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प्रेमलता की मांग: स्थानीय लोगों को मिले नौकरियों में आरक्षण, डोमिसाइल नीति लागू हो

Premlata demand: Local people should get reservation in jobs, domicile policy should be implemented - Chandigarh UT News in Hindi

चंडीगढ़। चंडीगढ़ की सरकारी नौकरियों में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। पार्षद और आम आदमी पार्टी महिला विंग की अध्यक्ष प्रेमलता ने चंडीगढ़ प्रशासन से अपील की है कि केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) को अपनी नौकरियों में पात्रता को केवल चंडीगढ़ के अधिवासियों (Domiciles) तक सीमित करने वाली एक स्पष्ट डोमिसाइल नीति लागू करनी चाहिए। प्रेमलता ने संविधान के प्रावधानों और अन्य राज्यों के उदाहरणों का हवाला देते हुए अपनी मांग को पुख्ता किया। उन्होंने बताया कि हालांकि संविधान के अनुच्छेद 16(1) और 16(3) में अंतर है, लेकिन अनुच्छेद 16(3) केवल निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य द्वारा आरक्षण को प्रतिबंधित करता है, न कि स्थानीय कैडर में। उन्होंने विशेष रूप से अनुच्छेद 371 का उल्लेख किया, जो राज्यों को निर्दिष्ट क्षेत्रों में "स्थानीय कैडर की सीधी भर्ती" करने का अधिकार देता है। प्रेमलता ने अपनी बात के समर्थन में कई राज्यों के उदाहरण प्रस्तुत किए:- उत्तराखंड: यहाँ कक्षा III और कक्षा IV की नौकरियां उन स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो कम से कम 15 वर्षों तक वहां रहे हों।
असम: असम सरकार ने भी केवल अपने अधिवासियों को राज्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का निर्णय लिया है।
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में केवल वे स्थानीय निवासी ही राज्य की नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं जो मराठी में धाराप्रवाह हों, राज्य में अधिवासित हों और 15 वर्षों से अधिक समय से वहां रह रहे हों।
जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले सभी सरकारी नौकरियां राज्य के विषयों के लिए आरक्षित थीं। अब भी सरकारी नौकरियां अधिवासियों के लिए आरक्षित हैं, जहाँ 15 वर्षों तक राज्य में रहा व्यक्ति या सात वर्षों तक पढ़ाई कर कक्षा 10 और 12 की परीक्षा वहां से पास करने वाले भी अधिवासी माने जाते हैं।
अरुणाचल प्रदेश: जहाँ 100% आबादी जनजातीय है, वहां की सरकार केवल जनजातियों को 80% आरक्षण प्रदान करती है।
मेघालय: यहाँ केवल तीन समुदाय - खासी, जयंतिया और गारो हैं, और सरकार इन समुदायों को 80% आरक्षण प्रदान करती है।
अन्य राज्य: आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्य भी अपने अधिवासियों को राज्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
प्रेमलता ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि चंडीगढ़ के निवासी ठगा हुआ महसूस करते हैं, क्योंकि वे दशकों से यहां रह रहे हैं और शहर के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे रहे हैं। लेकिन जब उनके बच्चों के लिए नौकरियों की बात आती है, तो उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिलती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है, फिर भी ये दोनों राज्य चंडीगढ़ के निवासियों को अपना नहीं मानते। इस दृष्टिकोण से, प्रेमलता ने तर्क दिया कि यदि चंडीगढ़ के अधिवासित नागरिकों के लिए यूटी कैडर की नौकरियों में आरक्षण प्रदान नहीं किया गया, तो यह उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। उनकी इस मांग से चंडीगढ़ में स्थानीय नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।

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Web Title-Premlata demand: Local people should get reservation in jobs, domicile policy should be implemented
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