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महिला आरक्षण : 543 सीटों पर अभी लागू हो कानून, विपक्ष ने परिसीमन की शर्त को बताया संवैधानिक षड्यंत्र

Women Reservation: Law Should Be Implemented on All 543 Seats Immediately - Chandigarh UT News in Hindi

नई दिल्ली। वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों से सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) अब विवादों के केंद्र में है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि आरक्षण को जनगणना और परिसीमन (Delimitation) से जोड़कर इसे अनिश्चितकाल के लिए लटकाने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर है, तो इसे मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर वर्ष 2029 के चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए। तकनीकी दांव-पेंच या टालने की रणनीति? विपक्ष का तर्क है कि जब यह बिल अब संविधान का हिस्सा बन चुका है, तो इसे लागू करने के लिए लंबी प्रतीक्षा क्यों?
मौजूदा सीटों पर मांग: जानकारों और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को तकनीकी जटिलताओं के बजाय वर्तमान सीटों के आधार पर ही 33% कोटा सुनिश्चित करना चाहिए।
2014 और 2019 का हवाला: सरकार पर तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि जब भाजपा के पास पिछले दो कार्यकाल में प्रचंड बहुमत था, तब इस बिल को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?
राहुल गांधी के गंभीर आरोप: 'ओबीसी विरोधी और एंटी-नेशनल'लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बिल के वर्तमान स्वरूप को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे "महिलाओं के साथ छलावा" करार दिया है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
OBC आरक्षण का अभाव: राहुल गांधी के अनुसार, यह बिल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के हितों के खिलाफ है क्योंकि इसमें उनके लिए अलग से कोटे का प्रावधान नहीं है।
संघीय ढांचे पर खतरा: विपक्ष का दावा है कि यह बिल दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के खिलाफ है, क्योंकि परिसीमन के बाद क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ने का खतरा है।
देश को बांटने की कोशिश: विपक्ष ने इसे 'एंटी-नेशनल' बताते हुए कहा कि सरकार आरक्षण की आड़ में देश को उत्तर और दक्षिण के बीच बांटने का काम कर रही है।
वास्तविक सशक्तिकरण की मांग
प्रधानमंत्री से निवेदन करते हुए विपक्ष ने मांग की है कि सरकार "असंवैधानिक तरकीबों" का इस्तेमाल बंद करे।
सुझाव: पहले मौजूदा सीटों पर 33% आरक्षण लागू हो, और भविष्य में जब भी जनगणना या परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो, तब नए आंकड़ों के आधार पर इसे अपडेट कर दिया जाए।
न्याय की अपील: देश की आधी आबादी के साथ न्याय तभी होगा जब आरक्षण कागजों से निकलकर संसद की सीटों तक पहुँचेगा।
महिला आरक्षण के नाम पर चल रही यह खींचतान अब 'क्रेडिट वॉर' से आगे निकलकर संवैधानिक वैधता की लड़ाई बन गई है। जनता की नजर अब इस पर है कि क्या सरकार विपक्ष की मांग को स्वीकार कर परिसीमन की शर्त में ढील देगी या आरक्षण के लिए महिलाओं को अभी और लंबा इंतजार करना होगा।

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Web Title-Women Reservation: Law Should Be Implemented on All 543 Seats Immediately
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