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सामान्य होते हालात में सुधारें बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य व भावनात्मक स्तर

लगभग बीस माह बाद बच्चों के स्कूल खुले। हर घर से खुश होकर बच्चे स्कूलों के दरवाजे पर पहुंचने लगे। उन्हें देखकर ऐसा लगा जैसे पंछी अपने पिंजरे आजाद होकर खुली हवा में सांस ले रहे हैं। जो खुशी बच्चों को घर से निकलकर स्कूल आने पर हो रही थी, कुछ ऐसी ही खुशी उनके माताओं को महसूस हो रही थी, जो पिछले 20 माह से घरों में कैद होकर बच्चों की सुरक्षा और रखवाली कर रही थी। डेढ़ वर्ष से भी अधिक समय से कोरोना महामारी के चलते बच्चे लम्बे समय से अपने दोस्तों, खेलकूद और स्कूल से दूर थे। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ा। स्कूल के अध्यापकों का कहना है कि हमने बच्चों से बात करते हुए यह महसूस किया कि बच्चों का मानसिक और भावनात्मक स्तर कमजोर हो गया है। इसका कारण शायद यह रहा है कि बच्चों ने कभी इस तरह की परिस्थिति पहले नहीं देखी थी। बच्चों को तो छोडि़ए खुद हम बड़ों ने भी यह स्थिति नहीं देखी थी। धीरे-धीरे सामान्य होते हालात में माता-पिता बच्चों के व्यवहार को अनुभव करें। उनकी चिंता और जटिल भावनाओं को समझने के लिए उनके साथ उचित व्यवहार करें। उन्हें घर में ही स्कूल की तरह का एक अच्छा और खुशनुमा वातावरण देने का प्रयास करें। आप किस तरह से यह काम कर सकते हैं ।
आइए डालते हैं एक नजर उन तरीकों पर जिनके जरिये आप उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नजर रखने के साथ-साथ उसे अच्छी तरह से समझ सकते हैं—

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Web Title-Improve childrens mental health and emotional level in normalcy
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Tags: improve childrens mental health and emotional level in normalcy
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