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टेसी थॉमस भारत की "मिसाइल महिला"

published: 22-11-2011

नई दिल्ली। जिस तरह पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन की संज्ञा दी गई है,उसी तरह भारतीय प्रक्षेपास्त्र परियोजना की पहली महिला निदेशक टेसी थॉमस को अब "मिसाइल महिला" व "अग्नि पुत्री" उपनाम मिल चुका है।  थॉमस भारतीय सेना में महिलाओं को युद्ध की भूमिका दिए जाने का भी समर्थन करती हैं व कहती हैं कि यदि वह इतनी तत्परता से सेना में भूमिका निभा रही हैं तो वह युद्ध क्षेत्र में भी भूमिका निभा सकती हैं। पिछले दिनों अग्नि-4 प्रक्षेपास्त्र के सफल प्रक्षेपण के बाद थॉमस रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सहकर्मी वैज्ञानिकों के साथ दिल्ली आई थीं। अग्नि-4 विषुवत रेखा के पार सफलता पूर्वक निशाने को भेदने वाला पहला भारतीय प्रक्षेपास्त्र था।> कलाम को अपना प्रेरणा स्त्रोत बताने वाली 48 वर्षीय थॉमस को 1988 से अग्नि प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम से जुडने के बाद से ही अग्नि पुत्री के नाम से भी जाना जाता है।  यह पूछने पर कि वह पुरूष प्रधान क्षेत्र में कैसे आ गईं, उन्होंने कहा, विज्ञान लिंग आधारित क्षेत्र नहीं है। रक्षा अनुसंधान और विकास एक ज्ञान आधारित क्षेत्र है। थॉमस इंजीनियरिंग स्त्रातक हैं। डीआरडीओ से जुडने के बाद भारतीय प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने थॉमस को अग्नि प्रक्षेपास्त्र परियोजना से जोड दिया था। थॉमस ने निर्देशित प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी में परास्त्रतक की डिग्री भी हासिल की है। वह 1988 से अग्नि श्रृंखला के प्रक्षेपास्त्रों से जुडी हैं और अग्नि-2 और अग्नि-3 की मुख्य टीम का हिस्सा थीं। उन्होंने कहा कि जब मैंने यहां प्रवेश किया था, तब कलाम सर प्रयोगशाला के निदेशक थे। उन्होंने ही मुझे अग्नि परियोजना दी थी।  अब थॉमस अग्नि-5 परियोजना की अगुआई कर रही हैं और उनके साथ पांच अन्य महिला वैज्ञानिक भी काम कर रही हैं। डीआरडीओ में प्रक्षेपास्त्र परियोजना से जु़डे 250 वैज्ञानिकों में 20 महिला वैज्ञानिक हैं। थॉमस 2008 में अग्नि प्रणाली की परियोजना निदेशक बनीं। उसी समय उन्हें अग्नि-2 का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी। वर्ष 2009 में उन्हें अग्नि-4 की परियोजना निदेशक बनाया गया। आगे की योजना के बारे में उन्होंने कहा, दिल थाम कर अग्नि-5 की प्रतीक्षा कीजिए। उनके निर्देशन में फरवरी 2012 में अग्नि प्रक्षेपास्त्र के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों का विकास करने में सक्षम अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

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