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इन श्रीकृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी का जश्न खास, जयपुर से कुरुक्षेत्र और दिल्ली तक दिखेगा कान्हा का रंग

Janmashtami celebrations are special at these Krishna temples; the spirit of Kanha will be visible from Jaipur to Kurukshetra and Delhi. - Puja Path in Hindi

नई दिल्ली । जन्माष्टमी का नाम आते ही सबसे पहले मथुरा और वृंदावन का ख्याल आता है, लेकिन उत्तर भारत के कई दूसरे शहरों में भी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। राजस्थान के जयपुर और नाथद्वारा से लेकर हरियाणा के कुरुक्षेत्र और राजधानी दिल्ली तक कई पुराने और प्रसिद्ध मंदिर जन्माष्टमी के दिन खास पूजा, श्रृंगार, आरती और भजन-कीर्तन से सज जाते हैं। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी और इस दौरान इन मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की खास भीड़ देखने को मिल सकती है। राजस्थान के जयपुर में गोविंद देवजी मंदिर जन्माष्टमी के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस ऐतिहासिक मंदिर में जन्माष्टमी के दिन विशेष दर्शन और आरती का आयोजन होता है। जन्माष्टमी की सुबह विशेष मंगला झांकी होती है। इस दौरान भगवान गोविंद देवजी को पीले वस्त्रों में सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते है। मंगला और ग्वाल आरती के दौरान भी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ मौजूद रहती है। जयपुर के कई कृष्ण मंदिरों में सजावट, झांकियां और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। बच्चे राधा-कृष्ण के रूप में नजर आते हैं और बाजारों में भी त्योहार की रौनक दिखाई देती है।
राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथजी मंदिर भी कृष्ण भक्तों के लिए बेहद खास है। यहां भगवान श्रीनाथजी के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। मंदिर की परंपराओं में जन्माष्टमी के दिन व्रत, बाल गोपाल का श्रृंगार, अभिषेक, भोग और आधी रात जन्मोत्सव का खास महत्व है। मंदिर से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जन्म के समय भगवान को स्नान कराया जाता है, उनका श्रृंगार किया जाता है और पंजीरी, पंचामृत, फल आदि का भोग लगाया जाता है। इसके बाद आरती और बधाई गीतों के साथ जन्म की खुशी मनाई जाती है।
अगर हरियाणा के कुरुक्षेत्र की बात करें तो यहां जन्माष्टमी का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि कुरुक्षेत्र का संबंध भगवान कृष्ण और भगवद्गीता से जुड़ा हुआ है। कुरुक्षेत्र का बिरला मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और यहां जन्माष्टमी का बड़ा उत्सव मनाया जाता है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के मुताबिक, मंदिर में जन्माष्टमी पर भव्य आयोजन होता है। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर में कृष्ण की प्रतिमा और सुंदर परिसर भक्तों के लिए खास आकर्षण हैं।
कुरुक्षेत्र का इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी पर खास कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है। मंदिर की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यहां भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर अभिषेक, भोग, मंदिर की विशेष सजावट और लंबे समय तक चलने वाला कीर्तन महोत्सव आयोजित किया जाता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और प्रसाद सेवा भी की जाती है। कुरुक्षेत्र में जन्माष्टमी में पूजा के साथ सेवा और सामूहिक भक्ति का रंग भी देखने को मिलता है।
दिल्ली में भी जन्माष्टमी का उत्सव कई प्रमुख मंदिरों में खास तरीके से मनाया जाता है। राजधानी के इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दौरान भजन, कीर्तन, पूजा, अभिषेक और भगवान के विशेष दर्शन का माहौल रहता है। दिल्ली के बिरला मंदिर और अलग-अलग राधा-कृष्ण मंदिरों में भी जन्माष्टमी के दिन विशेष सजावट और पूजा की जाती है। यहां मंदिरों के आसपास भक्तों की भीड़ के साथ राधा-कृष्ण की झांकियां और भक्ति कार्यक्रम माहौल को खास बना देते हैं।
--आईएएनएस

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Tags: jaipur, kurukshetra, delhi, janmashtami celebrations, janmashtami, krishna temples, astrology in hindi
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