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अनुच्छेद 370 : सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के नेता से भारत की संप्रभुता, संविधान के प्रति निष्ठा की पुष्टि करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा

Article 370: Supreme Court asks the leader of Jammu and Kashmir to file an affidavit confirming Indias sovereignty and allegiance to the Constitution. - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन से एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें पुष्टि की गई हो कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वह भारत के संविधान का पालन करता है और उसके प्रति निष्ठा रखता है। अकबर लोन अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं में मुख्य याचिकाकर्ताओं में से एक हैं। संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा, “वह (अकबर लोन) हमारी अदालत में आए हैं, हम उनकी दलीलें सुनने के लिए बाध्य हैं। जम्मू-कश्मीर में सभी राजनीतिक दलों के लोगों ने हमारे सामने प्रतिद्वंद्वी दृष्टिकोण पेश किया, जो स्वागत योग्य है... लेकिन वे सभी एक भावना के साथ यहां आए हैं कि वे भारत की अखंडता का पालन करते हैं।”
संविधान पीठ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के नेता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया है और इसलिए उन्‍हें आवश्यक रूप से संविधान के प्रति निष्ठा का पालन करना चाहिए।"
अकबर लोन का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने भारत की संप्रभुता को चुनौती नहीं दी है और शुरुआत में उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
सिब्बल ने कहा, “याचिकाकर्ता ने अगर पहले कुछ कहा है, किन परिस्थितियों में उन्‍होंने यह कहा है, क्या यह रिकॉर्ड किया गया है। आप उनसे हलफनामा मांगें। मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है।''
इस पर पीठ ने पूछा, "क्या हम यह मान लें कि लोन बिना शर्त भारत की संप्रभुता स्वीकार करते हैं और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।"
जवाब में सिब्बल ने कहा कि अकबर लोन संसद के सदस्य हैं और उन्होंने भारत के संविधान की शपथ ली है। “वह भारत का नागरिक हैं। वह अन्यथा कैसे कह सकते हैं? अगर किसी ने गलत कहा है तो मैं इसकी निंदा करता हूं।''
संविधान पीठ ने कहा, "हम उनसे यह चाहते हैं कि वह बिना शर्त स्वीकार करें कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और संविधान का पालन करते हैं और उसके प्रति निष्ठा रखते हैं।"
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि लोन "अलगाववादी तत्वों" का समर्थन करते हैं।
मेहता ने कहा, “उन्हें यह कहने दीजिए कि वह अलगाववाद और आतंकवाद का समर्थन नहीं करते हैं। इस देश के किसी भी नागरिक को हलफनामा दाखिल करने में कोई आपत्ति नहीं हो सकती।”
सिब्बल ने आरोप लगाया कि केंद्र कानूनी प्रस्तुतियों को पटरी से उतार रहा है। उन्‍होंने कहा, “अगर मैं दोबारा गिनाना शुरू कर दूं, तो क्या हुआ होगा। इससे अनावश्यक रूप से केवल मीडिया कवरेज को बढ़ावा मिलेगा। हम एक शुद्ध संवैधानिक मुद्दे पर बहस कर रहे हैं। जब यह कथित तौर पर हुआ, तब भाजपा के एक अध्यक्ष (विधानसभा के) वहां मौजूद थे... आप क्यों चाहते हैं कि मैं इसमें जाऊं? यह रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है, इसे वापस ले लिया गया है और रिकॉर्ड से हटा दिया गया है।”
सिब्बल ने यह कहकर बचाव किया कि कोई भी पद की शपथ लिए बिना लोकसभा का सदस्य नहीं बन सकता। वह भारत के संविधान का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा में प्रवेश से पहले सदस्य को शपथ लेनी होती है।
संविधान पीठ ने दोहराया कि वह मुख्य याचिकाकर्ता से केवल एक पेज का छोटा हलफनामा मांग रही है।
इस पर सिब्बल ने कहा, ''अगर वह नहीं देंगे तो मैं यहां बहस नहीं करूंगा। मैंने प्रतिबद्धता जताई कि एक हलफनामा दाखिल होगा।”
इससे पहले दिन में, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संविधान पीठ के समक्ष अनुरोध किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को एक हलफनामा दाखिल करना चाहिए कि वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद और अलगाववाद का विरोध करते हैं।
एसजी मेहता ने कहा कि अगर शीर्ष अदालत के ध्यान में मामला लाए जाने के बाद अकबर लोन को हलफनामा दाखिल करने के लिए नहीं कहा गया, तो यह "दूसरों को प्रोत्साहित कर सकता है" और "राष्ट्र के प्रयासों को (केंद्र शासित प्रदेश में) सामान्य स्थिति में लाने के लिए" विफल हो सकता है।"
संविधान पीठ को एक 'चौंकाने वाला' तथ्य बताया गया कि लोन ने कथित तौर पर विधानसभा में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे और खुद को भारतीय बताने में झिझक रहे थे। यह भी दावा किया गया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने कहा था कि भारत के साथ जम्मू-कश्मीर का विलय पूरा नहीं हुआ है।
आईएएनएस

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