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श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा कृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास, संतों के सम्मान और प्रभु स्मरण का दिया संदेश

Shrimad Bhagwat Katha Fourth Day Marked by Krishna Janmotsav Celebrations and Message of Divine Remembrance - Bhagalpur News in Hindi

स्नोखर भागलपुर। श्रीधाम वृंदावन से पधारे परम पूज्य अध्यात्म कथा प्रवक्ता राष्ट्रीय संत पंडित बाल प्रभुजी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ कथा श्रवण किया। कथा के दौरान पूज्य महाराज ने भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन करते हुए कहा कि परमात्मा प्रत्येक युग में धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने बताया कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में भगवान की प्राप्ति के लिए कठोर तप, यज्ञ और साधना का मार्ग अपनाना पड़ता था, लेकिन कलयुग में प्रभु को पाने का सबसे सरल उपाय उनका नाम स्मरण, चिंतन और भजन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल इतना प्रयास करना चाहिए कि उसका संबंध परमात्मा से सदैव मजबूत बना रहे। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, उसकी पुकार प्रभु अवश्य सुनते हैं और उसके कल्याण के लिए स्वयं उपस्थित होते हैं।

गजेंद्र मोक्ष प्रसंग से दिया भक्ति का संदेश

कथा के दौरान पूज्य महाराज ने गजेंद्र मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब गजेंद्र ग्राह के चंगुल में फंस गया और अपनी समस्त शक्ति खो बैठा, तब उसने पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान को पुकारा। भक्त की पुकार सुनकर भगवान तत्काल उसकी रक्षा के लिए पहुंचे। महाराज ने कहा कि भगवान ने केवल गजेंद्र का ही नहीं बल्कि ग्राह का भी उद्धार किया, जिससे यह संदेश मिलता है कि प्रभु की कृपा सभी जीवों पर समान रूप से होती है।

गरुड़ के अभिमान का किया उल्लेख

कथा में भगवान के वाहन गरुड़ के अभिमान का प्रसंग भी सुनाया गया। पूज्य महाराज ने बताया कि जब गरुड़ को अपने सामर्थ्य का अभिमान हो गया, तब भगवान ने उनका अभिमान दूर कर उन्हें विनम्रता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों को कभी अहंकार में नहीं रहने देते और समय-समय पर उन्हें सही मार्ग का बोध कराते हैं।
धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं भगवान
पूज्य महाराज ने कहा कि जब-जब संसार में धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धरती पर आते हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि मनुष्य में उन्हें पहचानने की क्षमता और श्रद्धा हो। भगवान सदैव अपने भक्तों के कल्याण और धर्म की स्थापना के लिए कार्य करते हैं।

भगवान राम की मर्यादाओं को अपनाने का आह्वान

कथा के दौरान भगवान श्रीराम के पावन वंश और उनके आदर्श जीवन का भी वर्णन किया गया। पूज्य महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान राम की मर्यादाओं को अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भगवान राम के जीवन में संतों, ब्राह्मणों, माता-पिता और समाज के प्रत्येक वर्ग का सम्मान सर्वोपरि था।
उन्होंने कहा कि जिस घर और समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां भगवान स्वयं निवास करते हैं। इसलिए समाज में सदैव सम्मान, सदाचार और मर्यादा का वातावरण बनाए रखना चाहिए।

कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु

कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे ही कृष्ण जन्म का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ जन्मोत्सव का आनंद लिया और भक्ति रस में सराबोर हो गए।
"नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। भक्तजन भगवान के जन्मोत्सव में नृत्य और भजन-कीर्तन करते हुए आनंदमग्न दिखाई दिए। ठाकुरजी के जयकारों और मंगल गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने दिव्य उत्सव का आनंद प्राप्त किया।

कथा स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

चतुर्थ दिवस की कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान भक्तों ने एकाग्रचित्त होकर भगवान की लीलाओं का श्रवण किया और भक्ति भाव से ओतप्रोत वातावरण में आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। कथा के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

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Web Title-Shrimad Bhagwat Katha Fourth Day Marked by Krishna Janmotsav Celebrations and Message of Divine Remembrance
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