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'सरकार प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और उसके इस्तेमाल में शामिल लोगों के खिलाफ सख्ती से निपटेगी': मनसुख मांडविया

The Government Will Deal Strictly with Those Involved in the Trafficking and Use of Banned Substances: Mansukh Mandaviya - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली । केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मांडविया ने वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) के वैश्विक एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन नेटवर्क के फाइनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने साफ-सुथरे खेलों के लिए भारत के पक्के इरादे और डोपिंग से निपटने में दुनिया भर में सहयोग के बारे में बताया। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "एक ग्लोबल एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस और इन्वेस्टिगेशन नेटवर्क इन जरूरी क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।" डॉ. मांडविया ने कहा, भारत ने सिर्फ कंप्लायंस (किसी व्यवसाय, उद्योग या संस्था द्वारा निर्धारित कानूनी नियमों, सरकारी विनियमों, मानकों और आंतरिक नीतियों का कड़ाई से पालन करना) के लिए नहीं, बल्कि खेल की एकता के लिए सच्ची प्रतिबद्धता के साथ सुधार किए हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एक्ट, 2022 को एक मजबूत कानूनी फ्रेमवर्क बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग सुधार कानून, 2025 भारत के नियमों को वैश्विक स्तर के हिसाब से बनाता है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि सरकार उन लोगों के खिलाफ कानून लाने की दिशा में काम कर रही है जो प्रतिबंधित चीजों को देने या उनकी तस्करी में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जहां पहले की कोशिशें ज्यादातर लैबोरेटरी में जांच और एथलीट कम्प्लायंस तक ही सीमित थीं, वहीं आज डोपिंग कोई एक गलत काम नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित मल्टीनेशनल कंपनी है, जिससे ऐसे नेटवर्क को असरदार तरीके से खत्म करने के लिए मिलकर वैश्विक जवाब देने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर डॉ. मांडविया ने कहा, "वाडा वर्कशॉप और मौजूदा कॉन्फ्रेंस जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की मेजबानी ने हमारी जांच क्षमताओं को काफी बढ़ाया है और हमारे एंटी-डोपिंग इकोसिस्टम को मजबूत किया है। भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिशा और गति दोनों के साथ एक वैश्विक खेल शक्ति के रूप में उभर रहा है।"
उन्होंने खेल विकास में भारत के निवेश पर भी जोर दिया, जिसमें आधारभूत संरचना, प्रतिभा की पहचान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण शामिल हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलें स्पोर्टिंग इकोसिस्टम को बदल रही हैं और खेल को हमारी राष्ट्रीय पहचान का एक अहम हिस्सा बना रही हैं।
नैतिक पहलू पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "एथलीट वैल्यूज को स्पोर्टिंग एक्सीलेंस के मूल में रहना चाहिए। खेल में अनुशासन, ईमानदारी और चरित्र को बढ़ावा देने की ताकत है, लेकिन बढ़ते प्रतियोगी दबाव कभी-कभी गलत फैसलों की ओर ले जा सकते हैं। खेल के हर स्तर पर निष्पक्षता, ईमानदारी और सम्मान को बढ़ावा देना जरूरी है।"
डॉ. मंडाविया ने कहा, "बचाव सबसे असरदार तरीका है। सही समय पर सही जानकारी देने से एथलीट सोच-समझकर फैसले ले पाते हैं और जानबूझकर और गलती से होने वाले उल्लंघन से बच पाते हैं।"
उन्होंने कहा कि नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) इंडिया ने वर्कशॉप, सेमिनार, डिजिटल कैंपेन और इवेंट-आधारित प्रशिक्षण के जरिए जागरूकता के लिए एक बड़ा, कई स्तर वाला तरीका अपनाया है। यूनिवर्सल डिजाइन फ्रेमवर्क के तहत दिव्यांग एथलीटों के लिए खास शिक्षा मॉड्यूल भी बनाए गए हैं।
मंत्री ने 'नो योर मेडिसिन' मोबाइल एप्लिकेशन जैसे तकनीकी तरीकों पर भी जोर दिया, जो एथलीटों को दवाओं में मना की गई चीजों को जांचने में मदद करता है। एथलीटों की सुरक्षा के लिए बड़े संस्थानों में एडवांस्ड टेस्टिंग सुविधाओं की स्थापना भी जरूरी है।
डॉ. मांडविया ने टेस्टिंग और एनफोर्समेंट में हुई प्रगति पर कहा, भारत ने अपनी एंटी-डोपिंग टेस्टिंग को 2019 में लगभग 4,000 टेस्ट से बढ़ाकर पिछले साल लगभग 8,000 टेस्ट कर दिया है। यह लगातार जागरूकता और रोकथाम की कोशिशों का असर दिखाता है।
मजबूत वैश्विक साझेदारी की जरूरत को समझते हुए, "वाडा के अध्यक्ष विटोल्ड बैंका ने कहा, "वाडा का इंटेलिजेंस और इन्वेस्टिगेशन मॉडल नेशनल एंटी-डोपिंग संस्थान और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए बना है। यह मॉडल साझेदरी पर बना है।"
उन्होंने कहा, "यह यूरोपोल और इंटरपोल जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से कानून लागू करने वाली एजेंसियों की क्षमताओं के साथ एंटी-डोपिंग पेशेवरों की विशेषज्ञता को साथ लाता है।"
केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि भारत बढ़ती मांग को पूरा करने और नेशनल एंटी-डोपिंग फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए नई वाडा-कम्प्लायंट ड्रग टेस्टिंग लैब बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, "कोई भी अकेली संस्था अकेले डोपिंग की चुनौती का सामना नहीं कर सकती। सरकारों, नियामकों और खेल संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। भारत न सिर्फ खेल में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बल्कि ईमानदारी के सबसे ऊंचे स्तर को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।"
केंद्रीय खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव ने कहा, "खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी की संस्थागत और जांच करने की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में काम किया है, जिसमें एनफोर्समेंट एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल और बेहतर जानकारी शेयर करना शामिल है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल संस्थान जैसे संगठनों के साथ साझेदारी, खराब या बिना रेगुलेटेड चीजों से होने वाले खतरों से निपटने के लिए बहुत जरूरी हैं, जो दुनिया भर में एक बड़ी चिंता बनी हुई है।"
नाडा इंडिया के निदेशक अनंत कुमार ने कहा, "हाल के वर्षों में हमारे टेस्टिंग प्रोग्राम में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिसे रिस्क-आधारित और रणनीतिक बदलाव से सहयोग मिला है। हालांकि, जैसा कि हम मानते हैं, सिर्फ टेस्टिंग अब काफी नहीं है, और इंटीग्रेशन, इंटेलिजेंस और शिक्षा को हमारे एंटी-डोपिंग फ्रेमवर्क का कोर बनाना होगा।"
--आईएएनएस

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Web Title-The Government Will Deal Strictly with Those Involved in the Trafficking and Use of Banned Substances: Mansukh Mandaviya
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