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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की जल्द रिहाई को चुनौती पर सुनवाई की स्थगित

Supreme Court adjourns hearing on challenge to early release of former Bihar MP Anand Mohan Singh - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली मारे गए आईएएस अधिकारी जी. कृष्णैया की विधवा की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की तारीख 26 सितंबर तय करते हुए कहा, "हम इसे सितंबर में किसी भी गैर-विविध दिन पर उठाएंगे।" गौरतलब है कि न्यायमूर्ति कांत 5-न्यायाधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा हैं, जो सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर, 2 अगस्त से लगातार अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान, बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने पीठ को अवगत कराया कि राज्य सरकार ने एक ही दिन में 97 दोषी व्यक्तियों की सजा में छूट पर विचार किया और उसने केवल गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन को सजा में छूट नहीं दी।
इस पर, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा, “क्या इन सभी 97 लोगों पर एक लोक सेवक की हत्या का आरोप लगाया गया था? उनका मामला यह है कि उन्हें (आनंद मोहन) रिहा करने के लिए नीति बदल दी गई।
जवाब में, कुमार ने कहा कि वह उन दोषियों को वर्गीकृत करते हुए एक विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल करेंगे, जिन्हें उनके अपराध के आधार पर छूट दी गई है।
शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार को दो सप्ताह की अवधि के भीतर एक अतिरिक्त जवाबी हलफनामा दायर करने की अनुमति दी। इसने याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर हलफनामा, यदि कोई हो, दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की अवधि भी दी।
मारे गए नौकरशाह की विधवा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें मामले से संबंधित आधिकारिक फाइलों की प्रति नहीं दी है।
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व सांसद को मिली सजा में छूट के संबंध में मूल रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया है।
शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया को मामले से संबंधित मूल फाइलों की प्रति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार के समक्ष आवेदन करने को कहा।
अपने जवाबी हलफनामे में, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा,“आम जनता या लोक सेवक की हत्या की सज़ा एक समान है। एक ओर, आम जनता की हत्या के दोषी आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदी को समय से पहले रिहाई के लिए पात्र माना जाता है और दूसरी ओर, किसी लोक सेवक की हत्या के दोषी आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदी को समय से पहले रिहाई के लिए विचार किए जाने के लिए पात्र नहीं माना जाता है। पीड़ित की स्थिति के आधार पर भेदभाव को दूर करने की मांग की गई।”
बिहार जेल नियमावली में संशोधन के बाद आनंद मोहन सिंह को सहरसा जेल से रिहा किया गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल, 2023 के संशोधन के जरिए पूर्वव्यापी प्रभाव से बिहार जेल मैनुअल, 2012 में संशोधन किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषी आनंद मोहन को छूट का लाभ दिया जाए।
1994 में, गोपालगंज के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट कृष्णैया को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, जब उनके वाहन ने गैंगस्टर छोटन शुक्ला के अंतिम संस्कार के जुलूस से आगे निकलने की कोशिश की थी। भीड़ को आनंद मोहन सिंह ने उकसाया था।

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Web Title-Supreme Court adjourns hearing on challenge to early release of former Bihar MP Anand Mohan Singh
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