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इस रत्न को पहनने के बाद रातों-रात बदल सकती है आपकी किस्मत, जानिये

After wearing this gem, your luck can change overnight, know - Jyotish Nidan in Hindi

सदियों से ज्योतिष शास्त्र हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस शास्त्र में बताई गई कई बातों से हमारी समस्याओं का समाधान होता है। साथ ही इस शास्त्र में लिखी गई बातें हमारे जीवन को संवारने का काम करती हैं। ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को बहुत महत्त्व दिया गया है। इस शास्त्र के अनुसार हर रत्न का सम्बन्ध किसी न किसी ग्रह से होता है, जो किसी न किसी व्यक्ति से जुड़ा हुआ होता है। रत्नों में नीलम को बहुत महत्त्वपूर्ण बताया जाता है। नीलम के बारे में कहा जाता है कि यदि यह किसी को फल जाए तो उसकी रातों रात किस्मत बदल देता है। नीलम रत्न धारण करना या न करना यह सभी आपकी कुंडली में मौजूद ग्रहों की दशा पर निर्भर करता है।
आज हम अपने पाठकों को इस रत्न को धारण करने सम्बन्धी कुछ जानकारी देने जा रहे हैं—

कब करें धारण
नीलम रत्न का संबंध शनि ग्रह से होता है। जब किसी की कुंडली में शनि की महादशा विपरीत होती है तब नीलम रत्न पहना जा सकता है। मेष, वृषभ, तुला और वृश्चिक राशि के जातकों पर नीलम रत्न का अच्छा और शुभ प्रभाव रहता है। वहीं जातक की कुंडली में अगर शनि चौथे, पांचवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में हो तो नीलम रत्न धारण करने पर बहुत लाभ मिलता है। इसके अलावा जब शनि छठें और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठें हो तो नीलम रत्न धारण करना शुभ माना जाता है। वहीं इस बात का ध्यान रहे जब कुंडली में शनि अशुभ हो तो नीलम नहीं पहनना चाहिए।

अच्छा परिणाम देगा कि नहीं
नीलम रत्न को धारण करने से पहले एक छोटा सा प्रयोग करना चाहिए। नीलम रत्न पहने से पहले आप उस नीलम को कपड़े में लपेट कर एक सप्ताह के लिए अपने तकिए के नीचे रखें। अगर आपको अच्छी नींद आए तो समझे कि आपके लिए नीलम पहनना शुभ रहेगा, वहीं सोते समय बुरे सपने दिखाई पड़े तो समझना चाहिए कि यह आपके लिए शुभ नहीं है।

नीलम को पहनने के नियम
जब भी नीलम रत्न धारण करें उससे पहले उसको घर पर लाने के बाद गंगाजल से भरे किसी पात्र में रख दें। फिर शनिवार के दिन अपनी बीच वाली उंगली में इसे धारण करें।

शनि ग्रह से सम्बन्धित है नीलम रत्न
वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार नीलम रत्न का संबंध शनि ग्रह से होता है। यह नीले रंग का होता है। जिस प्रकार किसी जातक की कुंडली में अगर शनि शुभ भाव में होते हैं वे उस व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार के सुख, सुविधा और ऐशोआराम को भर देते हैं। जब भी नीलम रत्न धारण करें तो इस बात का ध्यान रखें कि नीलम हमेशा उत्तम क्वालिटी का होना चाहिए।

कैसे करें असली नीलम की पहचान
बाजार में असली और नकली दोनों तरह के नीलम देखने को मिलते हैं ऐसे में असली नीलम की पहचान करना मुश्किल काम होता है। असली नीलम रत्न की पहचान गहरे नीले रंग, पारदर्शी, छुने में मुलायम और इसके अंदर देखने पर इसमें किरणें निकलती हुए प्रतीत होती हैं। असली नीलम की पहचान करने के लिए एक तरीका बहुत ही कारगर माना जाता है। अगर नीलम असली है तो इसे दूध की कटोरी में थोड़ी देर तक रखने पर दूध का रंग नीला दिखाई देने लगता है। वहीं अगर नीलम रत्न को पानी के गिलास में डालने पर पानी से किरणें दिखाई दें तो यह असली नीलम की पहचान होती है। असली नीलम में दो परत एक-दूसरे के समान्तर दिखाई पड़ती है।
न करें ऐसे काम
नीलम रत्न शनि का रत्न होता है। शनिदेव न्याय और कर्म के देवता माने जाता हैं। ऐसे में नीलम रत्न धारण करने पर व्यक्ति को हिंसा नहीं करनी चाहिए। गरीबों को बेवजह परेशान नहीं करना चाहिए। नीलम रत्न धारण करने के बाद दान जरूर करें। शनिवार के दिन मांस और मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए। नीलम रत्न पहनने के बाद किसी भी तरह के गलत कार्यों में लिप्त नहीं रहना चाहिए।

आलेख में दी गई जानकारियों को लेकर हम यह दावा नहीं करते कि यह पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Tags: after wearing this gem, your luck can change overnight, know, astrology in hindi
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