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बसंत पंचमी 2026: सुबह 07:13 बजे से सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त, जानें पूजा का महत्व, मंत्र और भोग

Basant Panchami 2026: Saraswati Puja Auspicious Time from 07:13 AM, Know Muhurat, Mantra and Offerings - Puja Path in Hindi

बसंत पंचमी 2026 का पर्व और धार्मिक महत्व
बसंत पंचमी को हिंदू धर्म में विद्या, ज्ञान, वाणी, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व माना जाता है। यह दिन बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होता है और इसे श्री पंचमी तथा सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय से लेकर मध्याह्न तक बनी रहती है, वह दिन सरस्वती पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी।

बसंत पंचमी 2026 की तिथि और पंचांग स्थिति

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी को तड़के 02:28 बजे होगी, जबकि इसका समापन 24 जनवरी को मध्य रात्रि 01:46 बजे होगा। उदयातिथि को मान्यता दिए जाने के कारण बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इसी दिन मां सरस्वती की पूजा, विद्यारंभ और शैक्षणिक कार्यों की शुरुआत को शुभ माना जाता है।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक का समय श्रेष्ठ माना जा रहा है। यह अवधि पूजा, आराधना और विद्या से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसी दौरान सुबह 09:19 बजे से 10:40 बजे तक का समय अमृत काल के रूप में देखा जा रहा है, जिसे पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
सरस्वती पूजा में मंत्रों का महत्व
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती के मंत्रों का उच्चारण ज्ञान, स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाने से जोड़ा जाता है। इस दिन सरस्वती वंदना और बीज मंत्रों के जप से मन को शांति और अध्ययन में स्थिरता मिलने की मान्यता है। पूजा के दौरान मंत्रोच्चारण से वातावरण भी सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

सरस्वती पूजा में भोग का धार्मिक अर्थ

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को सात्विक और शुद्ध भोजन अर्पित करने की परंपरा है। भोग में विशेष रूप से दूध से बने पदार्थ, मिठाइयां और फल शामिल किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार का भोग ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक होता है, जिससे विद्या में निरंतर प्रगति होती है।

बसंत पंचमी का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी को मां सरस्वती के प्रकट होने का दिन माना जाता है। इसके साथ ही इसे रति और कामदेव के पृथ्वी पर आगमन से भी जोड़ा जाता है, इसलिए यह पर्व केवल विद्या ही नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन का भी प्रतीक माना जाता है। विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोग इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की आराधना करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता और सटीकता का दावा नहीं किया जाता। किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले संबंधित विषय के जानकार या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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Web Title-Basant Panchami 2026: Saraswati Puja Auspicious Time from 07:13 AM, Know Muhurat, Mantra and Offerings
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