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संसद में राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का मुद्दा फिर से उठा

The issue of getting constitutional recognition of Rajasthani, Bhojpuri and Bhoti language again in Parliament - Delhi News in Hindi

- नीति गोपेन्द्र भट्ट - नई दिल्ली । संसद के असाधारण मानसून सत्र में राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का मुद्दा फिर से उठा है I उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के सांसद जगदम्बिका पाल ने लोकसभा में विशेष उल्लेख द्वारा इस मामले को उठाते हुए केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की कि हिंदी दिवस पर देश के सभी प्रमुख संवैधानिक पदों पर बैठी हस्तियों ने राजभाषा हिंदी के साथ-साथ देश की सभी भाषाओँ को सम्मान देने और समृद्ध किये जाने की जो बात कही है उसी के अनुरूप राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए, इसमें अब और अधिक देरी नहीं की जानी चाहिए । जगदम्बिका पाल ने लोकसभा ओम बिरला को इंगित करते हुए कहा कि यह एक सुखद संजोग है कि इस बार संसद का असाधारण मानसून सत्र हिंदी दिवस पर शुरू हुआ है और प्रधानमंत्री और आप सहित सभी ने राजभाषा हिंदी के साथ- साथ देश की अन्य भाषाओँ का भी सम्मान करने और उनकी समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयासों की बात कही है I राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता I
उन्होंने कहा कि देश की यह तीन भाषाएँ बहुत प्राचीन है औरदेश के विभिन्न भागों में ही नहीं वरन विश्व के कई देशों में बोली जाती हैं I अकेली भोजपुरी को 16 देशों में करीब 30 करोड़ लोगों द्वारा बोला जाता हैं I इसीप्रकार राजस्थानी भाषा भी अमरीका,कनाडा, पाकिस्तान, अफ्रीका नेपाल, यूरोप, मिडिल ईस्ट सहित अनेक देशों में बोली जाती है और नेपाल की संवैधानिक सभा और अन्य देशों ने इसे सरकारी मान्यता दी हैं I राजस्थान के गवरी गीत और कालबेलिया नृत्य आदि को यूनिस्को ने सांस्कृतिक धरोहर से सम्मानित किया हैं I भोजपुरी को मॉरीशस, गुयाना, फिजी, और सूरीनाम आदि देशों ने मान्यता दी हैं I इसके अलावा भोटी भी भूटान की सरकारी भाषा है I
जगदम्बिका पाल ने कहा कि यह एक विडम्बना ही है कि भारत के बाहर दुनिया के अन्य देश जब इन तीनों भाषाओँ को सम्मान और मान्यता दे रहें है तो भारत सरकार अब तक राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने में अनावश्यक विलम्ब क्यों कर रही है I उन्होंने कहा कि इन भाषाओँ को मान्यता देना भारत की 135 करोड़ जनता के लिए सम्मान की बात होगी I यह तीनों भाषाएँ देश ही नहीं पूरे विश्व में लोकप्रिय हैं I
जगदम्बिका प्रसाद ने लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ,केंद्रीय शिक्षा मंत्री और संसदीय कार्य आदि मंत्रीगणों का ध्यान भी इस और आकर्षित किया एवं प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से इस पर गौर करवा मान्यता दिलवाने का आग्रह किया I
उल्लेखनीय है कि राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का मुद्दा अनेकों बार संसद सत्र में उठाया गया है और सम्बंधित प्रदेशों के पक्ष प्रतिपक्ष के सांसद भी इन भाषाओँ को सविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह करते आये है I संसद के बाहर भी सांसदों की कई बैठके हुई है और राजस्थान भाषा मान्यता समिति के बैनर तलें दिल्ली के जंतरमंतर पर विशाल प्रदर्शन के उपरान्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भी दिया गया था लेकिन लगातार पैरवी के बावजूद इन भाषाओँ को संवैधानिक मान्यता नहीं मिलने से राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषा के प्रेमियों में घोर निराशा व्याप्त है I राजस्थान के सभी 25 लोकसभा सदस्य भाजपा के है और भोजपुरी के भी अनेक सांसद है I इसी तरह केंद्रीय मंत्री किरण री जी जू किरेन सहित भोटी भाषा के समर्थक भी कम नहीं हैं I

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Web Title-The issue of getting constitutional recognition of Rajasthani, Bhojpuri and Bhoti language again in Parliament
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