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अरहर दाल की खरीद से गोवा के खजाने को 1.91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ : कैग रिपोर्ट

Goa exchequer lost Rs 1.91 crore on purchase of Arhar dal: CAG report - Panaji News in Hindi

पणजी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने उपभोक्ता मांग और उचित मूल्य की दुकानों की उठाने की क्षमता का आकलन किए बिना बड़ी मात्रा में अरहर दाल की खरीद के कारण 1.91 करोड़ रुपये के नुकसान पर गोवा सरकार की खिंचाई की है। अरहर दाल की बर्बादी का मामला अगस्त 2022 में तब सामने आया था जब सरकार ने विज्ञापन जारी कर बोली लगाने वालों से इसके निपटान की मांग की थी। गुरुवार को समाप्त हुए मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश की गई कैग-2021 रिपोर्ट में कहा गया है, ''कोविड-19 महामारी के दौरान नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग (डीसीएस एंड सीए) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चार महीने (अप्रैल से जुलाई 2020) के लिए एक किलो अरहर दाल की आपूर्ति के माध्यम से 2.04 लाख गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) और अन्नपूर्णा (एएनपी) राशन कार्ड धारकों को राहत देने का निर्णय लिया।''
गोवा राज्य बागवानी निगम लिमिटेड (जीएसएचसीएल) के माध्यम से 100 मीट्रिक टन अरहर दाल की बिक्री की योजना बनाई गई थी, जबकि शेष अरहर दाल उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) के माध्यम से बेची जानी थी।
तदनुसार, नागरिक आपूर्ति विभाग ने 800 मीट्रिक टन अरहर दाल की आपूर्ति के लिए नेशनल एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएएफईडी) को ऑर्डर दिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि डीसीएस एंड सीए सचिव ने 800 मीट्रिक टन की खरीद के लिए 6.80 करोड़ रुपये की कार्योत्तर प्रशासनिक मंजूरी और व्यय मंजूरी दी थी। गोवा सरकार ने अपनी कैबिनेट बैठक 22 अप्रैल 2020 में दो महीने अप्रैल और मई 2020 की अवधि के लिए 408 मीट्रिक टन अरहर दाल, एक किलो प्रति कार्ड वितरित करने का संकल्प लिया था।
एनएएफईडी ने 400 मीट्रिक टन अरहर दाल की आपूर्ति की थी, जिसमें से अप्रैल-मई 2020 के दौरान एफपीएस द्वारा केवल 139.57 मीट्रिक टन (34.23 प्रतिशत) उठाया गया था, जबकि शेष 260.43 मीट्रिक टन में से केवल 16.42 मीट्रिक टन ही एफपीएस द्वारा उठाया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उठान का कारण राशन कार्ड धारकों की ओर से खराब प्रतिक्रिया है।
जीएसएचसीएल ने अरहर दाल उठाने से इनकार कर दिया क्योंकि वे खुले बाजार से 73 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर पॉलिश की गई दाल खरीद रहे थे, जिसे उपभोक्ताओं द्वारा पसंद किया गया था। जबकि, डीसीएस एंड सीए द्वारा 80 रुपये प्रति किलोग्राम की ऊंची कीमत पर आंशिक रूप से पॉलिश की गई अरहर दाल की आपूर्ति की गई थी। इसके बाद, शिक्षा विभाग मिड-डे-मील योजना के तहत वितरण के लिए शेष संपूर्ण 241.21 मीट्रिक टन उठाने पर सहमत हुआ।
हालांकि, नागरिक आपूर्ति सचिव के आदेश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा की गई गुणवत्ता जांच से पता चला कि अरहर दाल की पूरी मात्रा 'अनसेफ फूड' थी। अरहर दाल को पशुओं/मुर्गियों के चारे की सामग्री के रूप में निपटाने के प्रयास सफल नहीं हुए क्योंकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के अनुसार अरहर दाल उसके लिए भी उपयुक्त नहीं थी।
ऑडिट में पाया गया कि खरीद शुरू करने से पहले, विभाग पॉलिश दाल के लिए उपभोक्ता की पसंद सहित मांग का आकलन करने में विफल रहा।
आईएएनएस

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Web Title-Goa exchequer lost Rs 1.91 crore on purchase of Arhar dal: CAG report
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