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उपराष्ट्रपति ने न्यायपालिका को मातृभाषा बोलने वालों के लिए सुलभ बनाने का आह्वान किया

Vice President calls for making judiciary accessible to mother tongue speakers - Delhi News in Hindi

हैदराबाद। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने न्यायपालिका को मातृभाषा बोलने वालों के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता को लेकर आह्वान किया है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमना की हालिया पहल के साथ, एक महिला को अदालत में तेलुगु में बोलने की अनुमति देने का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस घटना ने लोगों को अपनी समस्याओं को अपनी मातृभाषा में व्यक्त करने और क्षेत्रीय भाषाओं में निर्णय देने की अनुमति देने के लिए न्यायपालिका की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

शनिवार को मातृभाषाओं के संरक्षण पर तेलुगु कूटमी द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस (आभासी सम्मेलन) को संबोधित करते हुए, नायडू ने आगाह किया कि मातृभाषा के नुकसान से अंतत: आत्म-पहचान और आत्म-सम्मान का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत के विभिन्न पहलुओं - संगीत, नृत्य, नाटक, रीति-रिवाजों, त्योहारों, पारंपरिक ज्ञान - को सरंक्षित करना केवल अपनी मातृभाषा को संरक्षित करके ही संभव होगा।

नायडू ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण और कायाकल्प के लिए अभिनव और सहयोगात्मक प्रयासों का आह्वान किया। इस बात पर जोर देते हुए कि भाषाओं को संरक्षित करना और उनकी निरंतरता सुनिश्चित करना केवल जन आंदोलन के माध्यम से ही संभव है, उन्होंने कहा कि हमारी भाषा की विरासत को हमारी भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के प्रयासों में लोगों को एक स्वर में एक साथ आना चाहिए।

मातृभाषा के संरक्षण में दुनिया में विभिन्न सर्वोत्तम प्रथाओं का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने भाषा के प्रति उत्साही, भाषाविदों, शिक्षकों, अभिभावकों और मीडिया से ऐसे देशों से अंतर्²ष्टि लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने इंजीनियरिंग, चिकित्सा और कानून जैसे विभिन्न उन्नत विषयों में अपनी मातृभाषा का उपयोग करते हुए, हर क्षेत्र में अंग्रेजी बोलने वाले देशों की तुलना में खुद को मजबूत साबित किया है। उन्होंने व्यापक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली में सुधार करने का भी सुझाव दिया।

भारतीय भाषाओं को संरक्षित करने के लिए आवश्यक विभिन्न लोगों द्वारा संचालित पहलों को छूते हुए, उपराष्ट्रपति ने एक भाषा को समृद्ध बनाने में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय भाषाओं में अनुवादों की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार के लिए प्रयास बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने प्लेन (सीधा एवं स्पष्ट), बोली जाने वाली भाषाओं में प्राचीन साहित्य को युवाओं के लिए अधिक सुलभ और संबंधित बनाने का भी प्रस्ताव रखा।

--आईएएनएस

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Web Title-Vice President calls for making judiciary accessible to mother tongue speakers
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