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योग साधना में उपयोगी मुद्राएं और बंध: मन की शांति से एकाग्रता तक, जानें इनके फायदे और सही तरीका

Useful Mudras and Bandhas in Yoga Practice: From Mental Peace to Concentration—Discover Their Benefits and Correct Techniques - Health Tips in Hindi

नई दिल्ली । योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, सांस और मन के बीच संतुलन बनाने का भी एक तरीका है। योग में कई ऐसी मुद्राएं और बंध बताए गए हैं, जिन्हें मन को स्थिर करने और एकाग्रता बढ़ना में मददगार माना जाता है। ज्ञान मुद्रा सबसे आसान और लोकप्रिय हस्त मुद्राओं में से एक है। इसे करने के लिए सुखासन, पद्मासन या किसी आरामदायक मुद्रा में रीढ़ सीधी करके बैठें। दोनों हाथ घुटनों पर रखें और तर्जनी उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से हल्के से मिलाएं। बाकी उंगलियों को सीधा और तनावमुक्त रखें। इस मुद्रा का अभ्यास ध्यान के दौरान किया जाता है और यह मन को शांत रखने तथा एकाग्रता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। चिन मुद्रा में भी अंगूठे और तर्जनी के सिरों को हल्के से स्पर्श कराया जाता है, लेकिन हथेलियां ऊपर की ओर रहती हैं। आंखें बंद करके सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। इसे प्राणायाम और ध्यान के दौरान किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से मानसिक स्थिरता और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
महाबंध को योग में तीन प्रमुख बंधों—मूलबंध, उड्डियान बंध और जालंधर बंध—के संयुक्त अभ्यास के रूप में बताया जाता है। इसमें सांस छोड़ने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार श्वास रोककर क्रम से बंध लगाए जाते हैं। यह अपेक्षाकृत उन्नत अभ्यास है, इसलिए इसे किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में सीखना बेहतर है।
उड्डियान बंध में सांस पूरी तरह बाहर निकालकर पेट को अंदर और ऊपर की ओर खींचने का अभ्यास किया जाता है। हठ योग में इसे महत्वपूर्ण आंतरिक अभ्यास माना जाता है। इसे खाली पेट और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे सीखते समय जल्दबाजी या जरूरत से ज्यादा देर तक सांस रोकने से बचें।
जालंधर बंध में सांस रोकते हुए ठोड़ी को छाती की ओर लाया जाता है। इसे भी योग की उन्नत तकनीकों में गिना जाता है। गलत तरीके से या लंबे समय तक सांस रोककर करने के बजाय प्रशिक्षक से तकनीक सीखना जरूरी है।
अगोचरी मुद्रा या नासाग्र दृष्टि में आंखों की दृष्टि को नाक की नोक पर टिकाने का अभ्यास किया जाता है। शुरुआत में कुछ सेकंड तक ही अभ्यास करें और आंखों पर जोर न डालें। इसके बाद आंखें बंद करके उन्हें आराम दें। यह अभ्यास मन को एक जगह केंद्रित करने में सहायक माना जाता है।
षण्मुखी मुद्रा में हाथों की उंगलियों की मदद से आंख, कान, नाक और मुंह के आसपास के इंद्रिय-द्वारों को हल्के से बंद करके ध्यान भीतर की ओर ले जाने की कोशिश की जाती है। इसका उद्देश्य बाहरी उत्तेजनाओं से ध्यान हटाकर भीतर की ध्वनियों और सांस पर ध्यान केंद्रित करना है।
आकाशी मुद्रा में मध्यमा उंगली और अंगूठे के सिरों को हल्के से मिलाया जाता है। इसे ध्यान के साथ किया जा सकता है और योग परंपरा में इसे मानसिक शांति तथा एकाग्रता से जोड़ा जाता है।
वहीं, शाम्भवी मुद्रा में ध्यान को दोनों भौंहों के बीच के क्षेत्र पर सहजता से केंद्रित किया जाता है। इसे जबरदस्ती आंखें ऊपर उठाकर करने के बजाय आराम से करना चाहिए। ध्यान और मानसिक स्थिरता के अभ्यास में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
--आईएएनएस

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Web Title-Useful Mudras and Bandhas in Yoga Practice: From Mental Peace to Concentration—Discover Their Benefits and Correct Techniques
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Tags: yoga practice, bandhas, mudras
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