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पाकिस्तान में महिला पत्रकारों की संख्या गिरी, अहम मौकों पर लाइव न्यूज से भी नदारद!

The number of female journalists in Pakistan has fallen, even absent from live news on key occasions! - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली । पाकिस्तान की मीडिया में महिलाओं की भागीदारी लगातार घट रही है, जो लिंग असमानता और कार्यस्थल पर चुनौतियों का संकेत देती है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, 2020 में जहां टीवी चैनलों पर महिला रिपोर्टरों का अनुपात 16 फीसदी था, वहीं अब यह घटकर मात्र 4 फीसदी रह गया है। ग्लोबल मीडिया मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट (जीएमएमपी) की इस रिपोर्ट पर पाकिस्तान स्थित एक एनजीओ यूकेएस रिसर्च सेंटर ने बुधवार को एक बयान जारी किया। जीएमएमपी हर पांच साल में एक बार इससे संबंधित रिपोर्ट छापता है। जो एक ग्लोबल मॉनिटरिंग डे से न्यूज कंटेंट का एक स्नैपशॉट कैप्चर करता है। इस साल यह चौथा चक्र है जिसमें पाकिस्तानी रिसर्च सेंटर ने जीएमएमपी के साथ मिलकर पाकिस्तान के डेटा की मॉनिटरिंग की।
जीएमएमपी 2025 को दुनिया भर में 6 मई, 2025 को मॉनिटर किया गया था। इस दिन पाकिस्तान के न्यूज एजेंडा में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग के हालात थे। इस लड़ाई ने उस दिन मीडिया का माहौल बनाया, लेकिन इस दिन भी जेंडर इनइक्वालिटी स्क्रीन पर स्पष्ट देखी गई।
बयान में कहा गया, "6 मई को टेलीविजन, रेडियो या इंटरनेट न्यूज में कोई महिला रिपोर्टर रिकॉर्ड नहीं की गई।"
"खबरें तल्ख रिश्तों, राजनीतिक बयानबाजी और मिलिट्री अस्सेमेंट पर बहुत ज्यादा केंद्रित थीं, तो महिलाओं की कहानियां न्यूज साइकिल से लगभग गायब हो गईं। हालांकि संघर्ष ने 2025 के डेटा को प्रभावित किया, लेकिन ये भी सच है कि यह प्रवृत्ति पूर्वाग्रह को दर्शाती है जो पाकिस्तानी मीडिया में महिलाओं को स्क्रीन पर दिखने और आवाज को सीमित करने में यकीन रखती है।"
वहीं, जेंडर-बेस्ड वायलेंस (जीबीवी) यानी लिंग आधारित हिंसा से जुड़ी खबरों को लेकर, बयान में कहा गया कि "मॉनिटरिंग वाले दिन मॉनिटर किए गए सभी मीडिया में, जीबीवी पर सिर्फ एक स्टोरी दिखाई दी," और कहा कि "उसमें भी महिला को पूरी तरह से विक्टिम के तौर पर पेश किया गया था।"
इसमें कहा गया, “कोई ह्यूमन राइट्स लेंस या लीगल फ्रेमवर्क लागू नहीं किया गया।”
बयान में आगे बताया गया कि इस साल, महिलाओं ने न्यूज सब्जेक्ट्स में सिर्फ 13 प्रतिशत हिस्सा लिया, जो 2020 में 18 फीसदी से कम है। “जिन सभी खबरों में महिलाएं केंद्र में थीं यानी वो सब्जेक्ट थीं, अजीब बात ये रही कि उन्हें भी पुरुषों ने ही रिपोर्ट किया।”
इसमें आगे कहा गया, “ये नंबर पिछले चक्र के उलट हैं और यह दिखाते हैं कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व, संपादकीय प्राथमिकताएं और न्यूज रूटीन से कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है।”
--आईएएनएस

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