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सदन में निष्पक्ष चर्चा तभी संभव है जब शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंः खड़गे

Fair discussion in the House is possible only when the Education Minister resigns: Kharge - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली । विपक्ष ने बुधवार को संसद में स्पष्ट तौर पर कहा कि है सदन में निष्पक्ष चर्चा तभी संभव है जब कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। राज्यसभा में बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफा की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया की यहां निष्पक्ष व सार्थक चर्चा तभी हो सकती है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपना इस्तीफा दे दें। उन्होंने कहा की सरकार को शिक्षा मंत्री का राजीनामा लेना चाहिए। खड़गे, सरकार द्वारा सदन में नीट संबंधी विषय पर चर्चा कराए जाने की बात का जवाब दे रहे थे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीट परीक्षा और उससे जुड़े विवादों पर तुरंत चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी व विपक्ष के अन्य सांसद नियम 267 के तहत सदन में इस विषय पर चर्चा करना चाहते हैं। खड़गे ने कहा कि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया जाता तब तक यहां चर्चा नहीं हो पाएगी। खड़गे ने कहा कि विपक्ष नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा चाहता है और सरकार को पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कराना चाहिए। उनका कहना था कि वे सरकार से निवेदन करते हैं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रर्दशन कर रहे छात्रों को पीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस चर्चा के लिए तैयार हैं और चर्चा से भाग नहीं रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेकर सदन में चर्चा का रास्ता साफ करना चाहिए, तभी इस विषय पर बहस हो सकेगी। विपक्ष का मानना है कि इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना चर्चा का कोई औचित्य नहीं रहेगा। नेता प्रतिपक्ष के इस वक्त के उपरांत सदन में जबरदस्त नारेबाजी होने लगी। वहां आसन पर मौजूद उपसभापति ने सदन को बताया की नियम267 के तहत पूर्व में महत्वपूर्ण निर्णय दिए जा चुके हैं जो कि अभी भी सदन की करवाई पर लागू होते हैं। पूर्व में नियम 267 के तहत दिए गए नोटिसों को स्वीकार कर दिया गया था।
गौरतलब है की नियम 267 के तहत राज्यसभा में सदन की अन्य सभी कार्यवाहियों को स्थगित कर दिया जाता है और जिस विषय पर सभापति को नोटिस दिया जाता है केवल उसी पर चर्चा होती है। इस चर्चा के अंत में वोटिंग प्रावधान भी होता है। कांग्रेस समेत विपक्षी संसद इसी नियम के तहत सदन में तुरंत चर्चा की मांग कर रहे हैं। हालांकि चेयर द्वारा यह स्पष्ट किया गया की पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान विभिन्न सभापतियों ने इस नियम को सामान्य तौर पर अस्वीकार किया और इस संबंध में रूलिंग भी दी जाती रही है।

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Web Title-Fair discussion in the House is possible only when the Education Minister resigns: Kharge
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