• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

कलयुग में भगवान शिव का दूसरा घर होगा उत्तरकाशी! जानें काशी विश्वनाथ मंदिर की मान्यता

Uttarkashi Set to Become Lord Shiva Second Abode in the Kali Yuga! Discover the Significance of the Kashi Vishwanath Temple - Puja Path in Hindi

उत्तराखंड । उत्तराखंड अपने पौराणिक मंदिरों और उनसे जुड़ी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। इसी पवित्र भूमि के उत्तरकाशी जिले में स्थित है प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर, जिसे उत्तर भारत की काशी भी कहा जाता है। यह मंदिर उत्तरकाशी (जिसे प्राचीनकाल में बाड़ाहाट कहा जाता था) में भागीरथी नदी के किनारे बसा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के तट पर स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित सबसे प्राचीन और पवित्र मंदिरों में से एक है। मंदिर की भव्यता देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए आते रहते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता का बखान किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, "उत्तरकाशी जिले में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की पूजा के लिए एक पवित्र और प्रमुख केंद्र है। यहां, भक्त महादेव की पूजा और पूजा करते हैं, जिससे उन्हें आध्यात्मिक शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है। आपको भी उत्तरकाशी आने पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जरूर जाना चाहिए।"
मंदिर को लेकर एक पौराणिक मान्यता काफी सालों से चली आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कलयुग के दूसरे चरण में भगवान शिव का यह स्थल प्रमुख आवास होगा। साथ ही, यह भी कहा जाता है कि भविष्य में काशी (वाराणसी) के जलमग्न होने पर भगवान विश्वनाथ उत्तरकाशी में ही विराजमान रहेंगे।
विश्वनाथ मंदिर के आंगन और इसके सामने शक्ति मंदिर है। इस मंदिर की खासियत है कि इसमें त्रिशूल लगा है, जिसमें एक शिलालेख है, जिससे पता चलता है कि विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कैसे हुआ था। इसके अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा गणेश्वर और उनके पुत्र गुह, जो एक महान योद्धा थे, ने करवाया था। उन्हीं ने इस त्रिशूल का निर्माण करवाया था।
यह त्रिशूल 26 फीट ऊंचा है। इसके नीचे का घेरा 8 फीट 9 इंच और ऊपर का घेरा 18.5 इंच है। गोपेश्वर कस्बे में भी एक शिव मंदिर और संस्कृत शिलालेख वाला एक त्रिशूल है, लेकिन वह आकार में इससे बहुत छोटा है।
इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1857 में महारानी खानेती द्वारा कराया गया था। यह स्थान चार धाम यात्रा (विशेषकर गंगोत्री धाम) के मार्ग पर पड़ता है, इसलिए यहां साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री आते हैं।
--आईएएनएस

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-Uttarkashi Set to Become Lord Shiva Second Abode in the Kali Yuga! Discover the Significance of the Kashi Vishwanath Temple
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: kashi vishwanath temple, uttarkashi, lord shiva, astrology in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:

जीवन मंत्र

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved