• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

बजट 2026 : चाबहार बंदरगाह के लिए भारत ने नहीं दिया एक भी रुपया, क्या अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में ठप हो जाएगा प्रोजेक्ट?

Budget 2026: India has not allocated a single rupee for the Chabahar port; will the project be stalled due to pressure from US sanctions - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली | केंद्रीय बजट 2026 के आंकड़ों ने विदेश नीति के जानकारों को चौंका दिया है। सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) के लिए इस साल के बजट में कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई है। जबकि पिछले साल के बजट में भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। बजट में इस कटौती के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट रहा है? चाबहार प्रोजेक्ट पर 'ब्रेक' लगने के 3 मुख्य कारण विशेषज्ञों का मानना है कि चाबहार की धीमी रफ्तार और अब फंड की कमी के पीछे कई जटिल कारक जिम्मेदार हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों का साया (US Sanctions)
ईरान पर अमेरिका के कड़े आर्थिक प्रतिबंध भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहे हैं। हालांकि, भारत को चाबहार के लिए कुछ छूट मिली थी, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के बदलते रुख और प्रतिबंधों की अनिश्चितता के कारण बैंक और उपकरण आपूर्ति करने वाली कंपनियां इस प्रोजेक्ट में शामिल होने से कतरा रही हैं।
क्षेत्रीय अस्थिरता और बदलती भू-राजनीति
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ता तनाव और इज़राइल-ईरान के बीच की तनातनी ने इस क्षेत्र में निवेश के जोखिम को बढ़ा दिया है। भारत अब अपने निवेश को लेकर 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की स्थिति में है।
आईएमईसी (IMEC) का प्रभाव
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की घोषणा के बाद भारत का ध्यान वैकल्पिक रास्तों पर भी गया है। हालांकि चाबहार मध्य एशिया तक पहुँचने का गेटवे है, लेकिन नए गलियारों के आने से इसकी प्राथमिकता पर चर्चा शुरू हो गई है।
सामरिक महत्व : क्यों जरूरी है चाबहार?
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए केवल एक व्यापारिक रूट नहीं, बल्कि एक सामरिक हथियार है।
पाकिस्तान को बायपास करना : इसके जरिए भारत बिना पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच सकता है।
चीन के ग्वादर को जवाब : पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित ग्वादर बंदरगाह के मुकाबले चाबहार भारत की पकड़ को मजबूत करता है।
INSTC प्रोजेक्ट : यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का मुख्य हिस्सा है, जो रूस और यूरोप तक कनेक्टिविटी देता है।
क्या यह प्रोजेक्ट पूरी तरह ठप हो जाएगा?
बजट में फंड न होने का मतलब यह नहीं है कि प्रोजेक्ट खत्म हो गया है। जानकारों का कहना है-हो सकता है कि पिछले साल का आवंटित फंड अभी पूरी तरह खर्च न हुआ हो।
भारत अब सरकारी बजट के बजाय 'इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड' (IPGL) के माध्यम से निजी निवेश या इंटरनल रिसोर्सेज पर जोर दे रहा हो।
चाबहार के लिए फंड आवंटित न करना भारत की विदेश नीति में एक रणनीतिक मोड़ की ओर इशारा करता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत आने वाले महीनों में अमेरिका के साथ किसी विशेष समझौते के जरिए इस प्रोजेक्ट को दोबारा पुनर्जीवित करता है या फिर यह क्षेत्रीय राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-Budget 2026: India has not allocated a single rupee for the Chabahar port; will the project be stalled due to pressure from US sanctions
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: chabahar port budget 2026, india iran relations, us sanctions on iran, instc project, india investment in chabahar, geopolitics of middle east, shahid beheshti port\r\n, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, delhi news, delhi news in hindi, real time delhi city news, real time news, delhi news khas khabar, delhi news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved