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3 अक्टूबर का पंचांग : पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें, सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

October 3rd Panchang: Avoid traveling in the east direction, Abhijit Muhurta from 11:52 am to 12:39 pm - Vastu Tips in Hindi

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 3 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। शनिवार सुबह 6:23 बजे सूर्योदय और शाम 6:08 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 11:47 चंद्रोदय और दोपहर 1:00 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश करने से सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त नक्षत्र 13वां नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' होता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है।
शनिवार को दोपहर 3:21 बजे तक वरीयान योग रहेगा। हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 27 नित्य योगों में से 18वां योग है। संस्कृत में 'वरीयान' का अर्थ श्रेष्ठ, उत्तम, बड़ा या ऊंचा होता है। इस योग के अधिपति देवता धन के अधिपति कुबेर जी हैं और इसके प्रमुख प्रेरक ग्रह गुरु (बृहस्पति) व शुक्र माने जाते हैं। इस योग में जन्म लेने वाले जातक प्रभावशाली, राजसी, कर्मठ, कला-प्रेमी, बुद्धिमान और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।
शनिवार को शाम 4:05 से 4:05 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।
शनिवार को गुलिक काल सुबह 6:23 से 7:51 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।
इस दिन यमगंड काल दोपहर 1:44 से 3:12 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।
शनिवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में संचार करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित होता है या गोचर करता है, तो मन और बुद्धि का अनूठा मेल बनता है, क्योंकि मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और चंद्रमा मन के कारक हैं। वायु तत्व की राशि होने के कारण मन में बेचैनी, असमंजस और विचारों की अधिकता (ओवरथिंकिंग) बनी रहती है।
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा तथा ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।
--आईएएनएस

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Web Title-October 3rd Panchang: Avoid traveling in the east direction, Abhijit Muhurta from 11:52 am to 12:39 pm
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Tags: abhijit muhurta, panchang, astrology in hindi
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