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आज नरक चतुर्दशी पर करें हनुमान जी की विशेष पूजा, जानें क्या अर्पित करें, कैसे मिलेगी लंबी आयु और कष्टों से मुक्ति

Choti Diwali 2025: Hanuman Ji Puja Today on Narak Chaturdashi for Long Life and Liberation from Suffering - Jyotish Nidan in Hindi

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी, दीपावली से ठीक एक दिन पहले आती है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में रूप चौदस, यम दीपदान और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर तेल से स्नान करना, शरीर को शुद्ध करने के साथ-साथ आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक होता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से पापों का क्षय होता है और व्यक्ति रोगों से मुक्त होकर दीर्घायु होता है। हनुमान जयंती का शुभ संयोग इस वर्ष नरक चतुर्दशी का पर्व एक विशेष संयोग लेकर आया है, क्योंकि यही वह दिन है जब प्रभु श्रीराम के परम भक्त और शिवजी के अवतार हनुमान जी का जन्म हुआ था। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म मेष लग्न, स्वाति नक्षत्र और मंगलवार के दिन मध्याह्न में हुआ था। इसी कारण कई स्थानों पर इस दिन को हनुमान जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
हनुमान जी को अर्पित करें ये वस्तुएं
हनुमान जी की पूजा में विशेष रूप से लाल रंग का चोला, सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़, भुने हुए चने, लाल फूल और तुलसी पत्र अर्पित करने की परंपरा है। भक्तगण इस दिन व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर भजन-कीर्तन करते हैं और हनुमान चालीसा तथा सुंदरकांड का पाठ करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति को मानसिक बल, शारीरिक ऊर्जा और साहस की प्राप्ति होती है। जीवन में आ रहे संकटों से राहत मिलती है और मंगल ग्रह से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं।

रूप चौदस: सौंदर्य और तेज का पर्व

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन को सौंदर्य और आत्मिक तेज बढ़ाने का दिन माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय से पूर्व उठकर तिल के तेल से मालिश करके स्नान करना न केवल शरीर को स्वच्छ करता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है। स्नान के उपरांत भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में दीप अर्पित कर लंबी आयु और आरोग्यता की कामना की जाती है। यह पर्व भीतर और बाहर, दोनों रूपों में शुद्धि और निखार लाने वाला माना गया है।
यम दीपदान का महत्व
इस दिन का एक और विशेष पहलू है यमराज के लिए दीपदान करना। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा कहा गया है, इसलिए इसी दिशा में एक विशेष दीपक जलाकर यमराज को अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और जीवन में आयु वृद्धि होती है। साथ ही पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी यह दीपदान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

धन और समृद्धि के लिए दीपदान

शाम के समय महालक्ष्मी और कुबेर के निमित्त दीप जलाकर पूजा की जाती है। कुबेर को धन के देवता माना जाता है और महालक्ष्मी को ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी। इस दिन इन दोनों की आराधना करने से जीवन में आर्थिक समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। दीप प्रज्ज्वलन के साथ-साथ लक्ष्मी कुबेर मंत्रों का जाप करने से पूजा और भी प्रभावशाली बन जाती है।

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Web Title-Choti Diwali 2025: Hanuman Ji Puja Today on Narak Chaturdashi for Long Life and Liberation from Suffering
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