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पीजीआई में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, डयूटी पर लौटे कर्मचारी

Strike of outsourced employees ends in PGI, employees return to duty - Chandigarh UT News in Hindi

चंडीगढ़। पीजीआई में अस्पताल परिचारकों, सफाई परिचारकों और वाहकों सहित आउटसोर्स कर्मचारी अपने एरियर की मांग को लेकर सात दिनों से हड़ताल पर थे। लेकिन, कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को सभी हड़ताल खत्म कर सुबह अपनी अपनी तय विभागों में डयूटियों पर लौट आए। हड़ताल के खत्म होने पर संस्थान प्रबंधन ने आज राहत की सांस ली। हड़ताल के चलते ओपीडी में नए मरीजों का पंजीकरण प्रबंधन ने बंद कर दिया था। वहीं, मात्र सुबह दो घंटे पुराने मरीजों का पंजीकरण किया जा रहा था। इसके साथ पहले से किए गए सारे आनलाइन पंजीकरण रद्द कर दिए गए थे। ऐसे में हड़ताल के चलते इमरजेंसी मे बोझ देखने को मिला। पीजीआई में हर दिन इलाज के लिए करीब 12 हजार नए मरीजों का आते हैं। ऐसे में सात दिनों तक हड़ताल व नए पंजीकरण न होने के चलते करीब हजारों मरीजों को बिना इलाज मजबूरी में घर लौटना पड़ा। गुरुवार को वाल्मीकि जयंती की छुट्टी होने के चलते मात्र दो घंटे ओपीडी चालू रही, जिसमें पुराने 2788 मरीजों को इलाज मिला। शुक्रवार से पीजीआई में पहले की तरह मरीजों को बिना परेशानी के इलाज मिलेगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीआई में चल रही अनुबंध कर्मियों हड़ताल को खत्म करने को लेकर आदेश दिए थे। आर्डर होने के बावजूद कर्मचारी हड़ताल जारी रखने की बात करते रहे। वहीं, वीरवार की सुबह कुछ कर्मचारी अपने काम पर लौट गए।
पीजीआई में अटेंडेंट व सफाई कर्मियों की हड़ताल से अस्पताल में स्वच्छता और सफाई व्यवस्था खतरे में पड़ने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल पर बुधवार को रोक लगाते हुए कर्मियों को तुरंत काम पर लौटने के आदेश दिया थे। इसके साथ काम पर वापस न लौटने पर चंडीगढ़ प्रशासन व पीजीआई प्रबंधन को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा अस्पताल अनिवार्य क्षेत्र है और इसके कर्मचारी सेवा विवाद के चलते काम से गैर मौजूद नहीं रह सकते।
पीजीआई में रेंजीडेंट चिकित्सकों ने एक दिन हड़ताल के बाद दूसरे दिन अपनी हड़ताल को खत्म कर दिया था और वार्डों एवं एमरजेंसी में अपनी सेवाएं शुरू कर मानवता की सेवा को जारी की। पीजीआई में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद गुरुवार को कुल 240 सफाई परिचारक, 156 अस्पताल परिचारक और 53 वाहक आज अपनी निर्धारित शिफ्ट में ड्यूटी पर आए। उक्त जानकारी पीजीआई के प्रवक्ता ने दी। सात दिवसीय हड़ताल के दौरान, पीजीआई प्रबंधन ने यह सुनिश्चित किया कि नियमित कर्मचारियों और विश्व मानव रूहानी केंद्र, सुख फाउंडेशन, रोटारैक्ट और राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयंसेवकों जैसे स्वैच्छिक संगठनों की सहायता से महत्वपूर्ण सेवाएं जारी रहें।
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अनिश्चितता के इस दौर में आगे आने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। हम हड़ताल के दौरान उनके अटूट समर्थन और बिना शर्त सेवा के लिए स्वैच्छिक संगठनों और एनएसएस स्वयंसेवकों के बहुत आभारी हैं। यह सुनिश्चित करने में उनका योगदान अमूल्य रहा है कि हमारी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं चालू रहें। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उनका समर्पण वास्तव में सराहनीय है, और हम उनके प्रयासों की गहराई से सराहना करते हैं।
प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक ने हड़ताल अवधि के दौरान प्रदान की गई सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया कि हड़ताल से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, हम बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में कुल 32,555 रोगियों की जांच करने में सफल रहे, जबकि आपातकालीन और ट्रॉमा ओपीडी में 2,023 मामले देखे गए। इस दौरान 1,485 रोगियों को इनडोर देखभाल के लिए भर्ती कराया गया, जिनमें से 1,892 को सफलतापूर्वक छुट्टी दे दी गई। इसके अतिरिक्त, 409 सर्जरी और 157 कैथ प्रक्रियाएं की गईं, जो संस्थान की व्यापक नैदानिक सेवाओं को दर्शाती हैं।
इसके अलावा, 78 प्रसव और 699 डे केयर कीमोथेरेपी सत्र पूरे किए गए, जो विभिन्न विषयों में रोगी देखभाल और उपचार में पीजीआई की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। प्रो. कौशल ने उन कर्मचारियों की भी सराहना की जिन्होंने काम करना जारी रखा और महत्वपूर्ण सेवाओं को चालू रखने में मदद की।
अब हड़ताल खत्म होने के बाद पीजीआई 18 अक्तूूबर से नए और अनुवर्ती मामलों, वैकल्पिक सेवाओं और प्रवेश दोनों के लिए सुबह 8 बजे से 11 बजे तक ओपीडी पंजीकरण सहित पूर्ण सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। आपातकालीन, ट्रॉमा और आईसीयू सेवाएं हमेशा की तरह काम करेंगी। संस्थान यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हड़ताल के दौरान बना बैकलॉग तेजी से साफ हो जाए और सभी मरीजों को वह उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल मिले जिसकी वे पीजीआई से उम्मीद करते हैं।

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