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हम को हम रहने दें, मैं नहीं बनाएँ, यूं ही कट जाएगा सफर साथ चलने से

Let us be us, donot make me, the journey will be spent by walking together - Relationship

पति-पत्नी को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। यह सम्बन्ध भरोसे पर टिका होता है। पति को इस बात की आजादी नहीं है कि वह जैसा चाहे, वैसा आचरण कर लेगा। पत्नी को भी हर बार खुद को ही दोषी नहीं मानना चाहिए। वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी एक समान होते हैं। इस रिश्ते को बनाए रखने की जिम्मेदारी दोनों की है।


वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच भरोसा नहीं होगा तो ये रिश्ता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएगा। स्त्री और पुरुष दोनों ही समान हैं। इस रिश्ते को बनाए रखने के लिए पति-पत्नी की समान जिम्मेदारी होती है। पुरुष होने का अर्थ ये नहीं है कि वह कैसा भी आचरण कर सकता है और स्त्री होने का अर्थ ये नहीं है कि हर बार वह खुद को ही दोष मानती रहे।


किसी भी रिश्ते को बनाने से ज़्यादा मुश्किल होता है संभालना और निभाना। इसके लिए प्रेम तो चाहिए, साथ ही भावनात्मक परिपक्वता भी चाहिए। इस परिपक्वता के साथ वो ख़ूबियां आती हैं जो हर रिश्ते में होनी ही चाहिए।

जब दाम्पत्य जीवन में "हम" की जगह "मैं" ले लेता है तो रिश्ते की नैया डगमगाने लगती है और क्लेश होना रोज की बात हो जाती है। लेकिन यदि पति-पत्नी दोनों ही थोडी सी सूझ-बूझ और धैर्य से काम लें तो उनका रिश्ता एक खूबसूरत मोड लेकर दूसरों के लिए आदर्श बन सकता है।

माना जाता है कि सफल और मज़बूत रिश्ते के लिए दो लोगों की पसंद-नापसंद और व्यवहार मिलना ज़रूरी है। इसके बलबूते पर रिश्ता निभाने में आसानी होती है और आपसी प्रेम बना रहता है। रिश्तों के निबाह में इनकी मौजूदगी ज़रूरी है, लेकिन इनसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी है इमोशनल मैच्योरिटी यानी कि भावनात्मक परिपक्वता। इसका मतलब है भावनाओं और व्यवहार को समझना, संतुलित रखना और सही तरीक़े से प्रतिक्रिया देना। यह वो ख़ूबियां सिखाता है जो किसी भी रिश्ते को मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी हैं।

विश्वास और समर्पण

विश्वास हर रिश्ते की नींव है। अगर आप मुश्किल में हैं तो उससे बाहर निकालने के लिए आपका साथी साथ होगा, यह विश्वास है। और यह दोतरफ़ा होना चाहिए। वहीं अपनी इच्छा या पसंद का समर्पण कर साथी की ज़रूरत या पसंद को महत्व देना भी रिश्ते में ज़रूरी है। ये दोनों गुण रिश्ते की ज़रूरतों को समझने और उन्हें पूरा करने में मदद करते हैं।

सम्मान

रिश्ते में प्यार जितना ही ज़रूरी है सम्मान। आप अपने साथी से कैसे बात करते हैं, उसकी ज़रूरतों को ध्यान में रखते हैं और उन्हें सुनते हैं, ये सब व्यवहार में नज़र आता है। आपके किसी शब्द या बात से साथी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे, इसका ध्यान रखना भी सम्मान है। भावनात्मक परिपक्वता का यह गुण एक-दूसरे की राय व दृष्टिकोण समझने में सक्षम बनाता है, जिससे दूसरा व्यक्ति सम्मानित और मूल्यवान महसूस करता है।


बच्चों की जिम्मेदारी

पहले मम्मियों के घर में रहने के कारण बच्चों को बाहर घुमाने-फिराने की जिम्मेदारी पापा की होती थी। अब पापा-मम्मी साथ घूम रहे हों तो भी बच्चो मां के बजाय पापा की गोद में नजर आते हैं। इतना ही नहीं, बच्चों की नैपी चेंज करने से ले कर बोतल से दूध पिलाने में भी पुरूष खूब रूचि ले रहे हैं। उनका मानना है कि मां बनने की तरह बाप बनना भी चुनौतीपूर्ण और खुशियों भरा होता है। लगभग कई महिलाएं भी मानती हैं कि उनके पतियों को बच्चों को नाश्ता कराना, मुंह धुलवाना, नहाना-धुलाना और उनके साथ समय बिताना भी अच्छा लगता है।


खुद को ही सर्वश्रेष्ठ समझें


कई बातों को लेकर महिलाएं और पुरूष दोनों अपने आपको बेस्ट समझते हैं। अगर समझदारी से काम न लें, तो आने वाले समय में इस बात को लेकर आपस में तू-तू, मैं-मैं हो सकती है। इस रिश्ते में एक-दूसरे पर विश्वास करना बहुत जरूरी होता है। हमेशा खुद को ही सर्वश्रेष्ठ न समझें, सामने वाले को भी अपनी बात और काबिलियत रखने का मौका दें।


होम मिनिस्टर नहीं अपितु बेहतर होम मैनेजर बनें

होम मैनेजर महिलाओं का मानना है कि पुरूष थोडे पैसे में घर नहीं चला सकते। हाउसवाइफ पैसे के प्रबंधन में खुद को बेहतर मानती हैं। इन्हें लगता है कि होम मिनिस्टर का खिताब इन्हें विरासत में मिला है। वहीं पुरूष भी पैसा खर्च करने के उनके तरीके को ज्यादा सही नहीं ठहराते हैं। मतलब साफ है कि खुद को बेहतर गृह प्रबंधक मानने के चक्कर में आपकी पतिदेव से ठनती रहेगी। आप घर की वो धुरी हैं जिसके चारों ओर पूरे परिवार का भविष्य घूमता है इसलिए खुद को अच्छा होम मैनेजर बनाएं न कि होम मिनिस्टर।


भावनाओं
का सम्मान करें


साथी को अपनी बात रखने की आज़ादी दी है तो उन्हें सही या ग़लत आंकने के बजाय केवल सुनें। उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दें और हल निकालने की कोशिश करें।


स्वीकारें कि भावनाएं महत्वपूर्ण हैं

हमें यह समझने की ज़रूरत है कि हमारी भावनाओं को समझना, स्वीकार करना और व्यक्त करना महत्वपूर्ण है। हमारी भावनात्मक स्थिति हमारी निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है जो अंततः हमारे भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


शॉपिंग

इस बार शॉपिंग के लिए अकेले मत निकलें। अपने पति को भी साथ ले कर जाइए। आपको पता नहीं है कि आमतौर पर कंजूस समझे जाने वाले पुरूषों को शॉपिंग बेहद पसंद होती है। आज के पुरूषों का मानना है कि शापिंग के बहाने वे अपने परिवार के साथ समय भी बिता पाते हैं और दोनों ही पसंद से शॉपिंग भी अच्छी हो जाती है। और शॉपिंग का एक्सपिरिएंस हो जाने पर वे अकेले भी आपकी पसंद की शॉपिंग कर सकते हैं। पुरूषों को खुद से ज्यादा परिवारवालों के लिए शॉपिंग करना पसंद है।

पैकिंग

ऎसा माना जाता रहा है कि महिलाएं टूर पर जाते समय आवश्यकता से अधिक पैकिंग कर लेती हैं। कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान बना रही हैं तो सूटकेस पैक करने का काम हसबैंड को सौपें। लगभग 60 प्रतिशत पुरूष इस बात को सही मानते हैं। वहीं 100 में से 40 महिलाएं भी स्वीकारती हैं कि अक्सर शहर से बाहर जाते समय आवश्यकता से अधिक पैकिंग हो जाती है। इसका कारण यह है कि महिलाओं को दिनचर्या की हर वस्तु आवश्यक प्रतीत होती है। इसके विपरीत पुरूष केवल चुनिंदा और उपयोगी सामानों को ही गठरी में बांधने के आदी होते हैं।

समानुभूति का अभ्यास करें



दूसरों यानी साथी या क़रीबी की भावनाओं को समझने और उनका सम्मान करने का प्रयास करें। अभ्यास से उनकी भावनाओं और संवेदनाओं के बारे में अपनी समझ बढ़ाएं, मज़बूत संबंधों और सार्थक रिश्तों को बढ़ावा दें।


सक्रिय
रहें


संबंधों में सक्रिय भागीदारी करेंं। सक्रियता रिश्तों को आवश्यक पोषण देने का काम करती है।

संवेदनशीलता को प्रोत्साहित करें



साथी को अपने दिल की बात कहने की आज़ादी दें और सशक्त बनाएं। उन्हें अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से साझा करने का माहौल दें। उनकी ग़लतियों और असफलताओं को सुधार के अवसर के रूप में स्वीकार करें।


बराबरी
का दर्जा दें

दोनों की काबिलियत एक-दूसरे से अलग हो सकती है। इस आधार पर एक-दूसरे को छोटा महसूस कराने या कमियां गिनाने से बचें। अगर व्यक्तिगत फ़ैसले लेने हैं तब भी उनसे पूछें कि उनकी इस मामले में क्या राय है। इससे उनको सम्मान और अहमियत महसूस होगी।

ध्यान दें और सुनें


अपने साथी या क़रीबी पर ध्यान देने और उन्हें सुनने का समय निकालें, ताकि आप उनको यह एहसास करा सकें कि वे आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।



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