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आज है गोवर्धन पूजा 2025: जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि

Govardhan Puja 2025 Date, Time & Vidhi - Puja Path in Hindi

दीपावली की रौशनी के बाद जब वातावरण में श्रद्धा और पवित्रता का रंग घुल जाता है, तब आता है गोवर्धन पूजा का पर्व—एक ऐसा दिन जो न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और पशुधन के प्रति सम्मान का सजीव उदाहरण भी है। इस दिन भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण के उस अद्भुत रूप को स्मरण करते हैं, जब उन्होंने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव के घमंड को चूर किया था। गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। आमतौर पर यह दिवाली के अगले दिन आता है, लेकिन पंचांग के अनुसार हर वर्ष इसकी तिथि में थोड़ा परिवर्तन हो सकता है। ऐसे में श्रद्धालु हमेशा असमंजस में रहते हैं कि गोवर्धन पूजा आज है या कल। इस बार भी यही सवाल बार-बार उठ रहा है। गोवर्धन पूजा 2025 में कब है? जानें तारीख और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। यानी दिवाली के अगले दिन ही यह पर्व पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जाएगा।
सुबह का शुभ मुहूर्त: 06:30 बजे से 08:47 बजे तक
सायंकालीन शुभ मुहूर्त: 03:36 बजे से 05:52 बजे तक

इस दौरान पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। यदि आप सुबह नहीं कर पाए, तो संध्या वेला में भी विधिवत पूजन कर सकते हैं।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, जब ब्रजवासियों ने इंद्र देव की पूजा छोड़कर श्रीकृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की, तो इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलधार वर्षा कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर पूरे गांव को उसकी छाया में सुरक्षित कर दिया। यह दिन उस प्राकृतिक संरक्षण और अहंकार के दमन की स्मृति के रूप में मनाया जाता है।
पूजा की विधि: कैसे करें गोवर्धन पूजा
सुबह या शाम, दोनों में से किसी भी समय श्रद्धा से गोवर्धन पूजा की जा सकती है। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन जी की आकृति बनाई जाती है, जो पर्वत का प्रतीक होती है। फिर इसे फूलों, धूप-दीप, रोली, अक्षत और रंगोली से सजाया जाता है।
आकृति की नाभि में एक दीपक रखा जाता है, जिसमें दही, शहद, दूध, गंगाजल और बताशे डाले जाते हैं। इसके बाद जल से लोटा चलाते हुए और जौ बोते हुए सात बार गोवर्धन की परिक्रमा की जाती है।
यह दिन सिर्फ पर्वत या श्रीकृष्ण की पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गाय, बैल और खेतों में काम आने वाले पशुओं की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। यह प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।
क्या-क्या लगती है गोवर्धन पूजा में?
गोवर्धन पूजन की संपूर्ण सामग्री में शामिल होती है: रोली, अक्षत, बताशा, नैवेद्य, खीर, दही, शहद, दीपक, फूल, गंगाजल, गोबर, गोवर्धन की तस्वीर, कृष्ण जी की प्रतिमा या चित्र, कलश, धूप, केसर, फूलों की माला और गोवर्धन कथा की पुस्तक।
इन सभी वस्तुओं का प्रयोग पूजा के हर चरण में किया जाता है, जो पूजा को पूर्णता प्रदान करता है।
गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि धरती, जल, अन्न, पशु और प्रकृति के प्रति हमारी श्रद्धा का एक सशक्त उदाहरण है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल देवताओं की पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के सम्मान में भी है।

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Web Title-Govardhan Puja 2025 Date, Time & Vidhi
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