नई दिल्ली।
ऑपरेशन सिंदूर ने पूरे विश्व में भारत के प्रति उनके दृष्टिकोण को बदल कर रख दिया है। इस ऑपरेशन ने एकसाथ कई लक्ष्य हासिल किए हैं। भारत को अपने पड़ोसियों के साथ उलझाकर उसको आर्थिक शक्ति बनने से रोकने के दुष्प्रयासों पर भी ऑपरेशन सिंदूर से रोक लग गई है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत उस समय की जब पहलगाम आतंकी हमले में 26 भारतीय नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर नजदीक से मार डाला गया।
इसमें ज़्यादातर भारत के विभिन्न राज्यों से आए पर्यटक थे और सिर्फ एक स्थानीय नागरिक मृतकों में शामिल था। वह टट्टू पर पर्यटकों को घुमाने का काम करता था। यह आतंकी हमला बड़े ही सुनियोजित तरीके से भारत के नागरिकों को उद्वेलित करने की साज़िश के रूप में किया गया था। आतंक की इस हरकत के प्रतिकार में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया। यह अभियान भारत की आतंकवाद-रोधी नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचे पर तेज और लक्षित हमला किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की इस अवधि में प्रशंसा भी हुई और मूल्यांकन भी, जो भारत-पाक संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा की जटिलताओं को दर्शाता है। ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
ऑपरेशन सिंदूर : क्रियान्वयन और उद्देश्य
भारत का मानना था कि इस आतंकी हमले का प्रतिकार संदेशप्रद होना चाहिए—एक ऐसा प्रतिकार जो पाकिस्तान में चल रहे आतंकी नेटवर्क को न केवल धराशायी कर दे, अपितु उन ताकतों के लिए भी बड़ा सबक हो जो भारत में आतंक फैलाने को अपना पुनीत काम समझते हैं। इसीलिए भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया। ये ठिकाने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से संबंधित थे, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पीओके में स्थित थे। भारतीय सशस्त्र बलों ने 23 मिनट के भीतर अत्याधुनिक हथियारों से सटीक हमले किए।
बहावलपुर और मुरिदके जैश और लश्कर के मुख्यालय, और कोटली और मुजफ्फराबाद के रणनीतिक इलाके जहां आतंकी ढांचे मौजूद थे, को मुख्य लक्ष्य बनाया गया। इस बात का भी ध्यान रखा गया कि यह हमले केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित रहें, जिससे नागरिक या पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को नुकसान न पहुंचे और युद्ध जैसी स्थिति से बचा जा सके।
रणनीतिक आधार : भारत की नई नीति
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित बताया—
निर्णायक प्रतिशोध – भारत पर हमला अब तत्काल और सटीक जवाब देगा।
परमाणु धमकी का प्रतिकार – परमाणु हथियारों के डर से भारत अपनी सुरक्षा नीति नहीं बदलेगा।
संवाद की नई परिभाषा – अब पाकिस्तान से बातचीत केवल आतंकवाद और पीओके पर केंद्रित होगी।
भारत सरकार का यह दृष्टिकोण पूर्व की नीतियों से भिन्न है, जिसमें भारत ने रणनीतिक संयम बनाए रखते हुए अपने नागरिकों की रक्षा को प्राथमिकता दी। पहलगाम आतंकी हमले से पूरे देश में गुस्सा था, इसलिए सभी राजनीतिक दलों और आम जन ने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया। यह ऐसा अवसर था जब देश के नागरिक और राजनीतिक दल विचार भिन्नताओं के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और संप्रभुता की रक्षा के लिए एक जगह आ गए।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत के इस उग्र रुख को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई। पूरा विश्व इस बात से आशंकित था कि भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्णकालिक युद्ध शुरू न हो जाए। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम के लिए मध्यस्थता का दावा किया, जिस पर भारत में बहस छिड़ गई। भारत ने स्पष्ट तौर पर बता दिया कि भारत पाकिस्तान के मामले में किसी की भी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता है और न ही करेगा। हालांकि चीन और रूस दोनों ने संयम की अपील की और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया। विश्व समुदाय की प्रतिक्रिया मिश्रित थी, फिर भी भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को अधिकतर देशों ने व्यापक स्तर पर स्वीकार किया।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और तनाव की आशंका
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में 'ऑपरेशन बुनियान अल-मरसूस' शुरू किया, जिसमें भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। दोनों पक्षों के बीच तोपखाने की गोलीबारी और ड्रोन युद्ध हुए। अंततः 10 मई 2025 को कूटनीतिक हस्तक्षेप और गुप्त वार्ताओं के बाद युद्धविराम हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और चुनौतियों को लेकर देश में बहस चल रही है, हालांकि इसमें किसी को संशय नहीं है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान में चल रहे आतंकी ढांचे को ध्वस्त कर दिया है और वह पूरे विश्व को यह संदेश देने में सफल रहा है कि भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सैन्य क्षमता ने न केवल अपने नागरिकों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, अपितु पूरे विश्व को भी चौंकाया है। यह अपने आप में गर्व की बात है कि ऑपरेशन सिंदूर में प्रयोग किए गए सैन्य उपकरणों और प्रणालियों की पूरे विश्व से मांग आ रही है। भारत के रक्षा उत्पादन में लगी कंपनियों को झोले भर भर कर आपूर्ति के लिए आदेश मिल रहे हैं। यह भारत के लिए संभावना है—पहले भारत रक्षा प्रणालियां और उपकरण आयात करता था, अब वह विश्व का प्रमुख निर्यातक बनने की ओर कदम बढ़ा चुका है।
यह भी गौरतलब है कि भारत ने पूरे विश्व को यह समझा दिया है कि भारत किसी भी हालत में परमाणु युद्ध की कगार तक तनाव को नहीं पहुँचने देगा, लेकिन खासतौर पर पाकिस्तान को यह भी बता दिया है कि भारत परमाणु बम की ब्लैकमेलिंग को अस्वीकार करता है। यही भारत की नीति है।
प्रधानमंत्री मोदी की नीति
प्रधानमंत्री मोदी का निर्णय एक आक्रामक लेकिन संतुलित सुरक्षा नीति को दर्शाता है। आलोचकों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ तनाव बढ़ा सकती हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर की सीमित और सटीक प्रकृति इंगित करती है कि यह एक संतुलित, रणनीतिक निर्णय था।
इस पूरे ऑपरेशन में जो विशेष बात थी, वह यह थी कि देश को युद्धोन्माद से बचाना और नागरिकों के बीच आपसी विश्वास को बनाए रखना। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत में समाचार चैनलों ने इस तरह का माहौल बनाया जिससे पूरा देश आंदोलित हो गया, लेकिन भारत सरकार ने समय पर कार्यवाही करते हुए न केवल समाचार चैनलों को अतिवादी रिपोर्टिंग करने से रोका, अपितु सेना और विदेश मंत्रालय की तरफ से भारत की रणनीतिक संप्रेषण नीति को रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस से प्रसारित किया। जिनमें वरिष्ठ अधिकारी जैसे कमोडोर रघु आर. नायर, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह शामिल रहीं। प्रेस वार्ताओं में आतंकियों पर लक्षित हमलों की जानकारी दी गई, जिसमें नागरिकों को हानि न पहुँचाने की रणनीति भी स्पष्ट की गई।
एयर मार्शल ए.के. भारती ने भारतीय रक्षा प्रणाली जैसे ‘आकाश मिसाइल’ के उपयोग का उल्लेख कर भारत की आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया। महिला अधिकारियों की भागीदारी ने प्रगतिशील सैन्य नेतृत्व की छवि भी प्रस्तुत की।
भारत और पाकिस्तान की प्रेस रणनीतियों में स्पष्ट अंतर था। भारत की स्पष्ट, समन्वित और सशक्त संप्रेषण नीति ने उसके कदमों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैधता दिलाई, जबकि पाकिस्तान की प्रतिक्रियात्मक और अस्पष्ट नीति उसकी स्थिति को कमजोर करती दिखी। इज़राइल और तुर्की जैसी शक्तियों ने अपनी मित्रता को आगे रखा। उनकी प्रतिक्रियाओं ने यह दिखाया कि क्षेत्रीय संघर्षों में वैश्विक गठबंधन और रणनीतिक संप्रेषण की भूमिका कितनी अहम होती है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी रक्षा में अब और संकोच नहीं करेगा। यह नीति भविष्य की कार्रवाइयों के लिए एक आधारशिला बन सकती है।
डॉ. राज मोंगिया
पूर्व वायुसेना अधिकारी
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