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कल्याण बनर्जी के निलंबन पर टीएमसी का विरोध, संसद में गतिरोध पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

TMC protests Kalyan Banerjees suspension; ruling and opposition parties at odds over parliamentary deadlock - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कल्याण बनर्जी के निलंबन को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने निलंबन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि दोपहर करीब दो बजे सदन में हंगामे के बीच कार्यवाहक सभापति ने एक नोटिस पढ़कर कल्याण बनर्जी को पूरे शेष सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा की। सदन में शोर-शराबे के कारण अधिकांश सांसद यह समझ ही नहीं पाए कि सभापति क्या कह रहे थे। यदि निलंबन का आधार कल्याण बनर्जी और सांसद मिताली बाग के बीच हुई कथित बहस है, तो वह उस समय हुई थी, जब सदन की कार्यवाही स्थगित थी, माइक बंद थे और पीठासीन अधिकारी भी मौजूद नहीं थे। ऐसे में उस घटना को सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी को न तो कोई पूर्व नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। यह कार्रवाई संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं है। नियम 374(2) उस स्थिति में लागू नहीं होता जब सदन की कार्यवाही स्थगित हो। इस संबंध में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की। अध्यक्ष ने कहा कि निलंबन का प्रस्ताव सत्ता पक्ष की ओर से आया है, इसलिए वह इस विषय पर उनसे चर्चा करेंगे और अगले दिन अपना निर्णय सुनाएंगे। टीएमसी ने निलंबन तत्काल वापस लेने की मांग की है।
वहीं, भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने कल्याण बनर्जी के निलंबन पर कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव और मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत शत्रुता में नहीं बदलना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। किस दल के साथ राजनीति करनी है, यह राजनीतिक दलों का निर्णय होता है, लेकिन संसदीय आचरण की मर्यादा का पालन सभी को करना चाहिए।
संसद के मानसून सत्र में जारी हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच जारी टकराव पर उन्होंने कहा कि यदि बार-बार मुद्दे और शर्तें बदली जाएंगी तो सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाएगी। पहले विपक्ष ने चर्चा की मांग की, जिस पर सरकार और पीठासीन अधिकारी दोनों सहमत हो गए। लेकिन, बाद में विपक्ष ने पहले इस्तीफे की मांग रख दी और उसके बाद चर्चा की बात कही। संसद का मूल दायित्व बहस और चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना है। यदि शिक्षा व्यवस्था या किसी अन्य विषय में कोई कमी है, तो उसका समाधान संसद में चर्चा के जरिए ही संभव है।
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों की चिंता करता है तो उसे सदन में चर्चा में भाग लेना चाहिए। छात्र सीधे संसद में अपनी बात नहीं रख सकते, इसलिए उनकी आवाज सांसदों के माध्यम से ही सदन तक पहुंचती है। ऐसे में यदि चर्चा ही नहीं होने दी जाएगी तो छात्रों की आवाज भी प्रभावी ढंग से नहीं उठ पाएगी।
--आईएएनएस

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Web Title-TMC protests Kalyan Banerjees suspension; ruling and opposition parties at odds over parliamentary deadlock
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