• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

क्या शिवसेना कुर्सी के लिए कट्टर हिंदुत्ववाद छोड़ देगी?

Will Shiv Sena give up radical Hindutvaism for the chair? - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के बीच 1980 के दशक के अंत से शुरू हुए रोमांस का शिवसेना की हठधर्मिता के चलते करीब-करीब अंत हो गया है। भाजपा ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को रविवार शाम बता दिया कि महागठबंधन के प्रमुख सहयोगी शिवसेना के गठबंधन धर्म निभाने से इनकार करने के कारण वह राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में फिलहाल नहीं है। इसके साथ ही भाजपा नेताओं ने शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के संभावित गठबंधन को शुभकामनाएं दी।

भाजपा के सरकार बनाने से असमर्थता जताने के तुरंत बाद शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे बोले हैं कि महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा तो मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। यानी भाजपा के सरकार बनाने से इनकार करने के बाद शिवसेना के लिए अपना मुख्यमंत्री बनाने का स्वर्णिम मौका है। लेकिन उसके पास केवल 56 विधायक हैं। यानी सरकार बनाने के लिए जरूरी 88 विधायक एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के होंगे।

इसका मतलब शिवसेना को अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपने दो परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन लेना पड़ेगा। ऐसे में यहां अब सवाल यह उठता है कि हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे की शिवसेना उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की अनुवाई में सत्ता के लिए कट्टर हिंदुत्ववाद का रास्ता छोड़ देगी और सेकुलर शब्द को 'छद्म' कहने वाली शिवसेना सेकुलर रास्ता अख्तियार करेगी? अगर शिवसेना सत्ता के लिए कट्टर हिंदुत्ववाद का रास्ता छोड़कर 'सेकुलर शिवसेना' में ट्रांसफॉर्म होगी तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव होगा।

राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू होने के बाद शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने कट्टर हिदुत्व का रास्ता अपना लिया था। बाल ठाकरे तो यहां तक दावा करते रहे कि अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को शिवसेना कार्यकर्ताओं ने ही ढहाया। इसके बाद से ही शिवसेना देश में हिंदुत्व का प्रतिनिधि दल रहा है। हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना कई मामलों में भारतीय जनता पार्टी से भी ज्यादा आक्रामक रही है। इसीलिए हिंदू उनके नाम के आगे 'हिंदू हृदय सम्राट' का अलंकरण लगाने लगे।

ठाकरे के बाद शिवसेना की कमान संभालने वाले उद्धव भी कट्टर हिंदुत्व के रास्ते पर ही चलते रहे हैं। वह भाजपा पर राम मंदिर निर्माण की राह में आई बाधाओं को जानबूझकर दूर न करने का भी आरोप लगाते रहे हैं। इतना ही नहीं उद्धव ने अपने बेटे के साथ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर जोर देने के लिए पिछले वर्ष अयोध्या का दौरा किया था। उनके उस दौरे को खूब हाइप भी मिला, क्योंकि ठाकरे परिवार का कोई सदस्य पहली बार महाराष्ट्र के बाहर निकला था।

यह संयोग ही है कि जब अयोध्या विवाद का सैद्धांतिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने हल कर दिया और रामलला के विवादित स्थल को हिंदुओं को राम मंदिर बनाने के लिए सौंप दिया, ठीक उसी समय शिवसेना उस मुकाम पर पहुंच गई जब उसे कट्टर हिंदुत्व या महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री दोनों में से एक का चयन करना है। एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाने पर निश्चित तौर पर शिवसेना को कट्टर हिंदुत्व का मार्ग छोड़ना पड़ेगा। शिवसेना को अब अपने उस नारे को भी छोड़ना पड़ेगा, जिसमें वह अयोध्या के बाद काशी और मथुरा की बात करती रही है।

अगर 2014 के महाराष्ट्र चुनाव प्रचार के दौरान उद्धव ठाकरे के भाषण को फिर से सुनें तो यह साफ हो जाएगा कि उनके मन में भाजपा और भाजपा नेताओं के खिलाफ बहुत अधिक विष भरा है, जिसे वह जब भी मौका मिलेगा, उगल देंगे। इसीलिए जब इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा पिछली बार की 23 की तुलना में 40 सीट पिछड़ गई तो उद्धव को 2014 के चुनाव और उसके बाद छोटे भाई का दर्जा स्वीकार करने के अपमान का बदला लेने का मौका मिल गया।

शिवसेना दरअसल, 2014 के बाद से ही मौका तलाश रही थी। चूंकि भाजपा बहुत मजबूत स्थिति में पहुंच गई थी, लिहाजा, वह वेट एंड वॉच के मोड में रही। मौके की तलाश में ही 2014 में छोटे भाई 'भाजपा' को 127 सीट से अधिक देने को तैयार न होने वाली शिवसेना 2019 में 144 के बजाय 124 सीट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई।

शिवसेना जानती थी कि भाजपा के साथ गठबंधन बनाकर लड़ने पर ही वह विधानसभा में सम्मानजनक सीटें हासिल कर सकती है। उसके सामने 2014 का उदाहरण था, जब चुनाव में पूरी ताकत लगाने के बावजूद शिवसेना 63 सीटों से आगे नहीं बढ़ पाई, जबकि भाजपा उसके लगभग दोगुना यानी 122 सीटें जीतने में सफल रही। शायद इसीलिए फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले की बात करने वाले उद्धव और संजय राऊत 124 सीटें मिलने पर चुप रहे।

दरअसल, शिवसेना नेता जानते थे कि कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन हो गया है, लिहाजा, उसके लिए भाजपा के साथ लड़ना लाभदायक होगा। अन्यथा वह बहुत ज्यादा घाटे में जा सकती है। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान, जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नेता बोल रहे थे कि इस बार चुनाव देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है और वही अगले पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे, तब भी पिता-पुत्र ने खामोश रहने में अपना हित समझा।

24 अक्टूबर का दिन उद्धव ठाकरे और संजय राऊत के लिए बदला लेने का दिन था। चुनाव परिणाम में भाजपा की 18 सीटें कम होने से दोनों नेता अचानक से फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले का राग आलापने लगे और ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री और सरकार में बराबर मंत्रालय की मांग करने लगे। वह जानते थे कि भाजपा पिछली बार की तरह मजबूत पोजिशन में नहीं है, वह शिवसेना के समर्थन के बिना सरकार नहीं बना सकती। अचानक से शिवसेना की बारगेनिंग पावर बहुत बढ़ गई।
महाराष्ट्र में भगवा गठबंधन में 'बड़ा भाई' बनने की हसरत पाले उद्धव ठाकरे की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर थी। इसीलिए मुंबई की वरली सीट से आदित्य ठाकरे चुनाव मैदान में उतरे और विधायक चुने गए। उद्धव ठाकरे बार-बार हवाला दे रहे हैं कि उन्होंने अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे को वचन दिया है कि महाराष्ट्र में एक न एक दिन शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाकर ही रहेंगे।

दरअसल, 1988-89 में जब प्रमोद महाजन और बाल ठाकरे ने भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन का फैसला किया, तब भाजपा का राज्य में कोई खास जनाधार नहीं था। उस समय शिवसेना बड़े भाई और भाजपा छोटे भाई के किरदार में थी। 1995 में जब भगवा गठबंधन की सरकार बनी तब शिवसेना के मनोहर जोशी मुख्यमंत्री और भाजपा के गोपीनाथ मुंडे उपमुख्यमंत्री बने थे। यह सिलसिला 2014 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहा, लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा बड़े भाई के किरदार में आ गई। इस अदला-बदली को उद्धव मन से कभी स्वीकार नहीं कर सके। अब भाजपा से बदला लेने का मौका मिला तो अवसर क्यों चूकते।

यानी पहले मराठी मानुस, फिर कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलने वाली शिवसेना अब एनसीपी और कांग्रेस के साथ धर्मनिरपेक्ष हो जाएगी!

-- आईएएनएस

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-Will Shiv Sena give up radical Hindutvaism for the chair?
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: maharashtra, bharatiya janata party, shiv sena, governor bhagat singh koshyari, shiv sena alliance, shiv sena-ncp-congress, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, delhi news, delhi news in hindi, real time delhi city news, real time news, delhi news khas khabar, delhi news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

Copyright © 2019 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved