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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रखी स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताएँ, पब्लिक हेल्थ नीतियों की माँग तेज़

Indian Medical Association outlines health sector priorities, demands for public health policies intensify - Chandigarh UT News in Hindi

चंडीगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अकादमिक शाखा आईएमए एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशियलिटीज़ ने वार्षिक सम्मेलन एमस्कैन के मौके अपनी प्रमुख राष्ट्रीय पहल और नीतिगत चिंताओं को उजागर किया। करीब 19,000 पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर सदस्यों वाली यह संस्था पूरे वर्ष देशभर में मेडिकल एजुकेशन, सेमिनार, पैनल चर्चा, वर्कशॉप और फेलोशिप कार्यक्रमों का संचालन करती है। इसकी वार्षिक प्रकाशित पत्रिका ऐन्ल्स का इस बार का थीम एडल्ट वैक्सीनेशन, विशेषकर एचवी पी वैक्सीनेशन, पर केंद्रित है। संस्थान ने पोलियो उन्मूलन, टीबी खत्म करने के प्रयास, कोविड-19 प्रतिक्रिया रणनीति और नागरिकों को सीपीआर प्रशिक्षण जैसे अपने प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों को भी रेखांकित किया। उनका फ्लैगशिप कार्यक्रम “आओ गाँव चलें” अब भी देशभर में कई गाँवों और शहरी मलिन बस्तियों को गोद लेकर स्वास्थ्य जागरूकता व प्राथमिक सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भनुशाली ने कहा, “आईएमए हमेशा से सार्वजनिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर अग्रणी रहा है। नागरिकों के लिए CPR ट्रेनिंग और अब HPV वैक्सीनेशन ट्रेनिंग कार्यक्रम असंख्य जीवन बचाएंगे। हम सरकार से स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर GDP का कम से कम 5% करने की अपील करते हैं, ताकि ढाँचा मजबूत हो और जेब से होने वाला अत्यधिक खर्च कम हो सके।” उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा और कुछ आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं पर GST हटाने के निर्णय का IMA स्वागत करता है। IMA ने मिक्सोपैथी—अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के अवैज्ञानिक मिश्रण—पर भी गंभीर चिंता जताई।
IMA के तत्काल पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर. वी. असोकन ने कहा “हम हर चिकित्सा पद्धति का सम्मान करते हैं, लेकिन अवैज्ञानिक एकीकरण का विरोध करते हैं। JIPMER का प्रस्तावित इंटीग्रेटेड MBBS-BAMS कोर्स मरीजों की सुरक्षा के लिहाज़ से अनुचित है। हर पद्धति को अपनी वैज्ञानिक शुचिता बनाए रखनी चाहिए।” उन्होंने मेडिकल शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई कि “NEET की कई समस्याएँ तुरंत दूर की जानी चाहिए। बांड प्रणाली समाप्त होनी चाहिए और युवा डॉक्टरों के लिए कार्य परिस्थितियाँ बेहतर होनी चाहिए।” स्वास्थ्यकर्मियों पर बढ़ती हिंसा को लेकर भी IMA ने कठोर केंद्रीय कानून की माँग दोहराई।
डॉ. भनुशाली ने कहा, “कार्यस्थल पर सुरक्षा हर दिन की चिंता है। हमें हिंसा रोकने के लिए मजबूत केंद्रीय कानून चाहिए। क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट अपनी मौजूदा रूपरेखा में छोटे अस्पतालों पर अनावश्यक बोझ डालता है—50 बेड से कम वाली इकाइयों को इससे मुक्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने चिकित्सा पेशे को कंज़्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट से बाहर रखने की अपील करते हुए कहा कि मेडिकल नेग्लिजेंस को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। “इसके लिए एक अलग मेडिकल मालप्रैक्टिस एक्ट बनाया जाए, जिसमें क्षतिपूर्ति की सीमा तय हो,” उनका कहना था।
करीब 4 लाख सदस्यों वाले IMA ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों को आकार देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होनी ही चाहिए। “IMA सरकार और जनप्रतिनिधियों के साथ रचनात्मक संवाद के लिए तत्पर है। हम जनता के स्वास्थ्य और डॉक्टरों की गरिमा व सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हैं,” डॉ. भनुशाली ने कहा।
IMA AMS के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. रमनिक बेदी ने अकादमिक दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य निरंतर मेडिकल शिक्षा को मजबूत करना और विशेषज्ञ डॉक्टरों को उन्नत कौशल प्रदान करना है। Annals में एडल्ट वैक्सीनेशन—विशेषकर HPV—पर केंद्रित थीम इसी वैज्ञानिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। AMSCON इस वर्ष देशभर से आए प्रतिभागियों के लिए उत्कृष्ट अकादमिक मंच प्रदान कर रहा है।”

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Web Title-Indian Medical Association outlines health sector priorities, demands for public health policies intensify
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