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पितृपक्ष शुरू होते ही गया जी में उमड़ा आस्था का सैलाब, चौथे दिन हजारों श्रद्धालुओं ने किए पिंडदान

As Pitru Paksha begins, a wave of faith surges in Gaya, with thousands of devotees performing Pind Daan on the fourth day. - Puja Path in Hindi

पटना/गया जी । पितृपक्ष की शुरुआत हो गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग गया जी पहुंच रहे हैं। सोमवार को भी देश भर से आए हजारों तीर्थयात्रियों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए। अलवर की तीर्थयात्री रचना शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वे अपने पितरों के मोक्ष के लिए गया जी आई हैं। उन्होंने कहा, "हम लोग अलवर के रहने वाले हैं। हम अपने पितरों के मोक्ष के लिए गया जी में पिंडदान करने आए हैं। यहां पिंडदान का बहुत महत्व है और आज हम पितृपक्ष मेले के चौथे दिन गया जी में उत्तर मानस वेदी और दक्षिण मानस वेदी पर पिंडदान कर रहे हैं।"
रचना शर्मा ने गया जी की पौराणिक कथा का जिक्र करते हुए कहा, "सदियों पहले माता सीता ने राजा दशरथ के लिए यहां पिंडदान किया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि जो भी इस पवित्र धरती पर आकर अपने पितरों के लिए पिंडदान करता है, उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह बड़े सौभाग्य की बात है कि हमें यहां आकर यह कार्य करने का अवसर मिला, इससे हमें भी पुण्य की प्राप्ति होती है।"
उन्होंने आगे कहा, "यहां आकर लगता है कि सनातन धर्म अपने चरम पर है। यहां आकर बहुत अच्छी और सकारात्मक ऊर्जा मिली। लाखों लोगों को एक साथ अपनी संस्कृति और परंपरा का पालन करते देखना गर्व की बात है। सभी लोग पूरी आस्था के साथ यह अनुष्ठान कर रहे हैं।"
इसी परिवार के एक अन्य तीर्थयात्री महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि वे पांचों भाई एक साथ पितृकर्म के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, "हम अपने माता-पिता और समस्त पितरों की मुक्ति के लिए यहां आए हैं। सनातन धर्म में यही प्रावधान है और इसी के लिए हम यहां चलकर आए हैं। हम पूरे सत्रह दिन यहां रुकेंगे।"
इस अनुष्ठान के महत्व को समझाते हुए तीर्थ पुरोहित संदीप शास्त्री ने कहा, "आज हम सत्रह दिनों के इस महा-अनुष्ठान के चौथे दिन में प्रवेश कर चुके हैं। चौथे दिन के कर्म के अंतर्गत हम पंचतीर्थ, उत्तर मानस, दक्षिण मानस, उदीची, कनखल और जिह्वालोल के नाम से पिंडदान करने आए हैं।"
उन्होंने पूजा की विधि के बारे में विस्तार से बताया, "उत्तर मानस जिसे पितामहेश्वर भी कहते हैं और दक्षिण मानस अर्थात सूर्य कुंड में बैठकर पितरों के निमित्त तर्पण, अर्पण और समर्पण किया जाता है। यहां दो सूर्य मंदिर हैं - उदयाचल और अस्ताचल। इन दोनों सूर्य मंदिरों के प्रांगण में सूर्य का पूजन कराया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पितरों को सूर्यलोक की प्राप्ति होती है। इसी निमित्त आज चौथे दिन हम सभी श्रद्धालु यहां एकत्रित होकर अपने पितरों की सद्गति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।"
--आईएएनएस

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Web Title-As Pitru Paksha begins, a wave of faith surges in Gaya, with thousands of devotees performing Pind Daan on the fourth day.
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Tags: pind daan, astrology in hindi
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