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दिल्ली हाई कोर्ट में राघव चड्ढा की बड़ी जीत, मानहानिकारक सामग्री हटाने का आदेश

Major Win for Raghav Chadha in Delhi High Court; Order to Remove Defamatory Content - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को निशाना बनाने वाली कुछ मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट्स हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य और आलोचना लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन 'अपमानजनक और भद्दी' सामग्री को हानिरहित हास्य कहकर संरक्षित नहीं किया जा सकता। अंतरिम आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की एकल-न्यायाधीश पीठ ने प्रतिवादी संख्या 2 और 4, मध्यस्थ प्लेटफॉर्मों, को दो सप्ताह के भीतर निर्दिष्ट यूआरएल हटाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्हें इसी अवधि के भीतर चड्ढा को पोस्ट से जुड़े खातों की बेसिक सब्सक्राइबर इनफार्मेशन (बीएसआई) और आईपी लॉग उपलब्ध कराने को कहा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज संख्या 2, 8, 9, 11, 25 और 40 में आपत्तिजनक सामग्री है, जो अश्लील और भद्दी प्रकृति की है और हानिरहित व्यंग्यपूर्ण हास्य की श्रेणी से बाहर है। इसीलिए, उचित यही होगा कि प्रतिवादी संख्या 1 को ऐसी सामग्री प्रकाशित करने से रोका जाए। साथ ही प्रतिवादी संख्या 2 और 4 को इन विशिष्ट दस्तावेजों से जुड़े यूआरएल हटाने का निर्देश दिया जाए।
हालांकि, न्यायमूर्ति प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनौती दी गई शेष सामग्री को हटाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। यह देखते हुए कि प्रस्तुत किए गए 52 दस्तावेजों में से अधिकांश आम आदमी पार्टी (आप) से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक निर्णयों की आलोचना से संबंधित थे।
कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों के गठबंधन, शासन, नीतियों आदि में बदलाव पर हास्य राजनीति का अभिन्न अंग है और सत्ता के ऐसे पदों पर आसीन सार्वजनिक हस्तियों को व्यंग्यात्मक हास्य का सामना करना अपने पेशे का एक आवश्यक और अपरिहार्य पहलू मानना ​​चाहिए, भले ही यह अप्रिय हो।
साथ ही, दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से डीपफेक या मॉर्फ्ड सामग्री बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग का समर्थन नहीं करता है। फैसले में कहा गया कि यह कोर्ट किसी भी तरह से डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों आदि के निर्माण के लिए एआई के उपयोग का समर्थन नहीं करता है, जब इसका उपयोग किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए किया जाता है।
कोर्ट ने आगे कहा कि अदालतों को किसी व्यक्ति के गरिमा के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी के बीच उचित संतुलन बनाना चाहिए।
चड्ढा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके नाम, छवि, रूप और पहचान के कथित अनधिकृत उपयोग के खिलाफ अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी, जिसमें एआई द्वारा निर्मित, डीपफेक और मॉर्फ्ड सामग्री भी शामिल है।
इस फैसले का स्वागत करते हुए चड्ढा का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता सत्य आनंद और निखिल आराधे ने कहा कि यह फैसला संगठित ऑनलाइन मानहानि से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने एक बयान में कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा आज पारित आदेश एक स्वागत योग्य कदम है।
--आईएएनएस

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Web Title-Major Win for Raghav Chadha in Delhi High Court; Order to Remove Defamatory Content
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