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महाशिवारात्रि स्पेशल: पाताल लोक से जुड़े हैं बाबा दुग्धेश्वर महादेव, स्पर्श मात्र से मिलती है कष्टों से मुक्ति

Mahashivratri Special: Baba Dudheshwar Mahadev is connected to the underworld; a mere touch grants relief from suffering. - Puja Path in Hindi

नई दिल्ली । 15 फरवरी को देशभर के शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि का त्योहार पूरे उत्साह से मनाया जाने वाला है और उसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसी कड़ी में हम आपके लिए ऐसे शिव मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं जिसकी उत्पत्ति गाय के दूध से हुई है और इस अद्भुत शिवलिंग की जड़ें पाताल लोक से जुड़ी हैं। खास बात ये है कि मंदिर सिर्फ अध्यात्म का केंद्र नहीं बल्कि राजनीति से भी जुड़ा है। हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, उसका नाम है दुग्धेश्वर महादेव मंदिर, जो कि उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर कस्बे में बना है। मंदिर हजारों साल पुराना बताया जाता है और मंदिर को लेकर भक्तों की मान्यता भी उतनी ही मजबूत है। माना जाता है कि दुग्धेश्वर महादेव के स्पर्श दर्शन और दूध अर्पित करने से जीवन के सारे कष्ट मिल जाते हैं और शारीरिक रोगों से भी मुक्ति मिलती है, लेकिन खास बात ये है कि मंदिर के गर्भगृह में मौजूद ये शिवलिंग अनोखा है क्योंकि उसका आकार बाकी शिवलिंग से बिल्कुल अलग है।
मंदिर में स्थापित शिवलिंग दिखने में खंडित चट्टान की तरह दिखते हैं और इस रूप को चंडलिंग अवतार माना जाता है। इसका कनेक्शन उज्जैन के महाकाल से है। माना जाता है कि दुग्धेश्वर महादेव बाबा महाकाल के उप-रूप हैं, जिनके दर्शन करने से ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जितना ही पुण्य मिलता है। इसलिए जो भक्त बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन नहीं जा पाते हैं, वे देवरिया के दुग्धेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करते हैं।
18 एकड़ में बने दुग्धेश्वर महादेव के दर्शन करना भी आसान नहीं है क्योंकि महादेव जमीन से नीचे की तरफ 15 फीट पर स्थिति हैं और उनके दर्शन के लिए सीढ़ियों से नीचे उतकर जाना होता है। जमीन से नीचे की तरफ स्थापित होने की वजह से दुग्धेश्वर महादेव को पाताल का राजा कहा जाता है। माना जाता है कि शिवलिंग की जड़ें पाताल लोक से जुड़ी हैं।
मंदिर की पौराणिक कथा भी बहुत अद्भुत है। कहा जाता है कि सालों पहले एक गोपालक की गाय इसी स्थान पर आकर रोजाना दूध देती थी। जब गोपालक ने गाय का पीछा किया तो पता चला कि इस जगह पर वो दूध देती है, वहां दिव्य शक्ति स्थापित है। बाद में उसी स्थान पर स्वयंभू दुग्धेश्वर महादेव प्रकट हुए। उसी दिन से बाबा पर दूध चढ़ाने की परंपरा चली आई है।
शिवरात्रि, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में मंदिर में मेले का आयोजन होता है और बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर बाबा का विशेष शृंगार होता है और भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा पर गाय का शुद्ध दूध अर्पित करते हैं।
--आईएएनएस

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Web Title-Mahashivratri Special: Baba Dudheshwar Mahadev is connected to the underworld; a mere touch grants relief from suffering.
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Tags: mahashivratri special, baba dudheshwar mahadev, mahashivratri, astrology in hindi
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