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एनटीसीए की बैठक में सांसद दीया कुमारी और डूंगरपुर ने बाघ संरक्षण के साथ ही अन्य वन्य प्रजातियों को बचाने के लिए दिए महत्वपूर्ण सुझाव

In the meeting of NTCA, MP Diya Kumari and Dungarpur gave important suggestions to save tigers as well as other wild species. - Delhi News in Hindi

-नीति गोपेंद्र भट्ट-
नई दिल्ली । राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर ने प्रतापगढ़ जिले के सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य को बाघ अभयारण्य बनाने की माँग की है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हाल ही आयोजित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 19वीं बैठक में बतौर सदस्य भाग लेते हुए डूंगरपुर ने बताया कि प्रतापगढ़ जिले के सीतामाता अभयारण्य धरियावाद से लेकर उदयपुर संभाग के सलूंबर जयसमन्द बाँसवाड़ा और डूंगरपुर एवं राजसमन्द के कुम्भलगढ़ और सिरोही जिले के माउण्ट आबू तथा पाली जिले के जवाई बांध तक का इलाक़ा वनों से सम्पन्न अद्वितीय और अप्रतिम है।सीतामाता में सागवान-बांस आदि के सघन जंगल है जो कि 3000 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र में फैले हुए है।

उन्होंने कहा कि आबादी,पारिस्थितिकी और जैविक दवाब में संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र को भी बाघ अभयारण्य घोषित किया जाना चाहिए। हर्ष वर्धन ने बताया कि पूर्व में डूंगरपुर रियासत भी बाघ पुनरुद्धार का आदर्श केन्द्र रहा है और आज भी यहाँ पेंथर आदि के मूवमेंट पायें जाते है।

उन्होंने कहा कि मध्य भारत के अंतर्गत दक्षिणी पूर्वी राजस्थान प्रारम्भ से ही बाघों की सघन आबादी के लिए मशहूर रहा है, हालाँकि कालान्तर में वनों की निर्मम कटाई और अवैध शिकारी माफ़ियाँओं के कारण इनकी आबादी में कमी आई बावजूद इसके आज भी देश के अन्य बाघ अभयारण्यों के साथ राजस्थान के सवाई माधोपुर के रणथम्भोर और अलवर जिले के सरिस्का टाईगर वन अभयारण्य बाधों के लिए प्रसिद्ध हैं ।
उन्होंने बताया कि मेवाड़-मारवाड़ के संगम स्थल जवाई बांध और प्रदेश में मौजूद विश्व की सबसे पुरानी अरावली पर्वत शृंखलाओं में आज भी देश के सबसे अधिक पेंथर पाये जाते है और वन विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार रणथम्भोर एवं सरिस्का के बाद कुम्भलगढ़ और टाडगढ़ में सबसे अधिक सांभर, हिरण,नील गाय,तेंदुआ और भालू की आबादी है। यह रोमांचक है लेकिन हमें इनकी रक्षा के लिए अच्छी निगरानी और प्रशिक्षित फ्रंटलाइन स्टाफ की जरूरत है।

कुंभलगढ़ और टॉडगढ़ वन्यजीव अभयारण्यों को टाइगर रिजर्व घोषित करें

एनटीसीए की बैठक में हर्ष वर्धन सिंह डूंगरपुर और राजसमन्द की सांसद दीया कुमारी ने कुंभलगढ़ और टॉडगढ़ वन्यजीव अभयारण्यों को टाइगर रिजर्व घोषित करने की माँग रखी और बताया कि इसमें मानव बस्तियाँ भी बहुत कम है और जंगल के मध्य स्थित एक गाँव खरनी टोकरी के बाशिन्दों ने लिखित में गाँव को खाली करने के लिए लिखा हैं। उन्हें ज़मीन के बदले ज़मीन देकर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा सकता है।


बैठक बताया गया कि एनटीसीए ने संभावित टाइगर रिजर्व के रूप में कुम्भलगढ़ और टॉडगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की व्यवहार्यता आकलन रिपोर्ट 10 नवंबर 2021 को प्रस्तुत कर दी है लेकिन राजस्थान सरकार द्वारा इस पर अभी आवश्यक कार्यवाही करनी है। उन्होंने बैठक में मौजूद राजस्थान के मुख्य वन्यजीव वार्डन, अरिंदम तोमर से व्यवहार्यता रिपोर्ट की मंजूरी में तेजी लाने के लिए समुचित कार्यवाही का आग्रह किया।


साथ ही सांसदों ने बताया कि उन्होंने इस बारे के राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पर्यावरण राज्य मंत्री हेमाराम चौधरी से भी अपील की है । इस रिजर्व से क्षेत्र में पर्यटन और अर्थव्यवस्था को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।



बैठक में दोनों सांसदों ने देश में वन्यजीव अभयारण्यों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान और पूरे देश में मौजूदा बाघ अभयारण्यों को बचाने के लिए गम्भीर प्रयासों की जरुरत हैं ।फ्रंटलाइन स्टाफ की कमी और लगातार बढ़ते जैविक दबावों के कारण वन्य जीवों के विकास में गंभीर गुणात्मक नुकसान हो रहा है। साथ ही समर्पित कर्मचारियों द्वारा पैदल गश्त नहीं होने के कारण बाघों एवं अन्य जीवों के आवासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। होमगार्ड, बोर्डर होमगार्ड या दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी जो वर्तमान में सुरक्षा और निगरानी कर्तव्यों के लिए कार्यरत हैं, और अधिक चौकस एवं प्रशिक्षित होने चाहिए। साथ ही पर्यावास संरक्षण, वन्यजीव कानून प्रवर्तन-अपराध रोकथाम, अदालतों में पता लगाने और अनुवर्ती कार्रवाई, बाघों की दिन-प्रतिदिन की निगरानी की जरूरतों को देखते हुए वर्तमान परिदृश्य के अनुसार फ्रंटलाइन स्टाफ की आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करने की भी तत्काल आवश्यकता है।


इसके अलावा संकटग्रस्त प्रजातियों, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, परिधीय गांवों में सहभागी पर्यावरण विकास, पर्यटन प्रबंधन, ग्राम पुनर्वास, जल प्रबंधन और अन्य बहुत कुछ अपेक्षित कार्यवाही करने की जरुरत आज के समय की सबसे बड़ी माँग हैं। फ्रंटलाइन स्टाफिंग के मानदंडों को मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में तय किया जाना चाहिए और एनटीसीए को राज्यों द्वारा इसका अनुपालन सुनिश्चित कराना चाहिए वरना अपेक्षित परिणाम मिलने की चुनौतियों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता हैं।

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