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मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी के विविध रंग: द्वारकाधीश मंदिर में निकलती है झांकियां तो बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती

The Many Facets of Janmashtami in Mathura-Vrindavan: Tableaux at Dwarkadhish Temple and Mangala Aarti at Banke Bihari Temple - Puja Path in Hindi

नई दिल्ली । जन्माष्टमी आते ही देशभर में कृष्ण भक्ति का माहौल बन जाता है। मथुरा और वृंदावन में इस त्योहार की रौनक कुछ अलग ही नजर आती है। आखिर यही वह ब्रज भूमि है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और उनकी बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है। गलियों से लेकर मंदिरों तक हर तरफ कान्हा के नाम की गूंज सुनाई देती है। कहीं रात के समय कृष्ण जन्म का इंतजार होता है तो कहीं मंदिरों में बाल गोपाल का खास श्रृंगार किया जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में विशेष पूजा और जन्मोत्सव की तैयारियां होती है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में जन्माष्टमी का सबसे खास पल आधी रात का होता है। मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म कंस की जेल में आधी रात के समय हुआ था। इसलिए यहां जन्माष्टमी की रात जैसे-जैसे नजदीक आती है, भक्तों का उत्साह भी बढ़ता जाता है। मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव, पूजा, आरती और अभिषेक जैसे कार्यक्रमों के साथ कान्हा के जन्म की खुशी मनाई जाती है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आधी रात का समय सबसे खास माना जाता है। मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यहां भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। कृष्ण के जीवन से जुड़ी झांकियां धार्मिक माहौल को और खास बनाते हैं। जन्माष्टमी के मुख्य दिन विशेष श्रृंगार और रात में जन्मोत्सव जैसे कार्यक्रम भी देखने को मिलते हैं।
वहीं, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की जन्माष्टमी की सबसे खास परंपराओं में से एक यहां की मंगला आरती है। इस मंदिर में आम दिनों में मंगला आरती नहीं होती और जन्माष्टमी के मौके पर ही साल में एक बार यह खास आरती की जाती है। इस आरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त रात में ही मंदिर पहुंचते हैं।
बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। कृष्ण जन्म के बाद अभिषेक और आरती की जाती है और अगले दिन नंदोत्सव होता है। नंदोत्सव में भक्त कान्हा के जन्म की खुशी मनाते हैं, गीत गाते हैं और मिठाई बांटते हैं। इस तरह यहां जन्माष्टमी का उत्सव जन्म से लेकर नंद के घर आई खुशी तक मनाया जाता है।
उधर, वृंदावन का इस्कॉन कृष्ण-बलराम मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान भक्तों से गुलजार रहता है। यहां कृष्ण भक्ति का माहौल भजन, कीर्तन और पूजा के साथ बनता है।
वहीं, प्रेम मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का बड़ा केंद्र रहता है। यहां मंदिर की सजावट और रोशनी के बीच कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर रात 9 बजे से रात 1 बजे तक भजन-कीर्तन, अभिषेक, भोग, आरती और झूले जैसे कार्यक्रम रखे जाते हैं।
--आईएएनएस

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Web Title-The Many Facets of Janmashtami in Mathura-Vrindavan: Tableaux at Dwarkadhish Temple and Mangala Aarti at Banke Bihari Temple
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Tags: banke bihari temple, mathura, janmashtami, vrindavan, astrology in hindi
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