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संगीतकार भूपेन हजारिका नहीं रहे

published: 06-11-2011

मुंबई। मशहूर गायक  भूपेन हजारिका का शनिवार को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में 85 वर्ष की अवस्था में उनका निधन हो गया।  दादा साहब फालके पुरस्कार से सम्मानित हजारिका का इलाज 29 जून से चल रहा था और वह तभी से अस्पताल में भर्ती थे। भूपेन हज़ारिका गायक और संगीतकार होने के साथ ही एक कवि, फि़ल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे। उन्हे दक्षिण एशिया के सबसे नामचीन सांस्कृतिक संचारकों में से एक माना जाता था। भूपेन हजारिका के गीतों ने लाखों दिलों को छुआ हजारिका की असरदार आवाज में जिस किसी ने उनके गीत "दिल हूम हूम करे" और "ओ गंगा तू बहती है क्यों" सुना वह इससे इंकार नहीं कर सकता कि उसके दिल पर भूपेन दा का जादू नहीं चला। अपनी मूल भाषा आसामी के अलावा भूपेन हज़ारिका हिंदी, बंगाली समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाना गाते रहे थे। उनहोने फि़ल्म "गांधी टू हिटलर" में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन "वैश्नव जन" गाया था। भूपेन हज़ारिका को पk भूषण सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है।  भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर, 1926 को असम के सादिया में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपना पहला गीत लिखा और उसे गाया भी। तब उनकी उम्र महज दस साल थी। असमिया फिल्मों से उनका नाता बचपन में ही जु़ड गया। उन्होंने असमिया भाषा में निर्मित दूसरी फिल्म "इंद्रमालती" के लिए 1939 में काम किया था। टोकियो से मुंबई और अलास्का से असम तक जिसने भी हजारिका के मधुर गीत सुने वह उनका कायल हुए बिना नहीं रह सका।  पिछले वर्ष अपने 84वें जन्मदिन पर उन्होंने कहा था, ""मैं हमेशा सोचता हूं कि मैं जवान हूं।"" इस वर्ष आठ अक्टूबर को अस्पताल के आईसीयू में ही अपना उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया था। भूपेन दा ने 1942 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट किया और फिर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने 1946 में राजनीति विज्ञान में एम.ए. किया। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। हजारिका के संगीत में लोकरंग व संस्कृति खनकती थी। उनके गीत व संगीत मानो नदी, वन, पह़ाडों से उपजे हो। हजारिका ने न केवल असम व बंगाल के लोग संगीत को फिल्मों में इस्तेमाल किया बल्कि राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों की लोकधुनों को भी अपनाया। हजारिका का निधन संगीत उद्योग के लिए ब़डी क्षति : बॉलीवुड बॉलीवुड की हस्तियों ने पिछले महीने प्रसिद्ध गजल गायक जगजीत सिंह के निधन के बाद विख्यात संगीतकार भूपेन हजारिका के देहावसान को भारतीय संगीत उद्योग के लिए ब़डी क्षति बताया है। अपनी फिल्म "एक पल", "रूदाली" और "दमन" के लिए संगीतकार भूपेन हजारिका के साथ काम कर चुकीं फिल्मकार कल्पना लाजमी अंतिम सांस लेते समय अस्पताल में वह उनके साथ थीं। लाजमी ने टीवी संवाददाताओं से कहा, ""भूपेन हजारिका के निधन से पूरा देश शोक में डूब गया है।"" फिल्म उद्योग से जु़डे कई कलाकारों ने टि्वटर पर उन्हें याद किया। अभिनेता अक्षय कुमार ने लिखा, ""जगजीत सिंह के बाद भूपेन हजारिका के रूप में भारत ने एक और अद्भुत संगीतज्ञ को खो दिया है। उन्होंने हमें फिल्म "रूदाली" का यादगार गाना "दिल हूम हूम करे" दिया आज दुख में डूबा हुआ हमारा दिल वही गीत गा रहा है।"" फिल्मकार मधुर भंडारकर ने लिखा, ""प्रसिद्ध संगीतकार भूपेन हाजारिका के निधन के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ।"" अभिनेता संजय सूरी ने लिखा, ""यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि भूपेन हाजारिका नहीं रहे। फिल्म "दमन" के निर्माण के दौरान मैंने उनके साथ कुछ खुशनुमा पल बिताए थे।"" शांतनु मोइत्रा ने लिखा, ""भूपेन हाजारिका नहीं रहे...यह सभी संगीत प्रमियों के लिए ब़डी क्षति है।"" फिल्मकार महेश भट्ट ने टीवी संवाददाताओं से कहा कि दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता भूपेन हाजारिका ब़डों में भी ब़डे कलाकार थे, वहीं अभिनेता फारूक शेख ने कहा कि उन जैसे महान कलाकार की जगह कोई आसानी से नहीं ले सकता।

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