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17-18 नवम्बर को मनाई जाएगी वैंकुठ चतुर्दशी, शिव ने सौंपा था भगवान विष्णु को सृष्टि का भार

धर्मग्रन्थों में कहा गया है कि इस भगवान भोलेनाथ अर्थात् शिवजी ने सृष्टि का भार पुन: भगवान विष्णु को सौंपा था। भगवान विष्णु देवशयनी से लेकर देवउठनी एकादशी तक चार महीने निद्रा में चले गए थे। उन्होंने इस अवधि के लिए भगवान शिव को सृष्टि का भार सौंपा था। जब चार महीने के लिए भगवान विष्णु शयन निद्रा में चले जाते हैं, तब सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं और देवप्रबोधिनी एकादशी के बाद जब विष्णु जाग जाते हैं तब शिव जी उन्हें यह सृष्टि वापस दे देते हैं। इस दिन विष्णु जी की कमल पुष्पों से पूजा करनी चाहिए तथा भगवान शिव की पूजा भी करनी चाहिए।
धर्मग्रन्थों और पंडितों का कहना है कि इस दिन जो मनुष्य भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना पूरे मनोभाव से करते हैं उन्हें वैंकुठ (स्वर्ग) धाम की प्राप्ति होती है। यह दिन भगवान शिव और विष्णु जी के मिलन को दर्शाता है, अत: वैंकुठ चतुर्दशी को हरिहर का मिलन भी कहा जाता है।

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Web Title-Vainkuth Chaturdashi will be celebrated on November 17-18, Shiva had entrusted the burden of creation to Lord Vishnu
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Tags: vainkuth chaturdashi will be celebrated on november 17-18, shiva had entrusted the burden of creation to lord vishnu, astrology in hindi
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