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सफला एकादशी 2025: इन गलतियों से खंडित हो सकता है व्रत, नियमों का रखें पूरा ध्यान

Saphala Ekadashi 2025: Mistakes that can break the Ekadashi fast - Puja Path in Hindi

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे विधि-विधान और नियमों के साथ करने से पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। वर्ष 2025 में पौष मास के कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस एकादशी को विशेष रूप से सफलता प्रदान करने वाली तिथि माना गया है, लेकिन व्रत के दौरान की गई कुछ छोटी-सी भूल भी इसके फल को कम कर सकती है। तामसिक भोजन से जुड़ी लापरवाही
एकादशी व्रत का मूल आधार सात्विक जीवनशैली है। इस दिन तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाना आवश्यक माना गया है। केवल अन्न त्याग देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि भोजन की प्रकृति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। घर में अगर इस दिन तामसिक भोजन पकता है या उसका सेवन किया जाता है, तो व्रत की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सफला एकादशी पर वातावरण और आहार दोनों को सात्विक बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
फलाहार में भी संयम का अभाव
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि फलाहार में किसी तरह की सीमा नहीं होती, लेकिन शास्त्रों में संयम को ही व्रत का सार बताया गया है। बार-बार खाना या आवश्यकता से अधिक फलाहार करना तप की भावना को कमजोर करता है। सफला एकादशी पर अल्प और सरल आहार व्रत को अधिक प्रभावी बनाता है और आत्मसंयम की भावना को मजबूत करता है।

वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण न रखना

एकादशी के दिन केवल शरीर ही नहीं, बल्कि वाणी और विचारों को भी शुद्ध रखना आवश्यक माना गया है। किसी की निंदा करना, झूठ बोलना, कटु शब्द कहना या क्रोध करना व्रत की आत्मा को नष्ट कर देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शांत स्वभाव बनाए रखना और अधिक से अधिक समय भक्ति और सकारात्मक चिंतन में बिताना व्रत को सफल बनाता है।

दिन में सोने की आदत

व्रत के दौरान थकान महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन एकादशी के दिन दिन में सोने को उचित नहीं माना गया है। शास्त्रों में इसे आलस्य का प्रतीक बताया गया है, जो व्रत की साधना को कमजोर करता है। माना जाता है कि इस दिन जागरूक रहकर भक्ति, पाठ या आत्मचिंतन में समय बिताना अधिक फलदायी होता है।

ब्रह्मचर्य के नियमों की अनदेखी

एकादशी व्रत में ब्रह्मचर्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन मन, वचन और कर्म से संयम रखने की परंपरा है। सांसारिक विषयों में अत्यधिक लिप्त रहना या संयम का पालन न करना व्रत की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है और मानसिक शुद्धता प्राप्त होती है।
सफला एकादशी का व्रत तभी पूर्ण फलदायी माना जाता है, जब इसे श्रद्धा, नियम और संयम के साथ किया जाए। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर इस व्रत को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है और इसके आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

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Web Title-Saphala Ekadashi 2025: Mistakes that can break the Ekadashi fast
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Tags: saphala ekadashi 2025, ekadashi vrat rules, hindu fasting, ekadashi significance, lord vishnu worship, indian festivals, religious news, astrology in hindi
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