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बांके बिहारी के चरण दर्शन से जगन्नाथ रथ निर्माण शुरू तक, अक्षय तृतीया पर मंदिरों में होते हैं खास आयोजन

From the Charan Darshan (Viewing of the Feet) of Banke Bihari to the Commencement of the Jagannath Chariot Construction—Special Events Mark Akshay Tritiya in Temples - Puja Path in Hindi

नई दिल्ली । सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को सबसे पवित्र और शुभ तिथि में से एक माना जाता है। बैसाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि नारायण को समर्पित है। संस्कृत में ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है ‘जो कभी खत्म न हो’, इसलिए इस दिन किए गए दान, पुण्य, नए कार्य शुरू करना और घर-मंदिर का निर्माण हमेशा फलदायी माना जाता है। इस दिन पूरे 24 घंटे शुभ रहते हैं। किसी भी शुभ काम के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती। ज्योतिषियों के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन नए व्यापार, निवेश, विवाह और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत अनुकूल होता है। लिहाजा, इस पावन अवसर अक्षय तृतीया तिथि पर कई मंदिरों में विशेष उत्सव और कार्यक्रम आयोजित होते हैं। अक्षय तृतीया तिथि के दिन से चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो जाता है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट इसी दिन फिर से खुल जाते हैं। केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर भी अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर खुल जाते हैं। मान्यता है कि इन महीनों में देवता स्वयं भगवान शिव और विष्णु की पूजा करते हैं।
पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारी भी अक्षय तृतीया से शुरू होती है। पुरी में बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ के तीनों रथों का निर्माण इसी दिन प्रारंभ होता है। मंदिर के पुजारी भगवान को माला पहनाकर निर्माण कार्य की शुरुआत करते हैं।
आंध्र प्रदेश के सिंहाचलम मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन चंदन लेप हटाकर भगवान वराह नरसिंह का निज रूप दर्शन कराए जाते हैं। पूरे साल चंदन की परत से ढकी रहने वाली मूर्ति केवल अक्षय तृतीया के दिन ही भक्तों को अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई देती है। वहीं, तमिलनाडु के कुंभकोणम में कई विष्णु मंदिरों में गरुड़ वाहन पर देवताओं की शोभा यात्रा निकाली जाती है। ओडिशा के रेमुना मंदिर में भगवान क्षीरचोरा गोपीनाथ पर चंदन का लेप लगाकर ग्रीष्म ऋतु से इसी दिन राहत दी जाती है।
अक्षय तृतीया के दिन वृंदावन में कई मंदिरों में फूल सजाए जाते हैं और चंदन अलंकरण का उत्सव मनाया जाता है। साथ ही वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भगवान के पूरे साल ढके रहने वाले चरण कमल के दर्शन अक्षय तृतीया के दिन ही भक्तों को होते हैं। वृंदावन के गरुड़ गोविंद मंदिर में भगवान के विशेष दर्शन के लिए कपाट खुलता है। वहीं, वृंदावन के गरुड़ गोविंद मंदिर में भगवान विष्णु की 12 भुजाओं वाली मूर्ति भी अक्षय तृतीया के दिन ही दर्शन देती है।
इसके अलावा, अक्षय तृतीया की शुभता कई ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाओं से भी जुड़ी है। त्रेता युग की शुरुआत इसी दिन हुई थी। गंगा नदी इसी दिन पृथ्वी पर अवतरित हुई। महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना इसी दिन की थी। भगवान परशुराम का अवतार, पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति, माता अन्नपूर्णा का प्रकट होना और कुबेर का धन का देवता बनना—ये सभी घटनाएं अक्षय तृतीया के दिन घटीं।
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और सत्कर्म करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। साथ ही सोना, हल्दी की गांठ, रूई, पीली सरसों, और कौड़ी खरीदने से बरकत होती है, साथ ही घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
--आईएएनएस

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Tags: akshay tritiya, charan darshan, banke bihari, astrology in hindi
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