनियमित किया गया था। हरियाणा सरकार ने इस अधिनियम को 1968 में अपनाया था। राज्य में 54 प्रतिशत भूमिगत जल प्रकृति/गुणवत्ता में खारा है तथा कृषि फसलों की सिंचाई के लिए उचित नहीं है, कृषि सिंचाई क्षमता को कृषि खेतों में भूमिगत पाइपलाइन के अधार पर सिंचाई जल की आपूर्ति के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। भूमिगत पाइपलाइन बिछाने की बहुत अधिक मांग है जो कि साधारणत: बहुत से किसानों के कृषि खेतों में से गुजरती है। लगभग 15,000 किसानों ने भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली पर अनुदान सहायता प्राप्त करने के लिए कृषि तथा किसान कल्याण विभाग को आवेदन प्रस्तुत किए हैं। कुछ किसानों के विरोध के कारण भूमिगत पाइपलाइन को वास्तव में बिछाने में कठिनाई होती है। पूर्वोक्त अधिनियम में संशोधन/समावेश दूसरे किसानों के खेतों के माध्यम से गुजरने वाली भूमिगत पाइपलाइन को बिछाने के लिए किसानों को मदद करेगा। इसलिए पंजाब भू-सुधार स्कीम अधिनियम 1963- (हरियाणा विधि अनुकूलन (राज्य तथा समवर्ती विषय) आदेश, 1968 द्वारा संशोधित) अधिनियम में संशोधन किए जाने की आवश्यकता है।

कारखाना (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2018
कारखाना (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2018 कारखाना अधिनियम 1948 हरियाणा राज्यार्थ को आगे संशोधित करने के लिए पारित किया गया है।

कारखाना अधिनियम, 1948 में अधिनियमित किया गया था, इसके मुख्य उद्देश्य कारखानों में नियोजित कर्मकारों को पर्याप्त सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कल्याण को सुनिश्चित करना है।
हरियाणा के वर्तमान दृश्यलेख में, लघु उद्योगों में विद्युत की सहायता से विनिर्माण प्रक्रिया में लगाए गए कर्मकारों की संख्या 20 से कम तथा विद्युत की सहायता के बिना कर्मकारों की संख्या 40 से कम का नियोजन कारखाना अधिनियम, 1948 के उपबंधों को पूरा करने तथा अनुपालन करने में असुविधाजनक है। ये लघु उद्योग विभिन्न प्रतिबंधों जैसे कि श्रम कानूनों वित्त निपुण मानव शक्ति प्रौद्योगिकी इत्यादि के कारण दक्ष रूप से कार्य करने के योग्य नहीं हैं। इन लघु उद्योगों को भारमुक्त करने के उद्देश्य से कर्मकारों की कम संख्या रखने वाले कारखानों को कारखाना अधिनियम, 1948 के पूर्वदर्शन से छूट दी जा सकती है। यह प्रस्तावित किया जाता है कि विद्युत की सहायता से 20 कर्मकारों की संख्या तथा विद्युत की सहायता के बिना 40 कर्मकारों की संख्या रखने वाले कारखाने को कारखाना अधिनियम, 1948 की परिभाषा से छूट प्रदान की जाए।
हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2018


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Web Title-chandigarh news : Haryana State Scheduled Castes Commission Bill 2018 passed with several bill
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