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सभापति नायडू बोले, सोच-विचार के बाद ही खारिज किया महाभियोग प्रस्ताव

नई दिल्ली। महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय लेकर आलोचनाओं के घेरे में आए राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि यह निर्णय एक महीने से अधिक अवधि तक उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। सूत्रों ने कहा, नायडू के निर्णय पर बधाई देने पहुंचे सर्वोच्च न्यायालय के 10 वकीलों के प्रतिनिधियों से उन्होंने कहा कि यह निर्णय संविधान के प्रावधानों के सख्त अनुपालन और न्यायाधीश पूछताछ अधिनियम, 1968 के आधार पर लिया गया है। सभापति ने सोमवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ 64 सांसदों के हस्ताक्षरित महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया था। उन्होंने प्रस्ताव में लगाए गए आरोपों को असत्यापित और कार्रवाई नहीं करने योग्य पाया था। कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को नायडू पर हमला करते हुए उनके निर्णय को अवैध, गलत और असंवैधानिक बताया था और कहा था कि यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है। उन्होंने यह भी कहा था कि सांसद उनके आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेंगे।वहीं वकीलों ने कहा कि सभापति द्वारा समय पर लिए गए निर्णय ने प्रधान न्यायाधीश के पद और सर्वोच्च न्यायालय की मर्यादा को बचा लिया। नायडू ने कहा, मुझे नहीं लगता कि इसके लिए मेरी प्रशंसा की जानी चाहिए। मैंने वही किया जिसकी मुझसे उम्मीद थी और इस तरह के मामलों में सभापति से जिस तरह के निर्णय लेने की उम्मीद की जाती है, मैंने वैसा ही किया। सभा के कुछ आदरणीय सदस्यों के विभिन्न मत हो सकते हैं और उन्हें खुद को अभिव्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन मेरे पास एक उतरदायित्व था। मैंने अपना काम किया और मैं इससे संतुष्ट हूं। तीन दिन में ही महाभियोग नोटिस पर निर्णय लेने के बाद हो रही आलोचनाओं पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उन मीडिया रपटों का हवाला दिया, जिसमें प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के बारे में चर्चा हो रही थी और कहा, मैं तब से प्रस्ताव की गंभीरता और इसकी महत्ता और समय पर निर्णय लेने की आवश्यकता को देखते हुए इस संबंध में इसके प्रावधानों और प्रक्रियाओं और उदाहरणों पर काम कर रहा था। वकीलों ने कहा, यह पहली बार नहीं है कि इस तरह के नोटिस को पीठासीन अधिकारी द्वारा खारिज किया गया है। वकीलों ने इसी तरह के एक मामले का उल्लेख किया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जे.सी शाह के खिलाफ महाभियोग नोटिस को लोकसभा अध्यक्ष जी.एस ढिल्लों ने खारिज कर दिया था। शाह बाद में सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बने। वकीलों ने न्यायमूर्ति पी.डी. दिनाकरन को हटाने से संबंधित याचिका के भी तीन दिन के अंदर स्वीकार कर लेने का उदाहरण दिया।

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Web Title-Rajya Sabha Chairman Naidu says, Decision to reject CJI impeachment came after due diligence
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