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पूजा स्थल पर भूलकर भी न रखें यह वस्तुएँ, होता नकारात्मकता का संचार

Do not keep these things at the place of worship, communication of negativity happens - Vastu Tips in Hindi

सदियों से चली आ रही परम्पराओं के मद्देनजर हर इंसान अपने घर के किसी कोने में एक पूजा स्थल जरूर बनाता है। यदि वह किसी एक कमरे में ही रह रहा है तब भी उस कमरे की दीवार पर वह पूजा स्थल जरूर बनाता है। पूजा स्थल वह स्थान होता है जहाँ हम ईश्वर की आराधना करते हैं। साथ ही यह वह स्थान होता है जहाँ घर की सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा होती है। हर व्यक्ति अपने घर के पूजा स्थल को काफी सजा संवार कर रखता है, साथ ही वह इस स्थान पर हर देवी देवता की तस्वीर या मूर्ति रखता है। ऐसी स्थिति में वास्तुशास्त्र के कुछ निर्देश हैं जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए।यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो घर में नकारात्मक ऊर्जा का स्थान बढऩे लगता है। आज हम अपने खास खबर डॉट कॉम के पाठकों को ऐसी की कुछ बातों के बारे में बताने जा रहे हैं—

खंडित मूर्ति
हमारे धर्मशास्त्रों में पूजा स्थल पर देवी-देवताओं की खण्डित मूर्तियों को रखने की मनाही है। इसे अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि यदि आपने अपने पूजा स्थल पर इस प्रकार की कोई मूर्ति रख रखी है तो आपको आपकी पूजा का फल प्राप्त नहीं होगा।

खंडित अक्षत
घर के पूजा स्थल पर कभी भी खण्डित अक्षत नहीं रखने चाहिए। हमेशा वहाँ पर साबुत अक्षत (चावल) रखने चाहिए। माना जाता है कि पूजा स्थल पर खण्डित अक्षत रखना अर्थात् देवी देवताओं को झूठा परोसना है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने पूजा स्थल पर विराजमान देवी-देवताओं के लिए हमेशा साबुत अक्षत ही रखें।

पुराने फूल
अक्सर हम लोग रोजाना पूजा करने से पहले पूजा स्थल पर फूलों को रखना पसन्द करते हैं। देवी-देवताओं की पूजा में फूलों का होना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। पूजा स्थल पर हमेशा ताजा फूलों को ही रखना चाहिए। यदि किसी दिन आप ताजा फूल नहीं ला पाते हैं तो पूजा शुरू करने से पहले पिछले दिन के रखे हुए फूलों या मालाओं को आप देवी-देवताओं की मूर्तियों से हटाकर पूजा करें। इस बारे में वास्तुशास्त्र का कहना है पूजा स्थल व घर के अन्य किसी स्थान पर कभी-भी सूखे फूल या मालाएँ नहीं रखनी चाहिए। इससे दरिद्रता का आगमन होता है।

फटी हुई धार्मिक पुस्तके
हमारी आदत होती है कि हम घर के पूजा स्थल पर धार्मिक पुस्तकों को भी रखते हैं। विशेष रूप से हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, गीता, सत्यनारायण कथा आदि। धर्माचार्यों का कहना है कि पूजा स्थल पर फटी हुई धार्मिक पुस्तकें नहीं रखनी चाहिए।

मुस्कराती हुई तस्वीरें रखें, न कि रौद्र रूप वाली

अपने पूजा स्थल पर जिन भी देवी देवताओं की तस्वीरें आप रखना चाहते हैं, वह मुस्कराती हुई या फिर चेहरे पर शांत भाव लिए हुए वाली तस्वीर होनी चाहिए। भूलकर भी रौद्र रूप वाली तस्वीरों को पूजा स्थल पर न रखें, इससे घर में कलेश बढऩे की सम्भावना रहती है। साथ ही घर के सदस्य तनाव से गुजरते हैं। इन तस्वीरों में भगवान शिव की नटराज रूप वाली मूर्ति नहीं होनी चाहिए और हनुमानजी के रौद्र रूप वाली तस्वीर भी नहीं लगानी चाहिए।

एक ही तस्वीर या मूर्ति होनी चाहिए
अक्सर देखा गया है कि श्रद्धा के चलते पूजा स्थल पर एक ही देवी-देवता की एक से ज्यादा मूर्तियाँ या तस्वीर रखी होती हैं। यदि ऐसा है तो इसे तुरन्त बदलें। कहा गया है कि एक ही देवी-देवता की एक से ज्यादा मूर्ति या तस्वीरें होने से घर में खुशहाली के स्थान पर समस्याओं का प्रभाव ज्यादा होता है। घर का हर सदस्य किसी न किसी समस्या का सामना करता है।

नहीं लगाए पूर्वजों की तस्वीरें
हमें अपने घर के पूजाघर में कभी-भी अपने पूर्वजों (माता, पिता, दादा, दादी इत्यादि) की तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए। धर्मशास्त्रों में इसे वर्जित माना गया है। यदि आप अपने पूर्वजों की तस्वीरें अपने घर में लगाना चाहते हैं तो उन्हें अपने घर की दक्षिण दीवार पर लगाएँ। वास्तुशास्त्र का कहना है कि घर की दक्षिणी दीवार ही पूर्वजों का सही स्थान है। इससे आपके पूर्वज प्रसन्न होते हैं।

चाकू छुरी या धारधार वस्तु
घर के पूजा स्थल पर हमें भूलकर भी कभी चाकू, छुरी या धारदार वस्तु नहीं रखनी चाहिए। वास्तुशास्त्र का कहना है कि इससे शनि का कुप्रभाव पड़ता है।

आलेख में दी गई जानकारियों को लेकर हम यह दावा नहीं करते कि यह पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Tags: do not keep these things at the place of worship, communication of negativity happens, astrology in hindi
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