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संसद में नागरिकता बिल पर बोले अमित शाह- कांग्रेस जैसी पार्टी हमने नहीं देखी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 पेश किया। विपक्षी दलों ने इसे बुनियादी तौर पर असंवैधानिक बताया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करार देते हुए विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई। विधेयक की वैधानिकता पर एक घंटे की बहस हुई, जिसमें जांचा-परखा गया कि विधेयक पर चर्चा हो सकती है या नहीं। निचले सदन में इसके पक्ष में 293, जबकि विपक्ष में कुल 82 मत पड़े। विधेयक के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि विधेयक भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं करता है और किसी भी नागरिक को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा।

शाह ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को उचित वर्गीकरण के आधार पर विधेयक में जगह दी गई है। उन्होंने कहा कि विधेयक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीडऩ के कारण भाग रहे हिंदुओं, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्धों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करना चाहता है। मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान का विश्लेषण करने के बाद विधेयक पेश किया गया है। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1950 में हुए नेहरू-लियाकत समझौते का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसका पालन सिर्फ भारत ने किया। जबकि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैनों और बौद्धों को प्रताडऩा का सामना करना पड़ा।

अपडेट

- अमित शाह ने कहा, जो पार्टी बोट बैंक के लिए घुसपैठियों को शरण देना चाहता है, हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे। रोहिंग्या को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।


- अमित शाह ने कहा, किसी भी रिफ्यूजी पॉलिसी को भारत ने स्वीकार नहीं किया है। पारसी भी प्रताड़ित होकर ईरान से भारत आए थे, कांग्रेस ने जिन्ना की टू नेशन थ्योरी क्यों मानी?

- अमित शाह ने कहा, नागरिकता संशोधन बिल किसी भी धर्म के प्रति भेदभाव नहीं करता है। यह बिल एक सकारात्मक भाव लेकर आया है उन लोगों के लिए जो भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित है। प्रताड़ित शरणार्थी होता है, घुसपैठिया नहीं होता। बिल में संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 का उल्लंघन नहीं है।


- अमित शाह ने कहा, 1947 में पाकिस्तान में 23 फीसदी हिंदू थे मगर वहीं साल 2011 में ये आकंड़ा घटकर 3.4 फीसदी रह गए। पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए भारत मूकदर्शक नहीं बन सकता।


- अमित शाह ने कहा, देश में भ्रम की स्थिति नहीं बने। किसी भी प्रकार से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है। न ही ये बिल अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। हमारे देश का धर्म के आधार पर विभाजन हुआ था। देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो अच्छा होता। इसके बाद इस बिल को लेकर आने की जरूरत हुई।

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Web Title-Citizenship Amendment Bill : Know home minister Amit Shah full statement in lok sabha
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